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देहरादून, 05 मई, 2026: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने 'सॉफ्ट स्पोकन' व्यवहार के लिए जाने जाते हैं, लेकिन जब बात प्रदेश के विकास और जनता से किए गए वादों की आती है, तो वे बेहद सख्त भी हो सकते हैं। सोमवार को सचिवालय में आयोजित 'मुख्यमंत्री घोषणाओं' की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री का यही सख्त रूप देखने को मिला।
बैठक में बिना तैयारी और बिना तथ्यों के पहुँचे अधिकारियों पर मुख्यमंत्री ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाएं केवल शब्द नहीं, बल्कि जनता के प्रति सरकार का संकल्प हैं। इस प्रकार की महत्वपूर्ण बैठकों में बिना पूरी तैयारी के आना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों को कड़ी चेतावनी: तथ्यों के साथ आएं या परिणाम भुगतें
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि भविष्य में जो भी अधिकारी समीक्षा बैठक में उपस्थित होगा, उसके पास पूरी तैयारी और तथ्यात्मक जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधूरी जानकारी के कारण न केवल समय बर्बाद होता है, बल्कि विकास की गति भी धीमी पड़ती है।
- संवाद की कमी पर नाराजगी: सीएम ने विभागों के बीच आपसी समन्वय और संवाद के अभाव को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई विकास कार्य केवल इसलिए लंबित हैं क्योंकि दो विभागों के बीच तालमेल नहीं है। यह विभागीय "ईगो" जनता के हितों के बीच नहीं आना चाहिए।
- सचिवों को निर्देश: सभी सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने विभागों से संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की घोषणाओं की व्यक्तिगत रूप से गहन समीक्षा करें।
15 जून का 'अल्टीमेटम': मिशन मोड में होगा काम
मुख्यमंत्री ने बैठक में कड़े निर्देश दिए कि जिन घोषणाओं पर अभी तक शासनादेश (GO) जारी नहीं हुए हैं, उन्हें हर हाल में 15 जून तक जारी कर दिया जाए। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार 'विकल्प रहित संकल्प' के साथ काम कर रही है।
अद्यतन रिपोर्ट की मांग:
- किस विभाग में कितने प्रतिशत घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं?
- कितनी घोषणाएं लंबित हैं और उनके रुकने का वास्तविक कारण क्या है?
- जिन कार्यों के शासनादेश जारी हो चुके हैं, क्या वहां धरातल पर काम शुरू हुआ है?
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से इन सभी बिंदुओं पर तत्काल विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
अल्मोड़ा जनपद: विधानसभा वार समीक्षा का विवरण
मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा जिले की चार महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों की घोषणाओं की बिंदुवार समीक्षा की। विवरण नीचे दिया गया है:
| विधानसभा क्षेत्र | कुल समीक्षाधीन घोषणाएं | प्राथमिकता वाले क्षेत्र |
| सोमेश्वर | 90 | कृषि, सड़क और पेयजल |
| सल्ट | 69 | शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा |
| जागेश्वर | 48 | धार्मिक पर्यटन और मास्टर प्लान |
| रानीखेत | 33 | शहरी विकास और पर्यटन सुविधाएं |
शिलापट्ट न लगाने पर जिलाधिकारी होंगे जिम्मेदार
बैठक में एक और गंभीर विषय सामने आया कि कई स्थानों पर मुख्यमंत्री घोषणा के अनुरूप कार्य तो शुरू हो गए हैं, लेकिन वहां शिलापट्ट (Inauguration Plaque) नहीं लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने इसे 'प्रशासनिक लापरवाही' करार दिया।
- सख्त निर्देश: सभी कार्यस्थलों पर तत्काल शिलापट्ट लगाए जाएं ताकि जनता को पता चले कि कार्य प्रगति पर है।
- जवाबदेही तय: यदि किसी कार्यस्थल पर शिलापट्ट नहीं पाया गया, तो संबंधित जिलाधिकारी (DM) की जिम्मेदारी तय की जाएगी और उनके विरुद्ध कार्यवाही होगी।
जागेश्वर: धार्मिक पर्यटन का बनेगा 'हब'
जागेश्वर विधानसभा की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जागेश्वर धाम राज्य के लिए धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यहां की विकास परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। जागेश्वर को एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए वहां चल रहे मास्टर प्लान के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को भी आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि जो मामले जिला स्तर पर हल हो सकते हैं, उन्हें देहरादून शासन तक भेजना गलत परंपरा है।
- लोकल समाधान: छोटे विवाद, भूमि हस्तांतरण या आपसी समन्वय के मुद्दों को जिला स्तर पर ही सुलझाया जाए।
- समयबद्धता: फाइलें मेजों पर न घूमें, बल्कि निस्तारण की मेजों तक पहुँचे।
मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश
- पुनः समीक्षा बैठक: 15 जून से पहले सभी सचिवों को फिर से लंबित घोषणाओं की समीक्षा करनी होगी और अपडेट रिपोर्ट देनी होगी।
- commitment: जनता से किए गए वादे सर्वोच्च प्राथमिकता हैं, इन्हें समय पर पूरा करना सरकार की प्रतिबद्धता है।
- अंतिम छोर तक विकास: राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के अंतिम गाँव तक विकास की रोशनी पहुँचाना है।
- भविष्य की चेतावनी: बिना तैयारी बैठक में आने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) भी दी जा सकती है।
उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
बैठक में सरकार और शासन के कई महत्वपूर्ण स्तंभ मौजूद रहे:
- श्रीमती रेखा आर्य: कैबिनेट मंत्री
- विधायकगण: सल्ट, रानीखेत एवं जागेश्वर के सम्मानित विधायक
- श्री आनंद बर्द्धन: मुख्य सचिव
- श्री आर.के. सुधांशु: प्रमुख सचिव
- जिलाधिकारी: संबंधित जिलों के डीएम (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी जुड़े रहे)।
कड़े फैसले, सुखद परिणाम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यह नाराजगी उत्तराखंड के विकास के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। 15 जून तक की समयसीमा यह दर्शाती है कि सरकार अब परिणामों (Results) पर ध्यान केंद्रित कर रही है, न कि केवल प्रक्रियाओं पर। मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से सचिवालय और जिला मुख्यालयों में हड़कंप मचा हुआ है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि लंबित विकास कार्यों में अब तेजी आएगी।
