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देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित दून विश्वविद्यालय में युवाओं को लोकतांत्रिक प्रणालियों और नेतृत्व कौशल से रूबरू कराने के उद्देश्य से चल रहे ऐतिहासिक वैचारिक समागम का तीसरा दिन भी अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा। उत्तराखंड यंग थिंकर्स फोरम, आई-लीड ग्लोबल फाउंडेशन एवं दून विश्वविद्यालय छात्र परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय 'राष्ट्रीय युवा संसद 2026' के तीसरे दिन के उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड सरकार के कौशल विकास, रोजगार एवं लोक सेवा प्रदाता मंत्री श्री सौरभ बहुगुणा ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों और कोनों से आए युवा नीति-निर्माताओं, छात्र प्रतिनिधियों और शोधार्थियों को संबोधित करते हुए राजनीति, समाज सेवा और प्रशासनिक उत्तरदायित्वों का मूल मंत्र दिया।
समारोह के दौरान युवाओं के बीच एक अत्यंत प्रेरणादायक वातावरण देखा गया, जहाँ देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए युवा पीढ़ी की भागीदारी को अनिवार्य और निर्णायक माना गया। इस सत्र में कला, मीडिया और संचार के माध्यम से सामाजिक चेतना जगाने के व्यावहारिक पक्षों पर भी गंभीर चर्चा की गई।
कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने साझा किए राजनीतिक जीवन के व्यावहारिक अनुभव
सत्र के मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए कैबिनेट मंत्री श्री सौरभ बहुगुणा ने किसी औपचारिक व्याख्यान के बजाय अपने वास्तविक राजनीतिक जीवन के खट्टे-मीठे और व्यावहारिक अनुभवों को युवाओं के समक्ष खुला साझा किया। उन्होंने पूरी ईमानदारी से स्वीकार किया कि एक समय उनके जीवन में भी ऐसा था, जब वे एक सामान्य छात्र के रूप में राजनीति को केवल बहुत दूर से देखते थे और देश के विकास में इस व्यवस्था की वास्तविक महत्ता और प्रभाव को पूरी तरह से नहीं समझते थे।
परंतु, सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने और धरातल पर काम करने के बाद उनके विचारों में जो क्रांतिकारी परिवर्तन आया, उसे रेखांकित करते हुए उन्होंने निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:
- अंतिम व्यक्ति तक सहायता का माध्यम: राजनीति केवल एक नीतिगत ढांचा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सशक्त माध्यम है जिसके जरिए समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े अंतिम व्यक्ति (वंचित वर्ग) तक सीधे सरकारी सहायता और विकास का लाभ पहुंचाया जा सकता है।
- सार्थक राष्ट्र निर्माण की धुरी: राज्य और राष्ट्र के समग्र व स्थाई विकास में राजनीति की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि सभी जनहितैषी नीतियां इसी माध्यम से आकार लेती हैं।
- सत्ता नहीं, सेवा का संकल्प: उन्होंने युवाओं से सीधा आह्वान करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को राजनीति को केवल सत्ता या पद प्राप्ति का जरिया नहीं मानना चाहिए, बल्कि इसे समाज सुधार, जनसेवा और राष्ट्र निर्माण का एक अत्यंत पवित्र व सशक्त मंच स्वीकार करना चाहिए।
- सकारात्मक बदलाव के वाहक: देश के युवाओं को देश की जटिल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बारीकी से समझना होगा ताकि वे समाज के प्रति अपनी बुनियादी जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन कर सकें और व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव के वास्तविक वाहक बन सकें।
कला, संचार और रेडियो के जरिए सामाजिक परिवर्तन: आरजे काव्य
राष्ट्रीय युवा संसद 2026 के इस विशिष्ट सत्र में उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध मीडिया चेहरे और 'ओहो रेडियो' के संस्थापक रेडियो जॉकी आरजे काव्य (Rj Kavya) ने विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। संचार और रचनात्मकता के क्षेत्र में युवाओं के करियर और सामाजिक भूमिका पर चर्चा करते हुए उन्होंने देश भर के छात्र प्रतिनिधियों को संबोधित किया।
आरजे काव्य ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि समाज में केवल राजनीतिक या प्रशासनिक नीतियों के माध्यम से ही बदलाव नहीं आता, बल्कि कला, जनसंचार (Mass Communication) और रेडियो जैसे पारंपरिक व आधुनिक सशक्त माध्यमों के जरिए भी समाज में अत्यधिक गहरा और सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि वे अपनी आंतरिक रचनात्मकता (Creativity) और अपनी तार्किक संवाद शैली (Communication Skills) का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए न करें, बल्कि इसका मुख्य उपयोग देश के नागरिकों को सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूक करने और भारतीय समाज को बौद्धिक रूप से सशक्त बनाने के लिए करें।
उत्तराखंड यंग थिंकर्स फोरम का विज़न और युवाओं की प्रतिबद्धता
कार्यक्रम के अगले चरण में उत्तराखंड यंग थिंकर्स फोरम की संस्थापक श्रीमती नेहा जोशी ने मुख्य अतिथि मंत्री श्री सौरभ बहुगुणा और विशिष्ट अतिथि आरजे काव्य का शॉल व स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया और युवाओं का मार्गदर्शन करने हेतु पूरी टीम की ओर से आभार व्यक्त किया।
इस दौरान मंच से 'राष्ट्रीय युवा संसद' के मूल उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए श्रीमती नेहा जोशी ने कहा:
"इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय युवा संसद का प्राथमिक और दूरगामी उद्देश्य देश के कोने-कोने से आए युवाओं को सीधे तौर पर भारतीय लोकतंत्र की मूल आत्मा, वास्तविक नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण की जटिल किंतु आवश्यक प्रक्रियाओं से व्यावहारिक रूप से जोड़ना है। देश के 21 से अधिक अलग-अलग राज्यों से आए इन ऊर्जावान प्रतिभागियों का अभूतपूर्व उत्साह और उनकी तार्किक प्रस्तुतियां इस बात का प्रत्यक्ष और मजबूत प्रमाण हैं कि भारत का आधुनिक युवा वर्ग देश के एक सुरक्षित, आत्मनिर्भर और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध और जागरूक है।"
राष्ट्रीय युवा संसद 2026 के तृतीय दिवस का तथ्यात्मक एवं प्रशासनिक सार
| क्र.सं. | आयोजन, अतिथि एवं मुख्य संगठनात्मक मानक (Event Metrics) | प्राप्त आधिकारिक विवरण एवं दर्ज आंकड़े (Official Case Details) |
|---|---|---|
| 1. | मुख्य कार्यक्रम का नाम | राष्ट्रीय युवा संसद 2026 (तृतीया दिवस सत्र) |
| 2. | आयोजन की तिथि एवं मुख्य स्थान | 19 जून, 2026 | दून विश्वविद्यालय, देहरादून (उत्तराखंड) |
| 3. | मुख्य अतिथि एवं उनका राजकीय विभाग | श्री सौरभ बहुगुणा (माननीय कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार) |
| 4. | विशिष्ट अतिथि एवं उनकी संस्था | आरजे काव्य (प्रसिद्ध रेडियो जॉकी एवं संस्थापक, ओहो रेडियो) |
| 5. | मुख्य आयोजनकर्ता संस्थाएं | उत्तराखंड यंग थिंकर्स फोरम, आई-लीड ग्लोबल फाउंडेशन एवं दून विश्वविद्यालय छात्र परिषद |
| 6. | सत्र का मुख्य वैचारिक संदेश | राजनीति को सत्ता प्राप्ति के बजाय जनसेवा और राष्ट्र निर्माण का जरिया बनाना |
| 7. | संबद्ध मीडिया विमर्श विषय | कला, रचनात्मकता और संचार के जरिए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना |
| 8. | आयोजन की कुल अवधि | तीन दिवसीय राष्ट्रीय समागम |
कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य प्रशासनिक, संगठनात्मक एवं छात्र पदाधिकारी
इस भव्य और बौद्धिक विमर्श के दौरान दून विश्वविद्यालय के सभागार में देश भर के शैक्षणिक जगत से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण सामाजिक और संगठनात्मक पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल और सुव्यवस्थित बनाने में उत्तराखंड यंग थिंकर्स फोरम के सह-संस्थापक अखिलेश रावत, 'राष्ट्रीय युवा संसद 2026' के मुख्य कन्वीनर सचिन रमोला और दून विश्वविद्यालय छात्र परिषद के पूर्व अध्यक्ष अंशुमान नौटियाल की प्रबंधन भूमिका सराहनीय रही।
इनके अतिरिक्त, युवा थिंकर्स और छात्र नेताओं में मुख्य रूप से प्रज्वल भट्ट, सार्थक भट्ट, ख्याति पंत, आशीष राणा सहित भारी संख्या में दून विश्वविद्यालय और अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों से आए छात्र-छात्राएं, विभिन्न संकायों के सम्मानित प्रोफेसर्स, शिक्षाविद और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सत्र के अंत में सभी छात्र सांसदों ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करने और अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़ने का सामूहिक संकल्प लिया।
