देहरादून/उत्तराखंड: वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन के साथ ही उत्तराखंड ऊर्जा निगम (UPCL) ने अपने खजाने को भरने के लिए कमर कस ली है। विभाग के सामने बिजली बिलों के भारी-भरकम बकाये की वसूली एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी को देखते हुए ऊर्जा निगम ने केवल मार्च महीने के लिए ₹225 करोड़ की वसूली का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
वसूली का अब तक का रिपोर्ट कार्ड
विभाग की सख्ती का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। ऊर्जा निगम के अधिकारियों के अनुसार, मार्च के शुरुआती हफ्तों में अब तक ₹75 करोड़ की बकाया राशि वसूल ली गई है। शेष ₹150 करोड़ की वसूली के लिए विभाग ने शहर से लेकर देहात तक सघन अभियान छेड़ दिया है।
बकाया वसूली अभियान: मुख्य आंकड़े और लक्ष्य
| श्रेणी | विवरण / धनराशि |
| कुल मार्च लक्ष्य | ₹225 करोड़ |
| अब तक की वसूली | ₹75 करोड़ (शेष: ₹150 करोड़) |
| सरकारी विभागों पर बकाया | ₹54 करोड़ |
| सबसे बड़ा सरकारी बकायेदार | सिंचाई विभाग एवं स्थानीय निकाय |
| कनेक्शन काटने की सीमा | ₹2000 से अधिक बकाया होने पर |
सरकारी विभागों पर ₹54 करोड़ का बोझ
हैरानी की बात यह है कि केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि सरकारी महकमे भी बिजली बिल चुकाने में पीछे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न सरकारी विभागों पर ₹54 करोड़ का बकाया है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी सिंचाई विभाग और नगर निकायों की है। ऊर्जा निगम इन विभागों को नोटिस जारी कर जल्द भुगतान करने का दबाव बना रहा है।
घरेलू उपभोक्ताओं पर सख्ती: ₹2000 पर कटेगी बिजली
ऊर्जा निगम ने इस बार वसूली के लिए नियमों को और कड़ा कर दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि:
- सख्त कार्रवाई: जिन घरेलू उपभोक्ताओं का बकाया ₹2,000 या उससे अधिक है, उनके कनेक्शन बिना देरी के काटे जा रहे हैं।
- विशेष टीमें: शहर और देहात क्षेत्रों के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं जो घर-घर जाकर बिल जमा करने की अपील कर रही हैं और डिफॉल्टर्स के कनेक्शन काट रही हैं।
- समय सीमा: विभाग का लक्ष्य है कि 31 मार्च की समय सीमा से पहले शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारियों की अपील: "जुर्माने से बचें"
ऊर्जा निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि बिजली चोरी और लंबे समय से बकाया बिलों के कारण विभाग को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे ऑनलाइन या विभागीय काउंटरों पर जाकर अपने बिलों का भुगतान तुरंत करें ताकि उन्हें कनेक्शन कटने या कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
सुदृढ़ ऊर्जा तंत्र की ओर कदम
ऊर्जा निगम की यह सख्ती राज्य के बिजली ढांचे को मजबूत करने के लिए आवश्यक मानी जा रही है। ₹2000 की छोटी राशि पर भी कनेक्शन काटने की कार्रवाई यह दर्शाती है कि इस बार विभाग किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
