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अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026: "युद्ध नहीं, बुद्ध की राह दिखाएगा ध्यान" – डॉ. बिपिन जोशी ने देवभूमि से दिया विश्व शांति का संदेश

ऋषिकेश/देहरादून: अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 के भव्य आयोजन के बीच आज प्रातः काल का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। महोत्सव के प्रथम मेडिटेशन (ध्यान) सत्र का शुभारंभ दून योगपीठ, देहरादून के संस्थापक और प्रसिद्ध योगाचार्य डॉ. बिपिन जोशी के सानिध्य में हुआ। प्रार्थना के साथ शुरू हुए इस सत्र में डॉ. जोशी ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर विचार साझा किए।


सत्र की मुख्य बातें: जीवन जीने की कला और ध्यान

विषयडॉ. बिपिन जोशी के विचार
ध्यान की परिभाषाहमेशा चेतन अवस्था (Consciousness) में रहने का नाम ही ध्यान है।
वर्तमान चुनौतीमनुष्य कमाना सीख गया है, लेकिन जीवन जीना भूल गया है।
स्वस्थ शरीर की पहचान"पैर गरम, पेट नरम और माथा ठंडा" – यही स्वस्थ जीवन का सूत्र है।
वैश्विक प्रासंगिकताबारूद के ढेर पर बैठी दुनिया के लिए योग ही एकमात्र समाधान है।

"समस्या बाहर नहीं, हमारे भीतर है"

डॉ. जोशी ने उपभोक्तावाद और बाजारवाद के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि आज न केवल युवा, बल्कि छोटे बच्चे भी तनाव (Stress) का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि समस्याओं का समाधान बाहरी दुनिया में नहीं, बल्कि हमारे भीतर छिपा है।

"यदि हम ठंडे और स्थिर मन से निर्णय लेंगे, तो हम विनाशकारी युद्ध की ओर नहीं, बल्कि 'बुद्ध' की शांति और करुणा की ओर बढ़ेंगे।"

विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा संसार और योग का महत्व

वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों का जिक्र करते हुए योगाचार्य ने कहा कि एक ओर ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव है, तो दूसरी ओर रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को डरा रखा है। उन्होंने कहा:

  • पड़ोसी देशों के बीच ईर्ष्या और शत्रुता बढ़ रही है।
  • ऐसे समय में योग और ध्यान केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि विश्व शांति का अस्त्र बन जाते हैं।
  • ध्यान के माध्यम से ही मनुष्य अपनी नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मकता में बदल सकता है।

देवभूमि उत्तराखंड: योग और अध्यात्म की जननी

उत्तराखंड की महिमा का वर्णन करते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि यह राज्य केवल भौगोलिक रूप से 'उत्तर' में नहीं है, बल्कि यह चेतना का शिखर है।

  • महापुरुषों की शरणस्थली: स्वामी विवेकानंद से लेकर आधुनिक भारत के शिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक, जिस भी महापुरुष ने स्वयं को जानना चाहा, उनके कदम देवभूमि की ओर ही पड़े।
  • इसी धरती ने विश्व को मार्गदर्शन देने वाले महापुरुषों को नई दिशा और दृष्टि प्रदान की है।

आगामी सत्रों की जानकारी

आज के सफल सत्र में योगाचार्य रमेश शर्मा (डाकपत्थर महाविद्यालय), और श्री कुमार मंगलम सेमवाल (लंबगांव टिहरी) का विशेष सहयोग रहा। यदि आप इस आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो डॉ. बिपिन जोशी के आगामी सत्रों का विवरण इस प्रकार है:

  • कल सुबह: 06:00 बजे से विशेष सत्र।
  • 20 मार्च: सुबह 07:00 से 09:00 बजे तक (ध्यान पर आधारित विशेष सत्र)।

आदर्श जीवन का आधार है ध्यान

डॉ. जोशी ने अपने संबोधन के अंत में नियमित खान-पान, अपनी संस्कृति और संस्कारों के पालन के साथ-साथ योग को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया। अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का यह संदेश स्पष्ट है—शांति की खोज खुद से शुरू होती है।

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