ऋषिकेश/देहरादून, 14 मार्च 2026: योग नगरी ऋषिकेश के गंगा तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में 38वें अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का शुभारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महोत्सव में प्रतिभाग करते हुए दुनिया भर से आए योग साधकों का स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड को विश्व की 'योग राजधानी' के रूप में स्थापित करने के लिए देश की पहली “योग नीति 2025” को धरातल पर उतारने और भारी सब्सिडी देने का ऐलान किया।
योग: विश्व शांति और आत्मिक संतुलन का विज्ञान
मुख्यमंत्री धामी ने गंगा आरती और पवित्र यज्ञ में आहुति देने के बाद जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर और आत्मा के मिलन का सार्वभौमिक विज्ञान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से आज योग 180 से अधिक देशों में पहुँच चुका है, जो "वसुधैव कुटुम्बकम्" के संदेश को चरितार्थ कर रहा है।
उत्तराखंड योग नीति 2025: मुख्य आकर्षण और प्रोत्साहन
सरकार ने योग और वेलनेस सेक्टर को एक उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए ऐतिहासिक प्रावधान किए हैं:
| योजना / प्रावधान | वित्तीय सहायता / लक्ष्य |
| योग एवं ध्यान केंद्र स्थापना | ₹20 लाख तक की सब्सिडी (सब्सिडी) |
| योग शोध (Research) कार्य | ₹10 लाख तक का अनुदान |
| स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन | गढ़वाल और कुमाऊं में एक-एक ज़ोन की स्थापना |
| बजट आवंटन 2026-27 | आयुष और योग हेतु ₹10 करोड़ का विशेष प्रावधान |
| योग हब | प्रदेश में 5 नए योग हब विकसित किए जाएंगे |
गढ़वाल और कुमाऊं में बनेंगे 'स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन'
मुख्यमंत्री ने एक और बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि राज्य के दोनों मंडलों (गढ़वाल और कुमाऊं) में एक-एक 'स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन' (Spiritual Economic Zone) स्थापित किया जाएगा। इसके लिए बजट में ₹10 करोड़ की प्रारंभिक राशि आवंटित की गई है। इनका उद्देश्य आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है।
आयुष और वेलनेस पर विशेष फोकस (मुख्य बिंदु)
- आयुष्मान आरोग्य केंद्र: प्रदेश में वर्तमान में 300 से अधिक केंद्र संचालित हैं।
- आयुष चिकित्सालय: प्रत्येक जनपद में 50 और 10 बेड वाले विशेष आयुष अस्पताल स्थापित किए जा रहे हैं।
- ई-संजीवनी पोर्टल: मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञों से आयुष और प्राकृतिक चिकित्सा संबंधी परामर्श मिल रहा है।
- औषधीय पौधों का संवर्धन: आयुष नीति के तहत हिमालयी जड़ी-बूटियों की खेती और शोध को बढ़ावा दिया जा रहा है।
परमार्थ निकेतन का योगदान
मुख्यमंत्री ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि परमार्थ निकेतन पिछले 80 वर्षों से भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की लौ को विश्वभर में जलाए हुए है। महोत्सव में प्रख्यात गायक कैलाश खेर की उपस्थिति ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक ऊर्जा भर दी।
योग की वैश्विक राजधानी की ओर कदम
38वां अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड के उस संकल्प का प्रदर्शन है जिसके तहत देवभूमि को विश्व के 'वेलनेस डेस्टिनेशन' के रूप में विकसित किया जा रहा है। "योग नीति 2025" के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह योग को न केवल आस्था, बल्कि आर्थिक और वैज्ञानिक आधार पर भी सुदृढ़ करना चाहती है।
उपस्थित गणमान्य: स्वामी चिदानन्द सरस्वती, साध्वी भगवती सरस्वती, कैलाश खेर, विभिन्न देशों के योगाचार्य और हजारों अंतरराष्ट्रीय पर्यटक।
