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देहरादून जिला प्रशासन की बड़ी पहल: शत-प्रतिशत दिव्यांग संजीव कुमार का ऋण माफ, बेटियों की शिक्षा और रोजगार के लिए भी मिली आर्थिक मदद


Aapki Media AI


 देहरादून। उत्तराखंड सरकार और जिला प्रशासन द्वारा जनसमस्याओं के निस्तारण और निर्धन परिवारों को संबल प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री के जनसेवा संकल्प के मार्गदर्शन में कार्रवाई करते हुए देहरादून के जिलाधिकारी (डीएम) सविन बंसल ने ईस्ट पटेल नगर निवासी शत-प्रतिशत दिव्यांग संजीव कुमार और उनके परिवार को एक बड़ी आर्थिक राहत प्रदान की है।

देहरादून जिला प्रशासन की बड़ी पहल: शत-प्रतिशत दिव्यांग संजीव कुमार का ऋण माफ, बेटियों की शिक्षा और रोजगार के लिए भी मिली आर्थिक मदद


लंबे समय से कर्ज और आजीविका के संकट से जूझ रहे इस दिव्यांग परिवार की फरियाद पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने न केवल उनका बकाया ऋण जमा करवाया, बल्कि परिवार के स्थाई पुनर्वास और बच्चों की शिक्षा के लिए भी ठोस प्रबंध किए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह कदम समाज के अंतिम छोर पर खड़े जरूरतमंद व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं और सहायता को पहुंचाने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

 लॉकडाउन से प्रभावित हुआ व्यवसाय

प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, ईस्ट पटेल नगर निवासी संजीव कुमार शारीरिक रूप से 100 प्रतिशत दिव्यांग हैं, जबकि उनकी पत्नी 65 प्रतिशत दिव्यांग हैं। परिवार की आय का कोई स्थाई साधन नहीं होने के कारण जीवन यापन अत्यंत कठिन परिस्थितियों में हो रहा था।


  1. ऋण की स्वीकृति: संजीव कुमार ने वर्ष 2018 में अपनी आजीविका चलाने के उद्देश्य से उत्तराखंड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम, देहरादून से मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोलने के लिए 50 हजार रुपये का ऋण लिया था।
  2. प्रारंभिक भुगतान: ऋण लेने के बाद शुरुआती दौर में उन्होंने ईमानदारी से लगभग 15 से 20 किश्तों का नियमित भुगतान भी किया।
  3. व्यवसाय पर संकट: वर्ष 2020 में देशव्यापी कोरोना महामारी और उसके बाद लगे लॉकडाउन के कारण संजीव कुमार की मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान पूरी तरह बंद हो गई। आय का एकमात्र स्रोत समाप्त होने के कारण परिवार के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया, जिसके चलते वे ऋण की शेष किश्तें जमा करने में असमर्थ हो गए।

तहसील स्तर से आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी होने पर बढ़ा मानसिक तनाव

ऋण की अदायगी न होने की स्थिति में संबंधित निगम द्वारा नियमानुसार कार्रवाई करते हुए 64,915 रुपये की आरसी (Recovery Certificate) तहसील देहरादून को भेज दी गई थी। इस बीच, दिव्यांग दंपति केवल सरकार द्वारा मिलने वाली 3,000 रुपये की मासिक पेंशन के सहारे अपनी तीन नौनिहाल बेटियों का पालन-पोषण कर रहे थे।

आर्थिक तंगी के कारण स्थिति इतनी दयनीय हो गई थी कि बेटियों की स्कूली शिक्षा तक प्रभावित होने की कगार पर पहुंच गई थी। प्रार्थी संजीव कुमार ने जिलाधिकारी की जनसुनवाई में उपस्थित होकर अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने अवगत कराया कि तहसील स्तर से आरसी जारी होने के बाद कानूनी कार्रवाई और जेल भेजे जाने की चेतावनियों के कारण पूरा परिवार अत्यधिक मानसिक तनाव और भय के माहौल में जी रहा था।

जिलाधिकारी सविन बंसल का त्वरित एक्शन और राहत के निर्देश

मामले के सभी मानवीय और विधिक पक्षों को देखने के बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जहां परिवार अत्यंत लाचार और दिव्यांग हो, वहां नियमों के दायरे में रहकर हर संभव मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

जिलाधिकारी ने मामले के निस्तारण के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए:


"संजीव कुमार की शारीरिक स्थिति और परिवार की आर्थिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उनकी बकाया ऋण राशि 64,915 रुपये को सीएसआर (CSR) और राइफल क्लब फंड के माध्यम से तत्काल जमा कराया जाए। इसके साथ ही तहसील स्तर से जारी आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) की कार्रवाई को तुरंत समाप्त कर परिवार को मानसिक तनाव से मुक्त किया जाए।"


प्रशासन के इस निर्णय से न केवल संजीव कुमार के सिर से भारी-भरकम कर्ज का बोझ उतरा, बल्कि उन्हें तहसील की कानूनी कार्रवाई से भी बड़ी राहत मिली।

आत्मनिर्भरता के लिए 25 हजार की सहायता और बेटियों को 'शिक्षा कवच'

जिला प्रशासन ने संजीव कुमार को केवल तात्कालिक कर्ज से ही राहत नहीं दी, बल्कि उनके परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने और उन्हें पुनः आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी कदम उठाए।

  • रोजगार हेतु आर्थिक मदद: संजीव कुमार दोबारा अपना मोबाइल रिपेयरिंग का काम शुरू कर सकें, इसके लिए जिलाधिकारी ने राइफल क्लब फंड से 25,000 रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता स्वीकृत की। इस राशि से वे अपनी दुकान के लिए आवश्यक उपकरण और सामग्री खरीद सकेंगे।
  • प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा शिक्षा कवच: दिव्यांग दंपति की तीन छोटी बेटियों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए, इसके लिए जिलाधिकारी ने जिला कार्यक्रम अधिकारी (बाल विकास) को विशेष निर्देश जारी किए हैं। तीनों बेटियों को 'प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा' के अंतर्गत शामिल कर उनकी शिक्षा सहायता के लिए पात्रता की जांच कर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।

मामले का मुख्य विवरण 

क्र.सं. विवरण (Case Metrics) प्रशासनिक निर्णय एवं वर्तमान स्थिति (Administrative Action)
1. प्रार्थी का नाम एवं निवासी संजीव कुमार, ईस्ट पटेल नगर, देहरादून
2. शारीरिक दिव्यांगता की स्थिति पति: 100% दिव्यांग, पत्नी: 65% दिव्यांग
3. लिया गया मूल ऋण (वर्ष 2018) 50,000 रुपये (उत्तराखंड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम)
4. बकाया ऋण राशि (आरसी मूल्य) 64,915 रुपये (सीएसआर/राइफल क्लब फंड से पूर्ण भुगतान)
5. रोजगार हेतु अतिरिक्त सहायता 25,000 रुपये (राइफल क्लब फंड से स्वीकृत)
6. बच्चों की शिक्षा हेतु योजना 3 बेटियों को 'प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा' के तहत सहायता के निर्देश

जनसुनवाई को लेकर अधिकारियों को कड़े प्रशासनिक निर्देश

इस संवेदनशील मामले के निस्तारण के साथ ही जिलाधिकारी सविन बंसल ने जिले के सभी प्रशासनिक अधिकारियों और विभागीय अध्यक्षों के लिए एक सामान्य दिशा-निर्देश भी जारी किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र का मुख्य उद्देश्य जनता की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान करना है।

अधिकारियों को दिए गए मुख्य निर्देश इस प्रकार हैं:


  • प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण: जनसुनवाई या जिला स्तर पर प्राप्त होने वाले ऐसे गंभीर और संवेदनशील मामलों को प्राथमिकता की श्रेणी में रखा जाए।
  • संवेदनशीलता की आवश्यकता: गंभीर रूप से बीमार, बुजुर्ग, महिलाओं और दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों में केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बजाय संवेदनशील और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाए।
  • अंतिम व्यक्ति तक लाभ: यह सुनिश्चित किया जाए कि जिले का कोई भी पात्र और जरूरतमंद व्यक्ति जानकारी या संसाधनों के अभाव में सरकारी सहायता से वंचित न रहे।

जिला प्रशासन की इस त्वरित और योजनाबद्ध कार्रवाई से जहां एक ओर पीड़ित परिवार को नई शुरुआत करने का हौसला मिला है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक जवाबदेही और संवेदनशीलता का एक सकारात्मक संदेश भी समाज में गया है।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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