गंभीर बीमार 4 बच्चों का होगा मुफ्त इलाज; भू-माफियाओं और बुजुर्गों को सताने वाले बहू-बेटों पर कसेगा कानून का शिकंजा; 146 जनसमस्याएं दर्ज


Aapki Media AI


देहरादून, 15 जून, 2026 : लोकतंत्र और सुशासन की वास्तविक कसौटी यह है कि प्रशासनिक तंत्र समाज के सबसे गरीब, पीड़ित और असहाय नागरिक की आवाज को कितनी संवेदनशीलता के साथ सुनता है। इसी विधिक और मानवीय प्रतिबद्धता का एक सर्वोत्कृष्ट उदाहरण आज देहरादून कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में देखने को मिला। जिला प्रशासन की त्वरित और मानवीय पहल के चलते आज का ‘समाधान दिवस’ आर्थिक तंगी और मानसिक प्रताड़ना से जूझ रहे कई जरूरतमंद परिवारों के लिए अंधकार में रोशनी की एक नई और अटूट किरण बनकर आया।

भू-माफियाओं और बुजुर्गों को सताने वाले बहू-बेटों पर कसेगा कानून का शिकंजा; 146 जनसमस्याएं दर्ज


जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के कड़े दिशा-निर्देशन तथा अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) श्री के.के. मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित इस जनसुनवाई (Public Grievance Redressal Day) में जमीन विवाद से लेकर जीवन रक्षक आर्थिक मदद तक की कुल 146 जनसमस्याएं दर्ज की गईं। प्रशासन ने न केवल अधिकांश मामलों का मौके पर ही विधिक निस्तारण किया, बल्कि भू-माफियाओं, बुजुर्गों का उत्पीड़न करने वाले असामाजिक तत्वों और स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे मासूम बच्चों के मामलों में ऐसे क्रांतिकारी आदेश जारी किए, जिसने शासन व्यवस्था के प्रति जनता के विश्वास को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है।


मानवीय चेहरा: सिर में रसौली और किडनी की बीमारी से पीड़ित 4 मासूमों का होगा पूर्ण निःशुल्क इलाज


ऋषिपर्णा सभागार में आज उस समय माहौल बेहद भावुक हो गया, जब चार अत्यंत निर्धन परिवार अपने कलेजे के टुकड़ों को गोद में लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के सामने रो पड़े। ये मासूम बच्चे सिर में रसौली (Brain Tumor/Cyst), किडनी की गंभीर बीमारी (Severe Kidney Disease) और आंतों की जटिल समस्याओं (Complex Intestinal Disorders) के कारण जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे। पैसे के अभाव में इनका इलाज रुका हुआ था।

  1. डीएम के निर्देशों पर तत्काल एक्शन: जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के पूर्व-निर्देशों का अनुपालन करते हुए एडीएम के.के. मिश्रा ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कड़े विधिक निर्देश जारी किए।
  2. RBSK के तहत मुफ्त उपचार: इन चारों बच्चों को तत्काल राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत सूचीबद्ध कर दिया गया है।
  3. शून्य वित्तीय बोझ: अब इन चारों मासूमों के ऑपरेशन, दवाइयों और अस्पताल के संपूर्ण विधिक व चिकित्सीय खर्च का वहन पूरी तरह से सरकार करेगी। इन परिवारों पर एक रुपये का भी आर्थिक बोझ नहीं आने दिया जाएगा।


देहरादून समाधान दिवस 2026: दर्ज प्रकरण, विधिक निर्देश एवं निस्तारण मैट्रिक्स 



समाधान दिवस पर प्राप्त कुल 146 जनशिकायतों के वर्गीकरण, चिन्हित संवेदनशील मामलों, प्रशासनिक प्रतिक्रिया और जिम्मेदार अधिकारियों की मैपिंग को इस व्यापक सांख्यिकीय एवं कानूनी तालिका में संकलित किया गया है:


शिकायत का क्षेत्र एवं श्रेणी (Grievance Domain)दर्ज विशिष्ट मामला एवं शिकायतकर्ता (Case & Complainant)प्रशासन का त्वरित विधिक निर्देश / कार्रवाई (Executive Orders)जिम्मेदार विधिक विंग / अधिकारी (Action Officers)
चिकित्सा एवं जीवन रक्षा (Health Care)सिर में रसौली, किडनी व आंत रोग से पीड़ित 04 मासूम बच्चे।राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत 100% निःशुल्क इलाज की स्वीकृति।मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) एवं आरबीएसके टीम।
राजस्व एवं भू-माफिया (Land Fraud)ग्राम पंचायत छरबा में सरकारी बंजर भूमि को खुर्द-बुर्द कर अवैध बिक्री व धमकी।सरकारी भूमि को तुरंत मुक्त कराने, एफआईआर दर्ज करने व भू-माफियाओं पर शिकंजा कसने के आदेश।क्षेत्र के सीओ (पुलिस) एवं संबंधित तहसील प्रशासन।
वरिष्ठ नागरिक संरक्षण (Senior Citizens)राज कुमार (84 वर्ष) व जसवंत सिंह (65 वर्ष) को बहू-बेटों द्वारा मारपीट कर घर से निकालना।माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण अधिनियम (2007) के तहत तुरंत जांच व बुजुर्गों को घर वापस दिलाने का आदेश।संबंधित एसडीएम (SDM) एवं क्षेत्राधिकारी (सीओ) पुलिस।
बुनियादी ढांचा (Infrastructure)सहस्रधारा मार्ग (मयूर विहार चौकी से कैनाल रोड) पर पैच रिपेयर व गड्ढे।जनता की आवाजाही को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए तुरंत पैच वर्क और सड़क मरम्मत की हिदायत।अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग (PWD), देहरादून।
शिक्षा एवं विकास (Education & Development)कालसी विकासखंड के सहिया में भूमि ट्रांसफर के बाद भी केंद्रीय विद्यालय का न खुलना।मामला वर्तमान में शासन स्तर पर विचाराधीन है, कलेक्ट्रेट स्तर से त्वरित पैरवी और फॉलो-अप की विधिक पुष्टि।जिला विकास अधिकारी (DDO) एवं शिक्षा विभाग।
आर्थिक सहायता एवं सामाजिक कल्याणदीपा मेहरा (बेटी की स्कूल फीस) व मानसिंह (पानी बिल माफी) तथा सोमदत्त शर्मा (पीएम आवास)।आर्थिक स्थिति और पात्रता का तुरंत भौतिक सत्यापन (Socio-Economic Verification) कर नियमानुसार राहत देने के निर्देश।तहसीलदार, जल संस्थान एवं नगर निगम/ग्रामीण विकास विंग।

छरबा में भू-माफियाओं की खैर नहीं: सरकारी बंजर भूमि बेचने वालों पर दर्ज होगी FIR


समाधान दिवस में तराई और ग्रामीण क्षेत्रों से भूमि धोखाधड़ी के कई गंभीर मामले सामने आए। इसमें सबसे बड़ा और चौंकाने वाला विधिक प्रकरण ग्राम पंचायत छरबा का सामने आया। पूर्व जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई कि क्षेत्र के कुछ संगठित भू-माफिया सरकारी बंजर भूमि को कूटचरित और फर्जी दस्तावेजों के सहारे खुर्द-बुर्द कर अवैध रूप से बेच रहे हैं। जब स्थानीय नागरिकों ने इसका विधिक विरोध किया, तो भू-माफियाओं द्वारा शिकायतकर्ताओं को जान से मारने की सीधे धमकी दी गई।


अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा ने इस मामले को देश की आंतरिक संपत्ति और कानून व्यवस्था को खुली चुनौती मानते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मौके पर ही क्षेत्रीय सीओ पुलिस (CO) और संबंधित तहसील प्रशासन को संयुक्त रूप से निर्देशित किया कि वे 48 घंटे के भीतर भू-माफियाओं के खिलाफ सुसंगत विधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजें और सरकारी भूमि पर तुरंत घेराबंदी कर राज्य का नियंत्रण स्थापित करें।


दर्दनाक दास्तां: बहू-बेटों ने पीटकर निकाला, 84 और 65 वर्ष के बुजुर्गों को न्याय दिलाने के लिए एसडीएम को आदेश


जनसुनवाई के दौरान समाज के ताने-बाने को झकझोर देने वाली दो दर्दनाक दास्तानें सामने आईं। जमनीपुर तापड़ के निवासी 84 वर्षीय बुजुर्ग राज कुमार और खुड़बुड़ा क्षेत्र के रहने वाले 65 वर्षीय जसवंत सिंह लाठी टेकते हुए रोते हुए अधिकारियों की मेज तक पहुंचे। उन्होंने लिखित शिकायत दी कि उनके ही सगे बहू-बेटों ने उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की, उन्हें भूखा रखा और अंततः उनके खुद के मकानों पर अवैध कब्जा करके उन्हें घर से बाहर निकाल दिया।


अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) का कड़ा विधिक रुख:


"बुजुर्गों का उत्पीड़न और माता-पिता के अधिकारों का हनन किसी भी सभ्य समाज में विधिक रूप से बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007' (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007) के तहत यह एक गंभीर कानूनी अपराध है। संबंधित उपजिलाधिकारी (SDM) और क्षेत्राधिकारी पुलिस (CO) तत्काल इन दोनों बुजुर्गों के घरों पर जाकर जांच करें। दोषी बहू-बेटों को विधिक नोटिस जारी कर मकान खाली कराया जाए और बुजुर्गों को ससम्मान उनके घर में पुनः स्थापित कर उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।"


समयबद्ध निस्तारण: अधिकारियों को एडीएम की 4-स्तरीय प्रशासनिक हिदायत


अपर जिलाधिकारी ने समाधान दिवस की गरिमा और प्रभावशीलता को बनाए रखने के लिए उपस्थित सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को निम्नलिखित चार रणनीतिक और विधिक दिशा-निर्देश जारी किए:


  • फाइल लटकाने की प्रवृत्ति का अंत: समाधान दिवस पर दर्ज की गई सभी 146 शिकायतों का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया गया है। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि जो मामले मौके पर निस्तारित नहीं हुए हैं, उन्हें समयबद्ध (Time-bound) तरीके से तय समय सीमा के भीतर कानूनन हल किया जाए।
  • अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही: यदि किसी विभाग की लापरवाही के कारण जनता की फाइल लंबित पाई गई, तो संबंधित विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) में प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) दर्ज करने की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
  • पारदर्शिता और फीडबैक प्रणाली: निस्तारण की रिपोर्ट सीधे शिकायतकर्ता को फोन कर पूछी जाएगी। यदि शिकायतकर्ता प्रशासन के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है, तो फाइल को दोबारा खोलकर उच्चाधिकारियों की निगरानी में विधिक ऑडिट कराया जाएगा।
  • लोनिवि को ऑन-स्पॉट निर्देश: सहस्रधारा मार्ग पर मयूर विहार पुलिस चौकी से कैनाल रोड पेट्रोल पंप तक सड़क पर खतरनाक गड्ढों के कारण हो रही दुर्घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिशासी अभियंता को तुरंत पैच रिपेयर (Patch Repair) कर कल तक रिपोर्ट कलेक्ट्रेट में प्रस्तुत करने के विधिक आदेश दिए गए हैं।

 

प्रशासनिक अमले की भारी मौजूदगी: कलेक्ट्रेट में जुटे सभी विभागों के विभागाध्यक्ष


इस समाधान दिवस को त्वरित और प्रभावी बनाने के लिए देहरादून जनपद की पूरी प्रशासनिक मशीनरी ऋषिपर्णा सभागार में भौतिक रूप से मौजूद थी। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा के साथ मंच पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, सिटी मजिस्ट्रेट राजेश तिवारी, उपजिलाधिकारी (SDM) रविन्द्र ज्वांठा, उपजिलाधिकारी अपर्णा ढ़ौडियाल, जिला विकास अधिकारी (DDO) सुनील कुमार तथा तहसीलदार सुरेन्द्र देव सहित जल संस्थान, विद्युत विभाग, समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और नगर निगम के समस्त जिला स्तरीय विभागाध्यक्ष उपस्थित थे, जिसके कारण फरियादियों को एक ही छत के नीचे त्वरित विधिक न्याय मिल सका।

 

जनता और प्रशासन के बीच की दूरी को मिटाता 'समाधान दिवस' 


देहरादून जिला प्रशासन द्वारा आयोजित आज का 'समाधान दिवस' इस बात का ज्वलंत और विधिक प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो सरकारी योजनाएं और प्रशासनिक नीतियां समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकती हैं। एक तरफ जहां पैसे की कमी से जूझ रहे चार गंभीर बीमार बच्चों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत नया जीवनदान मिला, वहीं दूसरी तरफ छरबा के भू-माफियाओं को कड़ा संदेश देकर प्रशासन ने यह साफ कर दिया कि सरकारी जमीनों को लूटने वालों की जगह केवल जेल की सलाखों के पीछे है।


सबसे सराहनीय कदम 84 वर्षीय राज कुमार और 65 वर्षीय जसवंत सिंह जैसे असहाय वरिष्ठ नागरिकों के पक्ष में उठाया गया विधिक संरक्षण है, जिससे समाज के प्रताड़ित बुजुर्गों में यह विश्वास जगा है कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कानून और कलेक्ट्रेट मुस्तैदी से खड़े हैं। 146 जनसमस्याओं का यह दरबार सुशासन (Good Governance) का एक जीवंत मॉडल है। यदि सभी विभाग इसी त्वरित और पारदर्शी गति से फाइलों का निस्तारण करते रहे, तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का "शिकायत रहित और सुशासन युक्त उत्तराखण्ड" का संकल्प शत-प्रतिशत धरातल पर साकार हो जाएगा।




📢 खबरों को सबसे पहले पाने के लिए आपकी मीडिया को फॉलो करें
👉 WhatsApp Channel Join करें 👉 WhatsApp Group Join करें
Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
Previous Post Next Post