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देहरादून : उत्तराखंड की पवित्र वादियों और चारधाम यात्रा मार्गों को पर्यावरण अनुकूल व स्वच्छ बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण जन अभियान की शुरुआत की गई है। राजधानी देहरादून के टाउन हॉल ऑडिटोरियम में स्पर्श गंगा अभियान के अंतर्गत "प्लास्टिक से पुण्य" नामक विशेष कार्यक्रम का आधिकारिक और भव्य शुभारंभ किया गया। यह अभियान स्पर्श गंगा अभियान की राष्ट्रीय संयोजिका, समाजसेविका एवं अभिनेत्री डॉ. आरुषि निशंक की अगुवाई में संचालित किया जा रहा है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है। साथ ही, संवेदनशील पर्वतीय मार्गों पर उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक और उचित निस्तारण सुनिश्चित करना है, ताकि देवभूमि के पर्यावरण संतुलन को बिगड़ने से बचाया जा सके।
प्रधानमंत्री के 'स्वच्छ भारत मिशन' से प्रेरित है अभियान
आयोजकों के अनुसार, "प्लास्टिक से पुण्य" अभियान पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "स्वच्छ भारत मिशन" के दृष्टिकोण और उनकी प्रेरणा के अनुरूप तैयार किया गया है। उत्तराखंड के चारधाम—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—के साथ-साथ इनके मुख्य यात्रा मार्गों पर हर साल टनों की मात्रा में प्लास्टिक कचरा और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक जमा हो जाता है।
टाउन हॉल में जुटे शासन-प्रशासन के वरिष्ठ नीति-निर्माता
इस पर्यावरण संरक्षण मुहिम को सरकारी और प्रशासनिक स्तर पर सुदृढ़ समर्थन प्रदान करने के लिए कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की। सभी अतिथियों ने डॉ. आरुषि निशंक के इस प्रयास की सराहना की और इसे राज्य की पारिस्थितिकी के लिए एक अत्यंत आवश्यक कदम बताया।
मंच पर उपस्थित रहने वाले मुख्य चेहरों में निम्नलिखित प्रमुख व्यक्ति शामिल थे:
- सुबोध उनियाल: वन एवं पर्यावरण मंत्री, उत्तराखंड सरकार। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वनों और पर्वतीय क्षेत्रों को प्लास्टिक मुक्त रखना सरकार की प्राथमिकता है और इसमें जनभागीदारी अनिवार्य है।
- सौरभ थपलियाल: महापौर, देहरादून। उन्होंने नगर निगम स्तर पर इस अभियान को हर संभव तकनीकी और ढांचागत सहयोग देने का आश्वासन दिया।
- ओम प्रकाश जमदग्नि: राज्यमंत्री (दर्जा प्राप्त), उत्तराखंड सरकार। उन्होंने सामाजिक स्तर पर इस अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथियों, विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों और स्पर्श गंगा अभियान के कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से देवभूमि उत्तराखंड को स्वच्छ, सुंदर, हरित और पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त बनाने का महासंकल्प लिया।
