देहरादून: उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) वी. मुरुगेसन ने पुलिस मुख्यालय में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान एडीजी ने न केवल पुलिस की उपलब्धियों को सराहा, बल्कि लंबित जांचों और लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट अल्टीमेटम भी दिया।
समीक्षा बैठक के मुख्य बिंदु: एक नज़र में
| मुख्य क्षेत्र | एडीजी के प्रमुख निर्देश / अपडेट |
| सत्यापन अभियान | 15 फरवरी से अब तक 12 लाख से अधिक लोगों का सत्यापन पूर्ण। |
| लंबित मामले | 3 साल से अधिक पुराने मामलों का शीघ्र निपटारा अनिवार्य। |
| गुमशुदा बच्चे | एफआईआर (FIR) तुरंत दर्ज करने और तलाशी अभियान में तेजी के निर्देश। |
| भूमि धोखाधड़ी | वरिष्ठ अधिकारियों की जांच के बिना दर्ज नहीं होंगे मुकदमे। |
| अंतरराष्ट्रीय अपराधी | फरार आरोपियों के खिलाफ लुक-आउट और रेड कॉर्नर नोटिस जारी होंगे। |
12 लाख लोगों का हुआ 'डिजिटल' सत्यापन
राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे सत्यापन अभियान की सफलता पर एडीजी ने संतोष व्यक्त किया।
- बाहरी राज्यों के अपराधी: उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से यह सुनिश्चित करें कि अन्य राज्यों के अपराधी उत्तराखंड में शरण न ले सकें।
- सख्ती: 15 फरवरी से शुरू हुए इस वृहद अभियान के तहत अब तक 12 लाख लोगों के रिकॉर्ड खंगाले जा चुके हैं।
भूमि धोखाधड़ी: दीवानी मामलों में हस्तक्षेप न करने की हिदायत
भूमि विवादों और धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर एडीजी ने पुलिस को 'संयम और सतर्कता' बरतने को कहा है।
- जांच अनिवार्य: अब भूमि धोखाधड़ी का मामला सीधे दर्ज नहीं होगा; वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा गहन जांच के बाद ही एफआईआर दर्ज की जाएगी।
- स्पष्ट निर्देश: पुलिस को हिदायत दी गई है कि वे शुद्ध रूप से दीवानी (Civil) मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें, ताकि पुलिस की छवि और कार्यप्रणाली पर सवाल न उठें।
लापता बच्चों के लिए 'जीरो टॉलरेंस'
गुमशुदा व्यक्तियों, विशेषकर बच्चों के मामलों में एडीजी मुरुगेसन ने 'संवेदनशीलता' पर जोर दिया।
- तत्काल FIR: बच्चे के लापता होने की सूचना मिलते ही बिना किसी देरी के एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।
- रिकवरी रेट: पुलिस को लापता व्यक्तियों की बरामदगी दर बढ़ाने और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरतने को कहा गया है।
- साप्ताहिक समीक्षा: जिला अधिकारियों (SSP/SP) को निर्देश दिया गया है कि वे हर सप्ताह गुमशुदगी के मामलों की खुद समीक्षा करें।
3 साल पुराने मामलों पर जताई चिंता
एडीजी ने उन जांचों पर गहरी चिंता व्यक्त की जो तीन साल से अधिक समय से लटकी हुई हैं। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि उचित पर्यवेक्षण (Supervision) के तहत इन फाइलों को जल्द से जल्द बंद किया जाए या चार्जशीट दाखिल की जाए। विदेश भाग चुके अपराधियों के खिलाफ अब लुक-आउट (Look-out) और रेड कॉर्नर (Red Corner) नोटिस के जरिए शिकंजा कसा जाएगा।
जन-केंद्रित पुलिसिंग की ओर कदम
एडीजी वी. मुरुगेसन की यह बैठक स्पष्ट संदेश देती है कि उत्तराखंड पुलिस अब 'स्मार्ट और सेंसिटिव' पुलिसिंग की ओर बढ़ रही है। सत्यापन अभियान से जहां बाहरी तत्वों पर लगाम लगेगी, वहीं लंबित मामलों के निपटारे से जनता का कानून पर विश्वास और मजबूत होगा।
