श्रीनगर गढ़वाल, 20 मार्च 2026: उत्तराखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र को आधुनिक और तकनीक-संपन्न बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस चिकित्सालय में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण सत्र का सफल आयोजन किया गया। प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं के शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण को सुनिश्चित करना है।
डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों को मिली डिजिटल 'दीक्षा'
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों और पैरामेडिकल स्टाफ को आधुनिक डिजिटल टूल्स के बारे में विस्तार से समझाया गया। मिशन की प्रबंधक प्रज्ञा पालीवाल ने प्रशिक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
- ABHA (Ayushman Bharat Health Account): मरीजों की डिजिटल स्वास्थ्य पहचान बनाना।
- HPR (Health Professional Registration): डॉक्टरों और नर्सों का डिजिटल पंजीकरण।
- HFR (Health Facility Registration): अस्पताल और क्लीनिकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाना।
- HMIS (Hospital Management Information System): अस्पताल के कामकाज को पेपरलेस और पारदर्शी बनाना।
उत्तराखंड में डिजिटल हेल्थ का 'रिपोर्ट कार्ड'
कार्यशाला के दौरान साझा किए गए आंकड़े उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के बदलते स्वरूप को दर्शाते हैं:
| विवरण | अब तक की प्रगति |
| हेल्थ रिकॉर्ड लिंकेज | 83 लाख से अधिक |
| डिजिटल हेल्थ आईडी | 70 लाख से ज्यादा |
| हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन | लगभग 10,000 |
| डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी इकाइयां | बड़ी संख्या में सरकारी व निजी अस्पताल |
"समय की आवश्यकता है डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली": डॉ. आशुतोष सयाना
प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से मरीजों को न केवल तेज उपचार मिलेगा, बल्कि उनकी मेडिकल हिस्ट्री भी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में 'मील का पत्थर' साबित होगा।
विशेषज्ञों और अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस कार्यशाला में डिजिटल मिशन के विशेषज्ञ रमेश नेगी, नवीन चमोली, नवीन शुक्ला, अमृत पोखरियाल और प्रणव शर्मा ने तकनीकी बारीकियों को साझा किया। बेस चिकित्सालय की डिप्टी एमएस डॉ. दीपा हटवाल और संजय पांडे सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
सुगम और सुरक्षित उपचार का मार्ग
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन से अब मरीजों को पुरानी पर्चियां या भारी-भरकम फाइलें लेकर अस्पताल नहीं भटकना पड़ेगा। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड के माध्यम से राज्य के किसी भी कोने में बैठे डॉक्टर मरीज का सटीक उपचार कर सकेंगे।
नोट: यह रिपोर्ट श्रीनगर मेडिकल कॉलेज प्रशासन और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है।
