कोटद्वार को मिलेगी ₹135 करोड़ की आधुनिक सीवरेज व्यवस्था: लकड़ीपड़ाव STP परियोजना के औचक निरीक्षण पर पहुंचीं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण


Aapki Media AI


कोटद्वार, 18 जून, 2026: उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल जनपद की सबसे महत्वपूर्ण और घनी आबादी वाली कोटद्वार विधानसभा सीट को एक स्वच्छ, आधुनिक और प्रदूषण-मुक्त 'स्मार्ट टाउन' के रूप में विकसित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक विधिक कदम आगे बढ़ा है। आगामी दशकों की बढ़ती शहरी आबादी और सीवेज प्रबंधन की विधिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कोटद्वार के लकड़ीपड़ाव क्षेत्र में युद्धस्तर पर निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और विस्तृत सीवरेज नेटवर्क परियोजना अब अपने अंतिम विधिक चरणों में है।




आज इस महा-परियोजना की जमीनी प्रगति, तकनीकी मानकों और निर्माण की विधिक गुणवत्ता को परखने के लिए उत्तराखण्ड विधानसभा की अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण स्वयं 'ग्राउंड जीरो' पर पहुंचीं। उन्होंने लकड़ीपड़ाव में चल रहे सिविल और मैकेनिकल कार्यों का अत्यंत बारीकी से स्थलीय निरीक्षण (Physical Inspection) किया तथा कार्यदायी संस्था व विभागीय अभियंताओं को तय समय-सीमा के भीतर शत-प्रतिशत विधिक गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने की कड़क हिदायत दी।


नमामि गंगे का विज़न: पीएम मोदी के भगीरथ प्रयास से अविरल और निर्मल होगी खोह नदी


निरीक्षण के उपरांत उपस्थित जनसमूह, विभागीय अधिकारियों और मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने इस ₹135 करोड़ की परियोजना के सामरिक और पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित किया।

  1. केंद्र सरकार का ऐतिहासिक उपहार: उन्होंने कहा कि कोटद्वार में लगभग ₹135 करोड़ की लागत से स्थापित हो रहा यह नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और भूमिगत सीवरेज नेटवर्क, देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के अत्यंत महत्वाकांक्षी एवं वैश्विक स्तर पर प्रशंसित 'नमामि गंगे कार्यक्रम' (Namami Gange Mission) के अंतर्गत स्वीकृत किया गया है।
  2. नदियों को प्रदूषण से विधिक मुक्ति: अब तक कोटद्वार नगर क्षेत्र का अनुपचारित (Untreated) घरेलू और व्यावसायिक अपशिष्ट सीधे स्थानीय नदी-नालों के माध्यम से पवित्र गंगा की सहायक नदियों (जैसे खोह नदी) में प्रवाहित होता था। इस प्लांट के चालू होने के बाद, नगर का सारा सीवेज अत्याधुनिक विधिक जैविक और रासायनिक पद्धतियों से ट्रीट होने के बाद ही विसर्जित किया जाएगा, जिससे गंगा और उसकी सहायक नदियां पूरी तरह स्वच्छ और निर्मल बनी रहेंगी।

 

कोटद्वार ₹135 करोड़ सीवरेज नेटवर्क एवं STP परियोजना: तकनीकी एवं प्रशासनिक मैट्रिक्स 


लकड़ीपड़ाव में बन रहे इस आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और कोटद्वार नगर के ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सभी आधिकारिक सांख्यिकीय और विधिक डेटा को इस प्रशासनिक तालिका में वर्गीकृत किया गया है:

तकनीकी एवं विधिक पैरामीटर (Project Metrics)लकड़ीपड़ाव परियोजना की वास्तविक स्थिति (Technical Status 2026)दीर्घकालिक शहरी एवं पर्यावरणीय प्रभाव (Urban Transformation)
कुल स्वीकृत बजटीय लागतलगभग ₹135 करोड़ (INR 135 Crores)।कोटद्वार के इतिहास में स्वच्छता अवसंरचना पर हुआ अब तक का सबसे बड़ा विधिक निवेश।
केंद्रीय नोडल महा-अभियाननमामि गंगे कार्यक्रम (जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार)।गंगा बेसिन की सहायक नदियों के इको-सिस्टम को विधिक रूप से पुनर्जीवित करना।
परियोजना का मुख्य केंद्रलकड़ीपड़ाव क्षेत्र, कोटद्वार नगर निगम सीमा।मुख्य शहर के ड्रेनेज आउटलेट को एक केंद्रीकृत अत्याधुनिक प्लांट से जोड़ना।
मुख्य विधिक निरीक्षण कर्ताश्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण (विधानसभा अध्यक्ष व विधायक)।विधायी जवाबदेही और बजटीय उपयोग की कड़े स्तर पर प्रशासनिक मॉनिटरिंग।
विभागीय तकनीकी टीमअधिशासी अभियंता एस के वर्मा, एई दीपक वत्स, जेई आशीष चमोली।इंजीनियरिंग डिज़ाइनों का दैनिक विधिक सत्यापन और ढांचागत मजबूती सुनिश्चित करना।
स्थानीय विधिक नेतृत्वमहेश नेगी (माननीय विधायक प्रतिनिधि) एवं स्थानीय पार्षद।जनता और कार्यदायी संस्था के मध्य समन्वय स्थापित कर निर्माण अवरोधों को दूर करना।
मुख्य लक्षित उद्देश्यआगामी 30 वर्षों की आबादी हेतु सीवेज प्रबंधन।भूमिगत जल (Groundwater) के संदूषण को रोकना और जल जनित महामारियों पर विधिक रोक।

भविष्य की आवश्यकताओं का खाका: कोटद्वार के नागरिकों को मिलेंगी विश्वस्तरीय स्वच्छता विधिक सुविधाएं


विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने स्पष्ट किया कि इस ढांचागत विकास का विज़न केवल वर्तमान आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगामी 20-30 वर्षों की अनुमानित आबादी के दबाव को झेलने के लिए डिज़ाइन किया गया है।


विधानसभा अध्यक्ष का नीतिगत विधिक वक्तव्य:


₹135 करोड़ की कोटद्वार सीवरेज योजना के 4 मुख्य सामाजिक और विधिक लाभ 


लकड़ीपड़ाव में निर्माणाधीन इस व्यापक प्लांट और भूमिगत नेटवर्क के चार प्रमुख व्यावहारिक और चिकित्सकीय निष्कर्ष इस प्रकार हैं:


  • जल जनित रोगों से स्थायी मुक्ति: वर्तमान में सीवेज नालियों में बहने और लीक होने से भूमिगत पेयजल स्रोत दूषित होते हैं, जिससे पीलिया, हैजा और टाइफाइड का खतरा रहता है। इस ₹135 करोड़ की सीवरेज योजना के चालू होते ही कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र के नागरिकों को पूरी तरह स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण विधिक रूप से प्राप्त होगा।
  • भविष्य की रियल एस्टेट और शहरी संपत्तियों का संवर्धन: आधुनिक अंडरग्राउंड सीवरेज नेटवर्क होने से कोटद्वार के मुख्य बाजारों और आवासीय कॉलोनियों (जैसे लकड़ीपड़ाव, मानपुर, सिम्बलचौड़ आदि) में जलभराव और गंदगी की समस्या समाप्त होगी, जिससे स्थानीय संपत्तियों के विधिक मूल्य में वृद्धि होगी।
  • खोह नदी का सौंदर्यकरण और पारिस्थितिकी संरक्षण: कोटद्वार की जीवनरेखा कही जाने वाली खोह नदी में गिरने वाले सभी गंदे नालों को टैप (Tap) करके इस प्लांट की ओर डाइवर्ट किया जाएगा। इससे नदी का जलीय जीवन (Aquatic Life) सुरक्षित होगा और घाटों का सौंदर्यकरण हो सकेगा।
  • सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर: प्रदेश और केंद्र सरकार के संयुक्त वित्तीय समन्वय से बन रही यह परियोजना कोटद्वार में पर्यटन और उद्योगों के आगमन के लिए एक विधिक आधारभूत रीढ़ का कार्य करेगी।

 

मौके पर तकनीकी टीम की विधिक क्लास: समयबद्धता पर कड़ा रुख


स्थलीय निरीक्षण के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने निर्माण सामग्री की लैब टेस्टिंग रिपोर्टों और पाइपलाइन के एलाइनमेंट मानचित्रों की विधिक समीक्षा की। मौके पर उपस्थित अधिशासी अभियंता एस. के. वर्मा, सहायक अभियंता (AE) दीपक वत्स और अवर अभियंता (JE) आशीष चमोली ने विधानसभा अध्यक्ष को विस्तृत चार्ट के माध्यम से बताया कि वर्तमान में ड्रेनेज बिछाने और प्लांट की मुख्य दीवारों के कंक्रीट स्ट्रक्चर का कार्य कितने प्रतिशत पूर्ण हो चुका है।


विधायक प्रतिनिधि महेश नेगी और कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों ने आश्वस्त किया कि मानसून और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद विधिक मानकों का पूर्ण पालन करते हुए श्रमशक्ति को दोगुना कर कार्य की गति को तेज किया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने दो टूक लहजे में कहा कि वे स्वयं प्रत्येक 15 दिनों में इस प्लांट की विधिक प्रगति आख्या (Progress Report) सीधे अपने सचिवालय में तलब करेंगी।

 

'स्वच्छ कोटद्वार, हरित देवभूमि' के संकल्प की मजबूत विधिक नींव


कोटद्वार के लकड़ीपड़ाव क्षेत्र में ₹135 करोड़ की लागत से नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत बन रहा यह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) केवल एक सरकारी निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि यह कोटद्वार के स्थायी और सस्टेनेबल भविष्य का विधिक संकल्प पत्र है। विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण का स्वयं जमीन पर उतरकर तकनीकी अभियंताओं की टीम के साथ निर्माण की गुणवत्ता को परखना यह सिद्ध करता है कि वे कोटद्वार के विकास को लेकर अत्यंत गंभीर और जवाबदेह हैं।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय स्वच्छता विज़न को देवभूमि के धरातल पर उतारने वाली यह परियोजना आने वाले समय में कोटद्वार के नागरिकों के जीवन स्तर (Quality of Life) में क्रांतिकारी सुधार लाएगी। ₹135 करोड़ के इस भारी-भरकम बजट का पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करना ही अब कार्यदायी संस्था के अभियंताओं (एस के वर्मा और टीम) की असली विधिक परीक्षा होगी। जब यह प्लांट पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर देगा, तब कोटद्वार न केवल स्वच्छता के विधिक मानकों पर खरा उतरेगा, बल्कि मां गंगा और उसकी सहायक नदियों को अविरल बनाए रखने में अपना ऐतिहासिक योगदान भी दर्ज कराएगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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