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देहरादून, 23 मई, 2026: महिलाओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ, और सम्मानजनक कार्यस्थल (Safe Workplace) सुनिश्चित करना केवल एक नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक अनिवार्य कानूनी बाध्यता भी है। इस दिशा में एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए देहरादून जिला प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के नवीनतम और बेहद सख्त दिशा-निर्देशों के शत-प्रतिशत अनुपालन को लेकर शनिवार को मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाह ने विकासभवन सभागार में जनपद के सभी विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक आपात और अत्यंत महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की।
बैठक में सीडीओ अभिनव शाह ने स्पष्ट किया कि लैंगिक समानता (Gender Equality) को बढ़ावा देने और सरकारी व सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के लिए भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को 30 मई, 2026 तक अनिवार्य रूप से आंतरिक शिकायत समिति (ICC - Internal Complaints Committee) का गठन कर अपनी अनुपालन आख्या (Compliance Report) प्रस्तुत करने का अल्टीमेटम दिया है। निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट न देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सीधे अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जवाबदेही तय की जाएगी।
कानूनी अनिवार्यता: 10 या उससे अधिक कार्मिक वाले हर दफ्तर में 'आईसीसी' का गठन अनिवार्य
मुख्य विकास अधिकारी ने 'कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम' (POSH Act) का कड़ाई से हवाला देते हुए जिले के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलावों के निर्देश दिए।
उन्होंने आदेश जारी किया कि जनपद देहरादून के अंतर्गत आने वाली सभी:
- तहसील और विकासखंड (ब्लॉक) कार्यालय
- ग्राम पंचायत स्तर के प्रशासनिक भवन
- नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर पंचायत (निकाय) स्तर के कार्यालय
इनमें से जिस भी कार्यालय में 10 या उससे अधिक महिला या पुरुष कार्मिक (स्टाफ) कार्यरत हैं, वहां तत्काल प्रभाव से एक आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन किया जाए। इस समिति में कानून के प्रावधानानुसार वरिष्ठ महिला अधिकारी को अध्यक्ष बनाया जाना और बाहरी सामाजिक संस्था (NGO) के सदस्य को शामिल करना अनिवार्य होगा, ताकि महिलाएं बिना किसी डर के अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें।
महिला सुरक्षा एवं कार्यस्थल कायाकल्प हेतु सीडीओ द्वारा जारी कड़े निर्देश
| विभाग / कार्यक्षेत्र | आवश्यक स्थापना एवं वैधानिक अनिवार्यता | निर्धारित अंतिम तिथि (Deadline) | लापरवाही पर प्रशासनिक कार्रवाई |
| 10+ कार्मिकों वाले सभी कार्यालय | आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का अनिवार्य गठन। | 30 मई, 2026 | संबंधित विभागाध्यक्ष (HOD) के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि। |
| 50+ महिला कार्मिकों वाले सार्वजनिक भवन | कामकाजी माताओं के लिए 'शिशु गृह' (क्रैच केंद्र - Creche) की स्थापना। | प्राथमिकता के आधार पर | भवन प्रभारी की व्यक्तिगत जवाबदेही। |
| परिवहन, शिक्षा एवं पर्यटन स्थल | सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन, इंसीनेरेटर, अमृत कक्ष (फीडिंग रूम)। | तत्काल क्रियान्वयन | औचक निरीक्षण में कमी मिलने पर सस्पेंशन। |
| समस्त राजकीय कार्यालय | महिला हेल्पलाइन नंबर 181 और आपातकालीन नंबर 112 के बिलबोर्ड। | 30 मई, 2026 | सार्वजनिक रूप से दृश्यता सुनिश्चित करना अनिवार्य। |
मातृत्व अधिकारों की रक्षा: 'अमृत कक्ष' और 'शिशु गृह' (क्रेच केंद्र) बनाना अब कानूनी बाध्यता
सीडीओ अभिनव शाह ने बैठक में महिला कार्मिकों के मातृत्व अधिकारों (Maternity Rights) और स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष रूप से जोर दिया। उन्होंने कहा कि कामकाजी महिलाओं को नौकरी और मातृत्व के बीच एक कठिन संघर्ष करना पड़ता है, जिसे आसान बनाना प्रशासन का दायित्व है।
50 से अधिक महिला कार्मिकों के लिए क्रैच अनिवार्य:
मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम-2017 (Maternity Benefit Amendment Act) के सख्त प्रावधानों को लागू करते हुए सीडीओ ने निर्देश दिए कि जिस भी सार्वजनिक या सरकारी भवन में 50 या उससे अधिक महिला अधिकारी व कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां अनिवार्य रूप से एक अत्याधुनिक शिशु गृह (Creche Center) स्थापित किया जाए। यहां कामकाजी माताएं ड्यूटी के दौरान अपने छोटे बच्चों को रख सकेंगी, जिससे वे तनावमुक्त होकर अपनी व्यावसायिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।
इसके साथ ही, धात्री माताओं (स्तनपान कराने वाली माताओं) और उनके नवजात शिशुओं के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी प्रमुख कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर "अमृत कक्ष" (ब्रेस्टफीडिंग रूम - Feeding Room), स्वच्छ शौचालय और महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग कक्ष की व्यवस्था सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
व्यक्तिगत स्वच्छता पर फोकस: हर दफ्तर के शौचालय में लगेंगी सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें
महिला कार्मिकों के स्वास्थ्य, व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene) और गरिमा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने एक अत्यंत प्रगतिशील और आवश्यक कदम उठाया है। मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी सरकारी कार्यालयों के महिला शौचालयों में:
- सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें (Sanitary Pad Vending Machines): तत्काल स्थापित की जाएं ताकि आपात स्थिति में महिलाओं को असुविधा न हो।
- इंसीनेरेटर (Incinerators): प्रयुक्त पैड्स के सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण के लिए आधुनिक इंसीनेरेटर मशीनें भी अनिवार्य रूप से लगाई जाएं।
सीडीओ ने इस संबंध में परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग और पर्यटन विभाग को विशेष रूप से लक्षित करते हुए कहा कि केवल सरकारी दफ्तर ही नहीं, बल्कि आम जनता और महिला पर्यटकों से जुड़े सार्वजनिक स्थानों जैसे—बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, टैक्सी स्टैंड, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, प्रमुख धार्मिक स्थल और सार्वजनिक पार्कों में भी इन मशीनों और 'अमृत कक्ष' की स्थापना को पहली प्राथमिकता दी जाए।
सार्वजनिक और कार्यस्थलों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के 4 मुख्य स्तंभ
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित चार बिंदुओं पर केंद्रित मास्टर प्लान तैयार किया है:
- जागरूकता के लिए बिलबोर्ड की स्थापना: सभी कार्यालयों के प्रवेश द्वार और मुख्य परिसरों में महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से बचाव, निषेध एवं निवारण संबंधी कानूनों की जानकारी देने वाले बड़े-बड़े डिस्प्ले बोर्ड (Billboards) लगाए जाएंगे।
- आपातकालीन हेल्पलाइन का प्रचार: महिला सहायता के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर 181 और आपातकालीन पुलिस सेवा नंबर 112 को इन बिलबोर्ड्स पर बड़े अक्षरों में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि कोई भी महिला संकट के समय तुरंत संपर्क कर सके।
- शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance): कार्यस्थल पर सहकर्मियों द्वारा की जाने वाली किसी भी प्रकार की अनुचित टिप्पणी, मानसिक उत्पीड़न या लैंगिक भेदभाव के मामलों में 'शून्य सहिष्णुता' की नीति अपनाई जाएगी।
- नियमित मॉनिटरिंग और ऑडिट: 30 मई को अनुपालन आख्या प्राप्त होने के बाद जिला प्रशासन की एक विशेष टीम औचक निरीक्षण (Surprise Audit) कर यह जांचेगी कि धरातल पर कमेटियां और मशीनें चालू हालत में हैं या नहीं।
वैधानिक प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा: जिला कार्यक्रम अधिकारी ने दी सुप्रीम कोर्ट के नियमों की जानकारी
बैठक के दौरान तकनीकी और कानूनी बारीकियों को स्पष्ट करने के लिए महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार ने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों और उनके अनुपालन से जुड़े विधिक प्रावधानों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि आईसीसी (ICC) का गठन न करना या उसमें विसंगतियां होना सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) माना जाएगा। उन्होंने विभिन्न विभागों के आए अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप (Format) की प्रतियां सौंपी, जिस पर उन्हें 30 मई तक अपनी रिपोर्ट भरकर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय को सौंपनी है।
प्रशासनिक चेतावनी: "देरी हुई तो रुकेगा वेतन, विभागाध्यक्ष होंगे सीधे जिम्मेदार"
सीडीओ अभिनव शाह ने बैठक के समापन पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सभी विभागाध्यक्षों (HODs) को आगाह किया कि वे इस आदेश को एक सामान्य सरकारी सर्कुलर समझने की भूल कतई न करें। 30 मई की शाम तक यदि किसी विभाग की अनुपालन आख्या जिला मुख्यालय नहीं पहुंचती है, तो संबंधित विभाग के मुखिया की जवाबदेही तय करते हुए शासन को उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण और उनकी सुरक्षा को लेकर अत्यंत संवेदनशील है। देवभूमि के किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी दफ्तर में महिला कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय या सुरक्षा में चूक बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
आधी आबादी की सुरक्षा और सम्मान की दिशा में ऐतिहासिक कदम
देहरादून जिला प्रशासन द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के तहत उठाया गया यह कदम राजधानी की कामकाजी महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ी राहत और सुरक्षा की गारंटी लेकर आया है। अक्सर देखा जाता है कि कागजों पर तो समितियां बन जाती हैं, लेकिन धरातल पर महिलाओं को बुनियादी सुविधाएं जैसे सेपरेट सैनिटरी व्यवस्था या ब्रेस्टफीडिंग रूम के लिए तरसना पड़ता है।
सीडीओ अभिनव शाह द्वारा समय सीमा (30 मई) तय करना और शौचालयों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन से लेकर 50 से अधिक महिलाओं वाले दफ्तरों में क्रैच (शिशु गृह) अनिवार्य करना यह दर्शाता है कि प्रशासन इस बार केवल औपचारिकता नहीं कर रहा, बल्कि कार्यस्थलों का वास्तविक कायाकल्प करने जा रहा है। इस व्यवस्था के लागू होने से न केवल कामकाजी महिलाओं की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि वे पूरी गरिमा, सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ देश और राज्य के विकास में अपना योगदान दे सकेंगी।
