ऋषिकेश (मुनि की रेती): उत्तराखंड सरकार और गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) के सहयोग से गंगा रिज़ॉर्ट में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का तीसरा दिन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा। आज योग साधकों ने दून योगपीठ, देहरादून के संस्थापक योगाचार्य डॉ. बिपिन जोशी के पावन सानिध्य में कल से आरंभ हो रहे हिंदू नववर्ष (नवसंवत्सर) का भव्य स्वागत किया।
महोत्सव के तीसरे दिन के मुख्य आकर्षण
| गतिविधि | विवरण |
| विशेष आयोजन | सामूहिक दीपदान और फूलों की होली |
| मुख्य वक्ता | योगाचार्य डॉ. बिपिन जोशी |
| विषय | हिंदू नववर्ष (नवसंवत्सर) एवं ऋषि परंपरा |
| स्थान | गंगा रिज़ॉर्ट, मुनि की रेती, ऋषिकेश |
| विशेष सत्र | ध्यान (Meditation) का विशेष अभ्यास |
ऋषि परंपरा ही विश्व शांति की अचूक औषधि
सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. बिपिन जोशी ने भारतीय संस्कृति और योग के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया भय, आतंक, अलगाववाद और युद्ध की विभीषिका से जूझ रही है, तब हमारी ऋषि-मुनि परंपरा ही एकमात्र रास्ता है जो सुख और शांति ला सकती है।
"हमारी वैभवशाली परंपरा ने योग और ध्यान के रूप में विश्व को जो उपहार दिया है, वह मानवता के लिए अचूक औषधि है। हमें अपनी संस्कृति और संस्कारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए।" - डॉ. बिपिन जोशी
सामूहिक दीपदान और फूलों की होली का उल्लास
हिंदू नववर्ष (नवसंवत्सर) की पूर्व संध्या पर महोत्सव स्थल 'गंगा रिज़ॉर्ट' दीपों की रोशनी से जगमगा उठा।
- सामूहिक दीपदान: साधकों ने मां गंगा के तट पर सामूहिक रूप से दीपदान किया, जो ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक है।
- फूलों की होली: नववर्ष के स्वागत में साधकों ने एक-दूसरे पर फूलों की वर्षा कर 'फूलों की होली' खेली। यह दृश्य अत्यंत मनोरम और दिव्य था, जिसने योग महोत्सव में उत्सव जैसा माहौल पैदा कर दिया।
हिंदू नववर्ष और नवरात्रि की शुभकामनाएं
डॉ. जोशी ने जन-जन तक यह संदेश पहुँचाने का आह्वान किया कि हिंदू नववर्ष को हर्षोल्लास के साथ मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चैत्र नवरात्रि के दौरान सभी को एक-दूसरे को बधाई देनी चाहिए और अपनी गौरवशाली विरासत पर गर्व करना चाहिए। सत्र के अंत में उन्होंने साधकों को एक विशेष ध्यान सत्र (Meditation Session) भी करवाया, जिससे उपस्थित लोगों ने असीम मानसिक शांति का अनुभव किया।
योग और संस्कृति का अनूठा संगम
अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 केवल शारीरिक व्यायाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय जीवन दर्शन और उत्सवों को विश्व पटल पर रखने का एक सशक्त माध्यम बन गया है। डॉ. बिपिन जोशी के सानिध्य में मनाए गए इस उत्सव ने विदेशी साधकों को भी भारतीय नववर्ष की महत्ता से रूबरू कराया।
