श्रीनगर/जम्मू | 20 अप्रैल, 2026 : जम्मू-कश्मीर की फिजाओं में एक बार फिर सन्नाटा पसरने वाला है, लेकिन इस बार यह खामोशी किसी अनहोनी की नहीं बल्कि एक 'महातैयारी' की आहट है। पहलगाम हमले की बरसी से ठीक पहले, जम्मू-कश्मीर सरकार ने पूरे केंद्र शासित प्रदेश में सिविल डिफेंस एयर रेड (Air Raid) और ब्लैकआउट (Blackout) मॉक ड्रिल का हाई-प्रोफाइल आदेश जारी किया है।
20 से 24 अप्रैल 2026 के बीच होने वाले इस अभ्यास ने घाटी से लेकर जम्मू तक हलचल तेज कर दी है। सुरक्षा गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या यह सिर्फ एक रूटीन एक्सरसाइज है या किसी बड़ी सुरक्षा चुनौती का पूर्वाभ्यास?
युद्ध स्तर पर तैयारियों का खाका
जम्मू-कश्मीर गृह विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, यह अभ्यास किसी भी आपातकालीन स्थिति, विशेषकर हवाई हमले या युद्ध जैसी परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया (Emergency Response) को परखने के लिए किया जा रहा है।
मॉक ड्रिल के मुख्य बिंदु:
- एयर रेड चेतावनी: हवाई हमले के सायरन और अलर्ट सिस्टम की जांच।
- ब्लैकआउट अभ्यास: रात के समय लाइटें बंद कर पूर्ण अंधेरा सुनिश्चित करना।
- रेस्क्यू ऑपरेशन: सर्च एंड रेस्क्यू टीमों द्वारा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का अभ्यास।
- इकाईयों की तैनाती: सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स, होमगार्ड्स और फायर एंड इमरजेंसी सेवाओं को 'वॉर मोड' पर रखा गया है।
प्रशासन का सख्त निर्देश: अफवाहों से बचें
डिविजनल कमिश्नर और सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि आम जनता को इस ड्रिल के बारे में पहले से सूचित किया जाए। सरकार का उद्देश्य है कि:
- आम नागरिकों में किसी प्रकार की घबराहट या पैनिक की स्थिति न बने।
- सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर लगाम लगाई जा सके।
- जनता को विश्वास में लेकर इस महातैयारी में शामिल किया जाए।
एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) होगी अनिवार्य
सरकार ने इस बार पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया है। सभी जिला प्रशासनों को निर्देश दिए गए हैं कि मॉक ड्रिल के संपन्न होने के बाद इसकी पूरी रिपोर्ट, फोटोग्राफ्स और वीडियो साक्ष्यों के साथ गृह विभाग को सौंपी जाए। यह ड्रिल केंद्र सरकार के उन निर्देशों का हिस्सा है जिसके तहत पूरे देश में आपातकालीन स्थितियों के लिए एक समान मानक प्रक्रिया (SOP) तैयार की जा रही है।
रूटीन अभ्यास या सुरक्षा की अभेद्य बिसात?
पहलगाम हमले की बरसी के मौके पर इस तरह के अभ्यास के गहरे मायने निकाले जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरहद पार से होने वाली किसी भी नापाक साजिश को नाकाम करने के लिए यह एक 'स्ट्रेटेजिक मैसेजिंग' भी हो सकती है। जिस तरह से सर्च एंड रेस्क्यू और इमरजेंसी निकासी पर जोर दिया जा रहा है, वह दर्शाता है कि प्रशासन भविष्य की किसी भी सुरक्षा चुनौती के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
