ढोल-नगाड़ों के साथ विदाई: विकासनगर के दो शातिर अपराधी देहरादून से 'तड़ीपार', हिमाचल बॉर्डर पर पुलिस ने छोड़ा


Aapki Media AI


विकासनगर/देहरादून, 05 मई, 2026: राजधानी देहरादून की सड़कों पर सोमवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला। आमतौर पर ढोल-नगाड़े किसी उत्सव या स्वागत में बजते हैं, लेकिन कोतवाली विकासनगर पुलिस ने इनका इस्तेमाल अपराधियों को खदेड़ने के लिए किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून के 'अपराध मुक्त दून' अभियान के तहत, पुलिस ने क्षेत्र के दो कुख्यात और आदतन अपराधियों को ढोल-नगाड़ों और मुनादी (लाउडस्पीकर घोषणा) के साथ जिले की सीमा से बाहर कर दिया।

विकासनगर के दो शातिर अपराधी देहरादून से 'तड़ीपार', हिमाचल बॉर्डर पर पुलिस ने छोड़ा

यह कार्रवाई जिलाधिकारी देहरादून द्वारा जारी 'जिला बदर' आदेशों के अनुपालन में की गई। अपराधियों को बाकायदा पुलिस सुरक्षा में हिमाचल प्रदेश के पाँवटा साहिब बॉर्डर तक ले जाया गया और सख्त हिदायत दी गई कि अगले छह महीनों तक उन्होंने देहरादून की धरती पर कदम रखा, तो अंजाम जेल की सलाखें होगा।

कौन हैं ये 'तड़ीपार' अपराधी?

विकासनगर क्षेत्र में शांति व्यवस्था के लिए नासूर बन चुके इन दोनों अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने काफी समय पहले 'गुंडा अधिनियम' के तहत रिपोर्ट तैयार की थी।

  • राहुल कश्यप: निवासी कश्यप मोहल्ला, जीवनगढ़। राहुल पर चोरी, नकबजनी और अवैध हथियार (आर्म्स एक्ट) के आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं।
  • आसिफ: निवासी मुस्लिम बस्ती, विकासनगर। आसिफ का अपराध ग्राफ बेहद चौकाने वाला है। उस पर लूट, डकैती और अवैध हथियारों के लगभग 18 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।

विकासनगर पुलिस के अनुसार, इन दोनों की छवि जनता के बीच बेहद खराब थी और इनके कारण इलाके में हमेशा डर का माहौल बना रहता था। जनहित को सर्वोपरि रखते हुए धारा 3(1) गुंडा अधिनियम के तहत इन्हें 06 माह के लिए जिला बदर करने की संस्तुति की गई थी।

कार्यवाही का तरीका: ढोल-नगाड़ों के साथ मुनादी

04 मई 2026 को पुलिस ने एक अनोखे अंदाज में इस आदेश का पालन किया। पुलिस टीम दोनों अभियुक्तों को उनके निवास स्थान से लेकर निकली। साथ में ढोल बजाने वाले चल रहे थे और पुलिस लाउडस्पीकर से मुनादी कर रही थी ताकि पूरी जनता जान सके कि इन अपराधियों को अब क्षेत्र से निकाल दिया गया है।

हिमाचल बॉर्डर पर छोड़ा: पुलिस टीम इन्हें देहरादून की सीमा से बाहर पाँवटा साहिब (हिमाचल प्रदेश) के बॉर्डर पर ले गई। वहां उन्हें औपचारिक रूप से जिले की सीमा से बाहर धकेलते हुए चेतावनी दी गई कि यदि 6 महीने की अवधि पूरी होने से पहले वे जिले में पाए गए, तो उनके खिलाफ नई और कठोर धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।

अपराधियों का 'स्कोरकार्ड' और जिला बदर विवरण

विवरणअपराधी 1: राहुल कश्यपअपराधी 2: आसिफ
निवासीकश्यप मोहल्ला, जीवनगढ़मुस्लिम बस्ती, विकासनगर
कुल मुकदमे0718
प्रमुख अपराधचोरी, आर्म्स एक्ट, आबकारीलूट, डकैती, अवैध हथियार
जिला बदर अवधि06 माह06 माह
कार्रवाई की तिथि04 मई, 202604 मई, 2026
सीमा से बाहर का स्थानपाँवटा साहिब, हिमाचल बॉर्डरपाँवटा साहिब, हिमाचल बॉर्डर

अपराध का काला इतिहास: राहुल और आसिफ की फाइलें

इन दोनों अभियुक्तों का आपराधिक इतिहास यह बताने के लिए काफी है कि वे समाज के लिए कितने बड़े खतरे थे।

1. राहुल कश्यप की कुंडली:

राहुल कश्यप पर 2023 से लेकर 2025 तक लगातार मुकदमे दर्ज हुए। जिनमें आर्म्स एक्ट (अवैध चाकू/तमंचा), घर में घुसकर चोरी (380/457 भादवि) और हाल ही में 2025 में आबकारी अधिनियम के तहत मामला शामिल है। कुल 7 मुकदमों के साथ वह इलाके का आदतन नकबजन बन चुका था।

2. आसिफ का खौफनाक रिकॉर्ड (18 मुकदमे):

आसिफ का आपराधिक सफर साल 2017 से शुरू हुआ और आज तक जारी है।

  1. लूट और डकैती: उस पर धारा 392 (लूट) और 394 (लूट के दौरान चोट पहुँचाना) के कई मामले दर्ज हैं।
  2. हथियारों का शौक: आसिफ की हिस्ट्रीशीट में 10 से ज्यादा मुकदमे केवल 25/4 आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार रखने) के हैं।
  3. नया कानून: उस पर नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 304(2) और 317(2) के तहत भी हाल ही में केस दर्ज हुआ था।

पुलिस की चेतावनी और जनता को संदेश 

एसएसपी देहरादून ने इस कार्यवाही के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है:

  • अपराधियों के लिए: जो अपराधी सुधरने को तैयार नहीं हैं, उन्हें समाज के बीच रहने का कोई हक नहीं है। पुलिस उन्हें इसी तरह सार्वजनिक रूप से बेइज्जत कर बाहर निकालेगी।
  • जनता के लिए: पुलिस आपकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। ढोल-नगाड़ों के साथ की गई इस मुनादी का उद्देश्य जनता के मन से अपराधियों का खौफ निकालना है।
  • भविष्य की योजना: दून पुलिस आने वाले दिनों में जिले के अन्य थानों (जैसे डोईवाला, ऋषिकेश, सहसपुर) के टॉप-10 अपराधियों पर भी इसी प्रकार की जिला बदर की कार्यवाही करने जा रही है।

सुशासन की दिशा में जिलाधिकारी का बड़ा कदम

जिलाधिकारी देहरादून ने गुंडा अधिनियम की रिपोर्ट का गहन संज्ञान लेते हुए इन दोनों को 'लोक व्यवस्था' के लिए खतरा माना। जिला मजिस्ट्रेट के आदेश में स्पष्ट है कि समाज में शांति बनाए रखने के लिए ऐसे तत्वों का भौगोलिक निष्कासन अनिवार्य है। विकासनगर कोतवाली प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जिस तत्परता से हिमाचल बॉर्डर पर इन्हें 'डिपोर्ट' किया, उसकी स्थानीय नागरिकों ने सराहना की है।

खौफ का अंत, शांति की शुरुआत

विकासनगर पुलिस की इस "ढोल-नगाड़ा" स्टाइल कार्यवाही ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस अब केवल कागजों पर काम नहीं कर रही, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी अपराधियों को तोड़ने का काम कर रही है। राहुल कश्यप और आसिफ जैसे अपराधियों का जिला बदर होना पछवादून क्षेत्र के व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब देखना यह है कि ये अपराधी 6 महीने बाद सुधरकर वापस आते हैं या फिर अपराध का रास्ता ही अपनाते हैं।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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