ऋषिकेश के चर्चित पूर्व मेयर प्रत्याशी दिनेश चंद मास्टर ने थामा 'उक्रांद' का दामन; बोले—"भू-कानून और मूल निवास की लड़ाई के लिए क्षेत्रीय दल ही एकमात्र विकल्प


Aapki Media AI


देहरादून/ऋषिकेश, 22 मई, 2026: उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। तीर्थनगरी ऋषिकेश की राजनीति में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान रखने वाले तथा ऋषिकेश नगर निगम के पिछले मेयर चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में तहलका मचाने वाले चर्चित नेता दिनेश चंद मास्टर ने अब क्षेत्रीय राजनीति में अपनी एक नई और बड़ी पारी की शुरुआत कर दी है। लंबे समय से चल रही राजनीतिक अटकलों पर विराम लगाते हुए दिनेश चंद मास्टर ने औपचारिक रूप से उत्तराखंड के सबसे पुराने क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल (Ukranti Dal - उक्रांद) की सदस्यता ग्रहण कर ली है।

दामन थामने की मुख्य वजह: "भू-कानून, मूल निवास और क्षेत्रीय अस्मिता की रक्षा सर्वोपरि"
पूर्व मेयर प्रत्याशी दिनेश चंद मास्टर ने थामा 'उक्रांद' का दामन


 

राजधानी देहरादून में आयोजित एक गरिमामय और भव्य राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान उक्रांद के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिनेश चंद मास्टर का उक्रांद में शामिल होना केवल ऋषिकेश ही नहीं, बल्कि संपूर्ण गढ़वाल मंडल में क्षेत्रीय राजनीति के समीकरणों को बदलने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गेम-चेंजर (Game-Changer) कदम साबित हो सकता है।

भू-कानून, मूल निवास और क्षेत्रीय अस्मिता की रक्षा सर्वोपरि

उक्रांद की सदस्यता लेने के तुरंत बाद मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए दिनेश चंद मास्टर ने राष्ट्रीय दलों (भाजपा और कांग्रेस) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका राजनीति में आने का उद्देश्य केवल सत्ता पाना नहीं, बल्कि उत्तराखंड के उन मूल सिद्धांतों की रक्षा करना है जिनके लिए इस राज्य का गठन हुआ था।

उन्होंने उक्रांद में शामिल होने के तीन सबसे प्रमुख कारण बताए:

  • सख्त भू-कानून (Land Laws): उत्तराखंड की बेशकीमती जमीनों को बाहरी भू-माफियाओं से बचाने के लिए प्रदेश में हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर एक बेहद सख्त और कड़ा भू-कानून लागू होना अनिवार्य है, जिसकी लड़ाई केवल उक्रांद ही ईमानदारी से लड़ रहा है।
  • मूल निवास 1950 (Domicile Issue): राज्य के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा और सरकारी नौकरियों में उन्हें प्राथमिकता दिलाने के लिए वर्ष 1950 के कट-ऑफ के आधार पर मूल निवास कानून लागू होना चाहिए।
  • क्षेत्रीय अस्मिता: उत्तराखंड की जल, जंगल और जमीन पर पहला हक यहां के मूल निवासियों का है। राष्ट्रीय दल दिल्ली के इशारों पर चलते हैं, इसलिए वे राज्य के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं।

जनता अब विकल्प चाहती है:

दिनेश चंद मास्टर ने कहा कि, 

"उत्तराखंड की देवतुल्य जनता अब बारी-बारी से राज करने वाले राष्ट्रीय दलों की नीतियों से पूरी तरह से ऊब चुकी है। प्रदेश की जनता अब विकास और अपनी पहचान के लिए एक मजबूत, ईमानदार और स्थानीय क्षेत्रीय शक्ति को विकल्प के रूप में देखना चाहती है और वह विकल्प सिर्फ उत्तराखंड क्रांति दल है।"

 

 

 

 

दिनेश चंद मास्टर के उक्रांद में शामिल होने का राजनीतिक प्रोफाइल


राजनीतिक बिंदु / विवरणऋषिकेश मेयर चुनाव और आगामी राजनीतिक रणनीति की रूपरेखा
नेता का नामदिनेश चंद मास्टर (पूर्व वरिष्ठ निर्दलीय मेयर प्रत्याशी, ऋषिकेश)।
नया राजनीतिक दलउत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद / UKD)।
सदस्यता ग्रहण स्थलकेंद्रीय मुख्य कार्यालय, देहरादून (उत्तराखंड)।
पूर्व राजनीतिक पृष्ठभूमिऋषिकेश नगर निगम चुनाव में निर्दलीय लड़कर मुख्य दलों को दी थी कड़ी टक्कर।
मुख्य राजनीतिक मुद्देसख्त भू-कानून, मूल निवास स्वाभिमान और स्थानीय युवाओं को रोजगार।
पार्टी को संभावित लाभऋषिकेश, मुनिकीरेती, ढालवाला और डोईवाला बेल्ट में उक्रांद का कैडर होगा मजबूत।

पृष्ठभूमि: कौन हैं दिनेश चंद मास्टर? क्यों चर्चा में रहा था पिछला मेयर चुनाव

गौरतलब है कि दिनेश चंद मास्टर उत्तराखंड के सामाजिक और राजनीतिक हल्कों में कोई नया नाम नहीं हैं। ऋषिकेश नगर निगम के पिछले चुनावों में उन्होंने एक निर्दलीय (Independent) प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरकर राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया था।

  • स्थानीय मुद्दों पर आक्रामक रुख: चुनाव के दौरान उन्होंने ऋषिकेश की जर्जर सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली, त्रिवेणी घाट के सुंदरीकरण और स्थानीय व्यापारियों के उत्पीड़न जैसे बुनियादी मुद्दों को बेहद आक्रामक तरीके से उठाया था।
  • त्रिकोणीय मुकाबला: हालांकि उस चुनाव में सत्ताधारी दल और मुख्य विपक्षी दल के पास भारी-भरकम संसाधन और स्टार प्रचारक थे, लेकिन इसके बावजूद दिनेश चंद मास्टर ने अपने व्यक्तिगत रसूख, साफ-सुथरी छवि और 'मास्टर जी' के नाम से मशहूर अपने सामाजिक नेटवर्क के दम पर चुनाव को पूरी तरह से त्रिकोणीय (Triangular) बना दिया था। उन्हें मिले भारी जनसमर्थन ने यह साबित कर दिया था कि ऋषिकेश की जनता एक स्थानीय और सुलभ चेहरे की तलाश में है।

उक्रांद नेताओं ने किया जोरदार स्वागत; कहा—"ऋषिकेश में पार्टी को मिलेगी नई ऊर्जा"

देहरादून में आयोजित इस ज्वाइनिंग प्रोग्राम में उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे। उक्रांद के वरिष्ठ नेताओं ने दिनेश चंद मास्टर को पार्टी का पारंपरिक पटका और माला पहनाकर संगठन में उनका जोरदार स्वागत किया।

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस मौके पर कहा कि:

"दिनेश चंद मास्टर जैसे ईमानदार, जुझारू और जमीन से जुड़े नेता के आने से उत्तराखंड क्रांति दल को ऋषिकेश, मुनिकीरेती, लक्ष्मणझूला और उसके आसपास के ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में एक नई और अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। उनकी साफ-सुथरी छवि का लाभ पार्टी को आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य के विधानसभा चुनावों में निश्चित रूप से मिलेगा। उक्रांद अपने पुराने गौरव को वापस पाने के लिए ऐसे सभी राष्ट्रवादी और उत्तराखंडी विचार के लोगों को एक मंच पर ला रहा है।"


दिनेश चंद मास्टर के आने से उक्रांद को होने वाले 4 बड़े फायदे 

ऋषिकेश और गढ़वाल की राजनीति को करीब से देखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, इस ज्वाइनिंग से उक्रांद को निम्नलिखित रणनीतिक लाभ मिल सकते हैं:

  • शिक्षित और प्रबुद्ध वर्ग में पैठ: दिनेश चंद मास्टर की पहचान एक शिक्षक (मास्टर) और प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में है। उनके आने से ऋषिकेश के बुद्धिजीवी वर्ग, शिक्षकों और व्यापारियों के बीच उक्रांद की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ेगी।युवा वोट बैंक का जुड़ाव: पिछले चुनाव में युवाओं की एक बहुत बड़ी टीम दिनेश चंद मास्टर के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चली थी। वह पूरी युवा टीम अब उक्रांद के झंडे के नीचे आएगी, जिससे संगठन का ढांचा मजबूत होगा।
  • तीर्थनगरी में मजबूत विकल्प: ऋषिकेश को उत्तराखंड का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यहां लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। दिनेश चंद के रूप में उक्रांद को एक ऐसा स्थापित चेहरा मिल गया है जो इन दोनों दलों के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकता है।
  • आगामी निकाय चुनावों में बढ़त: राज्य में होने वाले आगामी नगर निगम और स्थानीय निकाय चुनावों में उक्रांद अब ऋषिकेश सीट पर पूरी मजबूती और आक्रामकता के साथ अपनी दावेदारी ठोकने की स्थिति में आ गया है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा: आगामी चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा गहरा असर

दिनेश चंद मास्टर का अचानक उक्रांद का दामन थामना राजनीतिक गलियारों में एक सोची-समझी और लंबी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वर्तमान में उत्तराखंड के भीतर "सुरक्षित भू-कानून" और "मूल निवास 1950" को लेकर युवाओं और आम नागरिकों के भीतर एक अंडरकरंट (आंतरिक आक्रोश) चल रहा है। देहरादून से लेकर हल्द्वानी तक बड़े-बड़े स्वाभिमान और महारैलियों का आयोजन हो रहा है।

चूंकि उत्तराखंड क्रांति दल शुरुआत से ही इन मुद्दों को अपने घोषणापत्र का मुख्य बिंदु बताता आया है, इसलिए दिनेश चंद मास्टर ने बहुत सही समय पर इस कार्ड को खेला है। उन्होंने खुद को उत्तराखंड के मूल आंदोलनकारियों की सोच के साथ जोड़कर राष्ट्रीय दलों के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा खोलने का संदेश दे दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके इस कदम के बाद ऋषिकेश के अन्य निर्दलीय और असंतुष्ट नेता क्या रुख अपनाते हैं।

क्षेत्रीय ताकतों का एकजुट होना उत्तराखंड के भविष्य के लिए शुभ संकेत

ऋषिकेश के कद्दावर नेता दिनेश चंद मास्टर का उत्तराखंड क्रांति दल में शामिल होना यह साफ संकेत देता है कि राज्य गठन के 26 वर्षों के बाद भी यहां की जनता और स्थानीय नेता कहीं न कहीं राष्ट्रीय दलों की कार्यशैली से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। पहाड़ की बुनियादी समस्याओं जैसे पलायन, रोजगार, लचर स्वास्थ्य व्यवस्था और भू-कानून पर जो काम होना चाहिए था, वह अब भी अधूरा है।

ऐसे में दिनेश चंद मास्टर जुझारू और जनप्रिय शख्सियत का उक्रांद में जाना दल के लिए एक 'संजीवनी' की तरह है। यदि उक्रांद ऐसे मजबूत चेहरों को आगे रखकर धरातल पर काम करता है, तो निश्चित रूप से उत्तराखंड की राजनीति में आने वाले दिनों में राष्ट्रीय दलों को एक कड़ी और वास्तविक चुनौती का सामना करना पड़ेगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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