देहरादून में 'बंदरों के आतंक' पर नगर निगम की स्ट्राइक: एक सप्ताह में 17 पकड़े गए, अब राजपुर रोड और डालनवाला की बारी


Aapki Media AI


देहरादून: राजधानी देहरादून के रिहायशी इलाकों में बढ़ते मानव-बंदर संघर्ष को कम करने के लिए देहरादून नगर निगम (MCD) ने वन विभाग के साथ मिलकर एक विशेष अभियान छेड़ा है। 11 मार्च से शुरू हुए इस एक सप्ताह के सघन अभियान के तहत अब तक शहर के विभिन्न हिस्सों से 17 बंदरों को पकड़ा जा चुका है। नगर निगम का लक्ष्य न केवल इन बंदरों को रिहायशी इलाकों से हटाना है, बल्कि उनकी आबादी पर लगाम लगाने के लिए नसबंदी (Sterilization) पर भी जोर दिया जा रहा है।


अभियान का लेखा-जोखा: अब तक की कार्रवाई

विवरणप्रमुख जानकारी
अभियान की शुरुआत11 मार्च 2026
अब तक पकड़े गए बंदर17 (17 मार्च तक)
सफलता वाले क्षेत्रटिहरी हाउस, ब्रह्मपुरी, रेलवे स्टेशन क्षेत्र, सुद्धोवाला
अगले टारगेट क्षेत्ररायपुर, राजपुर रोड, डालनवाला, अजबपुर कलां, सहारनपुर रोड
मुख्य अधिकारीडॉ. वरुण अग्रवाल (वरिष्ठ नगर निगम पशु चिकित्सा अधिकारी)

क्यों पड़ी इस अभियान की जरूरत?

वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. वरुण अग्रवाल के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में बंदरों द्वारा इंसानों पर हमले और घरों में घुसकर नुकसान करने की शिकायतों में भारी उछाल आया है। निवासियों ने विशेष रूप से निम्नलिखित समस्याओं की शिकायत की थी:

  • सुरक्षा का खतरा: बच्चों और बुजुर्गों पर बंदरों के हमले।
  • सामान की छिनैती: घरों की छतों से कपड़े उठाना और रसोई से खाना छीनना।
  • दहशत का माहौल: झुंड में रहने वाले बंदरों के कारण लोगों का घर से निकलना दूभर होना।

नसबंदी और पुनर्वास: वैज्ञानिक दृष्टिकोण

नगर निगम केवल बंदरों को पकड़कर छोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहा है:

  1. नसबंदी (Sterilization): पकड़े गए बंदरों की नसबंदी की जा रही है ताकि भविष्य में उनकी आबादी को नियंत्रित किया जा सके।
  2. पशु कल्याण मानक: पूरी प्रक्रिया में पशु क्रूरता निवारण नियमों का पालन किया जा रहा है।
  3. वन क्षेत्रों में वापसी: नसबंदी और स्वास्थ्य जांच के बाद बंदरों को शहर से दूर वन विभाग द्वारा निर्धारित सुरक्षित जंगलों में छोड़ा जा रहा है।

इन क्षेत्रों में लगाए जा रहे हैं पिंजरे

शिकायतों के रुझान और बंदरों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए नगर निगम ने संवेदनशील हॉटस्पॉट्स (Hotspots) की पहचान की है। अब रायपुर, राजपुर रोड, सुभाषनगर, डालनवाला, अजबपुर कलां और सहारनपुर रोड जैसे प्रमुख इलाकों में पिंजरे लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विशेष टीमें इन क्षेत्रों में निगरानी रख रही हैं।

जनता की मांग: स्थायी समाधान की दरकार

यद्यपि निवासियों ने नगर निगम की इस पहल का स्वागत किया है, लेकिन दूनवासियों का मानना है कि यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक बंदरों के लिए जंगलों में पर्याप्त भोजन (फलदार वृक्ष) उपलब्ध नहीं होगा, वे भोजन की तलाश में शहरों की ओर रुख करते रहेंगे।

डॉ. वरुण अग्रवाल का संदेश: > "हम शिकायतों के आधार पर अपनी रणनीति बदल रहे हैं। आने वाले महीनों में इस अभियान को और विस्तार दिया जाएगा ताकि बंदरों से संबंधित घटनाओं को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।"

देहरादून नगर निगम की यह सक्रियता शहर को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। यदि आप भी अपने क्षेत्र में बंदरों के आतंक से परेशान हैं, तो नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर या संबंधित वार्ड पार्षद के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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