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देहरादून, 17 जून, 2026: उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून और उससे सटे ऋषिकेश क्षेत्र में बेशकीमती जमीनों पर अवैध कब्जे, धोखाधड़ी और खुद को 'पीड़ित' दिखाकर प्रशासनिक तंत्र को गुमराह करने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। परगना परवादून, तहसील ऋषिकेश के अंतर्गत आने वाले रामनगर डांडा क्षेत्र के बहुचर्चित भूमि विवाद में आज पीड़ित भूमि स्वामी संजीव गुप्ता ने देहरादून स्थित 'उत्तरांचल प्रेस क्लब' में एक हाई-प्रोफाइल प्रेस वार्ता (Press Conference) आयोजित कर मामले की विधिक और वास्तविक सच्चाई को साक्ष्यों सहित मीडिया के सामने रखा।
संजीव गुप्ता ने सनसनीखेज दस्तावेज और सरकारी राजस्व आख्या (Revenue Investigation Reports) पेश करते हुए बताया कि जो विपक्षी पक्ष खुद को समाज के सामने 'गरीब, लाचार और दिव्यांग किसान' के रूप में पेश कर स्थानीय मीडिया, पुलिस प्रशासन और जनमानस की सहानुभूति बटोरने का प्रयास कर रहा है, असल में वह एक शातिर और आदतन भू-माफिया सिंडिकेट है। संजीव गुप्ता ने बताया कि एक सोची-समझी विधिक और सामाजिक साजिश के तहत उन्हें बदनाम करने और उनकी वैध भूमि को हड़पने के उद्देश्य से सोशल मीडिया और कतिपय मंचों पर 'भूमाफिया' के रूप में प्रचारित किया गया, जबकि हकीकत इसके ठीक विपरीत है।
सरकारी रिकॉर्ड की गवाही: राजस्व जांच में संजीव गुप्ता के नाम दर्ज है शत-प्रतिशत संपत्ति
भूमि विवादों में सबसे बड़ा और अंतिम विधिक साक्ष्य राजस्व विभाग (Revenue Department) का स्वामित्व रिकॉर्ड होता है। संजीव गुप्ता ने प्रेस वार्ता के दौरान तहसील ऋषिकेश और जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज और खतौनी (Land Ownership Documents) प्रदर्शित की।
- वैध भूमि स्वामी: राजस्व विभाग की सघन जांच, सीमांकन (Demarcation) और सरकारी खतौनी के अनुसार, विवादित श्रेणी में डाली गई रामनगर डांडा की वह पूरी संपत्ति विधिक रूप से संजीव गुप्ता के नाम पर पंजीकृत (Registered) है।
- दावों का कोई आधार नहीं: विपक्षियों द्वारा किया जा रहा मालिकाना हक का दावा कानून की नजर में पूरी तरह शून्य और तथ्यहीन पाया गया है। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने अपनी जमीनी जांच में स्पष्ट किया है कि संजीव गुप्ता की भूमि पर विपक्षियों का दावा केवल एक प्रशासनिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
रामनगर डांडा भूमि विवाद 2026: विधिक साक्ष्य, राजस्व स्थिति एवं नामजद आरोपी मैट्रिक्स
इस गंभीर भूमि विवाद के तकनीकी पहलुओं, राजस्व विभाग के विधिक स्टैंड और कानून हाथ में लेने वाले आरोपियों की सूची को इस व्यापक प्रशासनिक तालिका में संकलित किया गया है:
| विधिक एवं राजस्व मानक (Legal Parameters) | संजीव गुप्ता द्वारा प्रस्तुत आधिकारिक साक्ष्य (Evidence) | विपक्षी पक्ष का फर्जी स्टैंड एवं हथकंडे (Opposition Tactics) | विधिक धाराएं एवं प्रशासनिक प्रभाव (Legal Sections Involved) |
| मालिकाना हक (Ownership Status) | ऋषिकेश तहसील के सरकारी रिकॉर्ड एवं खतौनी में नाम दर्ज। | स्वयं को 'भूमिहीन किसान' बताकर झूठी सहानुभूति बटोरना। | उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश अधिनियम (ZAMRA) के तहत वैध स्वत्व। |
| अवैध कब्जा प्रयास (Land Grabbing) | राजस्व सीमांकन रिपोर्ट के अनुसार संजीव गुप्ता का विधिक कब्जा। | सरकारी पुश्ता तोड़कर और मेढ़ काटकर जमीन हड़पने का प्रयास। | आईपीसी/भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत संपत्ति को नुकसान पहुंचाना। |
| पर्यावरणीय अपराध (Forest Crime) | घटनास्थल पर हरे-भरे प्रतिबंधित पेड़ों को अवैध रूप से काटने के प्रमाण। | विकास कार्यों के नाम पर अवैध कटान को छुपाने की कोशिश। | उत्तराखण्ड वन संरक्षण अधिनियम एवं संबंधित वन विधिक मुकदमे। |
| मुख्य नामजद आरोपी (Accused Persons) | राकेश बडोनी, लक्ष्मण, अमित बडोनी, शिवम बडोनी, नागेंद्र नेगी आदि। | पुलिस विभाग के शीर्ष अधिकारियों को भ्रामक शिकायतें भेजना। | वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करने और झूठी गवाही की श्रेणी। |
| प्रशासनिक शिकायत स्टेटस | एसएसपी (SSP) देहरादून और आईजी गढ़वाल को वास्तविक साक्ष्य सौंपे गए। | शीर्ष पुलिस फोरम पर संजीव गुप्ता के खिलाफ 'भूमाफिया' का झूठा प्रोपेगैंडा। | पीड़ित पक्ष द्वारा मानहानि (Defamation) एवं सुरक्षा की विधिक मांग। |
'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे': आरोपियों पर ही दर्ज हैं हरे पेड़ काटने और अवैध कब्जे के मुकदमे
प्रेस वार्ता में सबसे बड़ा धमाका तब हुआ जब पीड़ित संजीव गुप्ता ने अपने विरोधियों का आपराधिक और विधिक बैकग्राउंड मीडिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि जो लोग खुद को संत और कानून का पालन करने वाला बता रहे हैं, वे असल में आदतन कानून तोड़ने वाले (Habitual Law Breakers) हैं।
संजीव गुप्ता के अनुसार, इन विरोधियों पर पहले से ही सरकारी और निजी जमीनों पर अवैध कब्जा करने, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हुए बिना विधिक अनुमति के हरे पेड़ काटने और भूमि की सुरक्षा के लिए बनाए गए पुश्ते (Retaining Walls) को जबरन तोड़ने जैसे गंभीर मामलों में आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। सच सामने आने और पुलिस विभाग द्वारा विधिक कार्रवाई शुरू होने के बाद भी इन आरोपियों के हौसले बुलंद हैं। मामले में 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' वाली कहावत चरितार्थ करते हुए आरोपी अपनी कमियों को छुपाने के लिए जिला और मंडल स्तर के शीर्ष अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं।
षड्यंत्र का ताना-बाना: एसएसपी (SSP) और आईजी गढ़वाल को भेजे जा रहे झूठे शिकायती पत्र
पीड़ित संजीव गुप्ता ने गहरे मानसिक अवसाद और आर्थिक नुकसान की व्यथा साझा करते हुए बताया कि नामजद आरोपी—राकेश बडोनी, लक्ष्मण, अमित बडोनी, शिवम बडोनी, नागेंद्र नेगी और चंद्र किशोर बडोनी एक सुनियोजित सिंडिकेट की तरह काम कर रहे हैं।
पीड़ित संजीव गुप्ता का विधिक बयान:
"ये सभी आरोपी भ्रामक, मनगढ़ंत और पूरी तरह तथ्यहीन आरोप लगाकर मेरा और मेरे परिवार का लगातार मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न कर रहे हैं। जब ये लोग राजस्व विभाग की जांच में अपनी जमीन साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहे, तो इन्होंने एक नया हथकंडा अपनाया है। ये आरोपी अब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून और आईजी (IG) गढ़वाल रेंज को लगातार झूठे और मनगढ़ंत शिकायती पत्र भेज रहे हैं, ताकि पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाकर मामले को भटकाया जा सके और मुझे विधिक रूप से प्रताड़ित किया जा सके। मैं एक सम्मानित नागरिक और वैध भूमि स्वामी हूं, लेकिन इन सौदागरों ने मेरी छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।"
भू-माफिया सिंडिकेट के हथकंडों के विरुद्ध संजीव गुप्ता की 4-स्तरीय प्रशासनिक मांगें
प्रेस वार्ता के अंत में संजीव गुप्ता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की "नो टॉलरेंस ऑन भू-माफिया" नीति पर भरोसा जताते हुए शासन-प्रशासन से चार मुख्य विधिक मांगें कीं:
- फास्ट-ट्रैक पुलिस जांच: एसएसपी देहरादून स्वयं इस मामले का संज्ञान लें और आरोपियों द्वारा भेजे जा रहे शिकायती पत्रों की सत्यता की जांच एलआईयू (LIU) या किसी स्वतंत्र विंग से कराएं, जिससे झूठी शिकायत करने वालों का चेहरा बेनकाब हो सके।
- अवैध कब्जाधारियों की तुरंत गिरफ्तारी: जिन आरोपियों के खिलाफ हरे पेड़ काटने, पुश्ता तोड़ने और संजीव गुप्ता की वैध भूमि पर जबरन घुसने (Criminal Trespass) के पुख्ता विधिक सबूत हैं, उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।
- राजस्व सीमांकन को सुरक्षा प्रदान करना: ऋषिकेश तहसील प्रशासन द्वारा संजीव गुप्ता की भूमि पर विधिक पैमाइश के अनुसार पक्के पिलर और बाउंड्री वॉल बनाने के लिए पुलिस सुरक्षा (Police Protection) मुहैया कराई जाए, ताकि आरोपी दोबारा वहां कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न कर सकें।
- झूठे प्रोपेगैंडा पर विधिक कार्रवाई: मीडिया और सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर एक वैध नागरिक को 'भूमाफिया' बताने वाले आरोपियों और उनके मददगारों के खिलाफ आईपीसी/बीएनएस की सुसंगत धाराओं के तहत मानहानि और आपराधिक षड्यंत्र का मुकदमा चलाया जाए।
सुशासन के दौर में 'विक्टिम कार्ड' खेलने वालों पर विधिक कड़ाई जरूरी
देहरादून के रामनगर डांडा (ऋषिकेश) से सामने आया यह भूमि विवाद इस बात का जीवंत प्रमाण है कि किस प्रकार भू-माफिया और जमीनों के अवैध सौदागर कानून के शिकंजे से बचने के लिए 'विक्टिम कार्ड' (Victim Card) यानी खुद को गरीब और लाचार दिखाने का स्वांग रचते हैं। आधुनिक सुशासन और पारदर्शी विधिक प्रणाली में किसी भी विवाद का निपटारा सोशल मीडिया की भावुकता या झूठी शिकायतों से नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) और प्रमाणित साक्ष्यों के आधार पर होता है।
संजीव गुप्ता द्वारा उत्तरांचल प्रेस क्लब में प्रस्तुत किए गए दस्तावेज यह साफ करते हैं कि वे कानूनन अपनी संपत्ति के शत-प्रतिशत मालिक हैं। ऐसे में, राकेश बडोनी, लक्ष्मण, अमित बडोनी और उनके साथियों द्वारा एसएसपी व आईजी गढ़वाल जैसे सम्मानित विधिक पदों को झूठे पत्रों के जरिए व्यस्त रखना और एक वैध नागरिक का मानसिक उत्पीड़न करना बेहद चिंताजनक है। उत्तराखण्ड सरकार की नीति जमीनों की धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ अत्यंत सख्त है। अतः देहरादून जिला प्रशासन और पुलिस कप्तान को इस मामले में 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' की नीति अपना रहे इन शातिर आरोपियों के खिलाफ त्वरित और कड़ा विधिक एक्शन लेना चाहिए, ताकि देवभूमि में कानून का राज और एक वास्तविक वैध नागरिक का भरोसा सुरक्षित रह सके।
