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देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित प्रतिष्ठित दून विश्वविद्यालय में देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने और युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के उद्देश्य से एक वृहद समागम का आयोजन किया गया. यहाँ आयोजित 'राष्ट्रीय युवा संसद 2026' के द्वितीय दिवस के सत्र में उत्तराखंड सरकार के संसदीय कार्य, वन एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री सुबोध उनियाल मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए. इस गरिमामयी अवसर पर उन्होंने देश के 21 अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिभावान युवा प्रतिनिधियों और विचारकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में युवा पीढ़ी की रणनीतिक व निर्णायक भूमिका पर विस्तार से अपने विचार साझा किए.
यह भव्य राष्ट्रीय युवा संसद उत्तराखंड यंग थिंकर्स फोरम, आई-लीड ग्लोबल फाउंडेशन, उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) तथा दून विश्वविद्यालय स्टूडेंट काउंसिल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश भर के युवाओं को एक साझा मंच प्रदान करना था, जहाँ वे समसामयिक राष्ट्रीय मुद्दों पर वैचारिक विमर्श कर सकें.
लोकतांत्रिक मूल्यों और नीति निर्माण की समझ विकसित करने का प्रभावी मंच
अपने मुख्य संबोधन में कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति (Demographic Dividend) को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत वर्तमान में विश्व का सबसे युवा राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है. इस पृष्ठभूमि में, वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के महान संकल्प की सफलता पूरी तरह से देश की युवा शक्ति की सक्रियता पर निर्भर करती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक प्रगति की जिम्मेदारी केवल चुनी हुई सरकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि जब तक समाज का प्रत्येक वर्ग और विशेषकर युवा वर्ग इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित नहीं करेगा, तब तक देश प्रगति के नए और स्थाई आयाम स्थापित नहीं कर सकता.
संसदीय परंपराओं और युवा विकास के अंतर्संबंधों पर चर्चा करते हुए कैबिनेट मंत्री ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण वैचारिक बिंदुओं को सामने रखा:
- संवैधानिक व्यवस्था की व्यावहारिक समझ: राष्ट्रीय युवा संसद जैसे विशिष्ट मंच देश के युवाओं को भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक व्यवस्थाओं, जटिल संसदीय परंपराओं तथा नीति निर्माण (Policy Making) की व्यावहारिक प्रक्रियाओं को सूक्ष्मता से समझने का एक वास्तविक अवसर प्रदान करते हैं.
- नेतृत्व और तार्किक क्षमता का विकास: इस प्रकार के राष्ट्रीय आयोजनों के माध्यम से युवाओं में नेतृत्व क्षमता (Leadership Skills), साक्ष्याधारित तार्किक चिंतन, कुशल संवाद शैली और सामाजिक उत्तरदायित्व (Social Responsibility) की एक मजबूत भावना स्वतः विकसित होती है. यह सभी गुण भविष्य के एक सशक्त, जागरूक और प्रगतिशील भारत के निर्माण के लिए प्राथमिक आवश्यकता हैं.
- करियर से आगे बढ़कर राष्ट्रहित पर सोच: माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है. इस गति को बनाए रखने के लिए युवाओं को केवल अपने व्यक्तिगत करियर और रोजगार तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज, पर्यावरण संरक्षण और व्यापक राष्ट्रहित से जुड़े नीतिगत विषयों पर भी अपनी मुखर और सकारात्मक उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए.
जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनने की दिशा में अग्रसर है आज का युवा
तकनीकी शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर प्रकाश डालते हुए श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि आज का भारतीय युवा अपनी ऊर्जा, तकनीकी दक्षता (Technical Expertise) और सकारात्मक सोच के बल पर वैश्विक पटल पर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. सबसे बड़ा व्यावहारिक परिवर्तन यह देखने को मिल रहा है कि वर्तमान दौर का युवा केवल पारंपरिक नौकरियों या रोजगार की खोज करने वाला (Job Seeker) नहीं रह गया है, बल्कि वह अपनी उद्यमशीलता से नए रोजगार के अवसर सृजित करने वाला (Job Creator) बन रहा है.
आज देश के भीतर स्टार्टअप्स (Startups), औद्योगिक नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science and Technology), उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान तथा सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्रों में भारतीय युवाओं का बोलबाला है और वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की एक नई और मजबूत पहचान स्थापित कर रहे हैं, जो देश के एक अत्यंत उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य का सीधा संकेत है. उत्तराखंड यंग थिंकर्स फोरम और अन्य सहयोगी संस्थाओं की इस पहल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि देश के ज्वलंत और राष्ट्रीय मुद्दों पर युवाओं को खुलकर विचार-विमर्श करने के लिए ऐसा निष्पक्ष और बौद्धिक मंच प्रदान करना एक अत्यंत अनुकरणीय और प्रशंसनीय कार्य है.
राष्ट्रीय युवा संसद 2026: मुख्य विषय एवं वैचारिक संकल्प
इस दो दिवसीय युवा संसद के विभिन्न सत्रों के दौरान देश भर से आए छात्र प्रतिनिधियों और शोधार्थियों ने अत्यधिक परिपक्वता के साथ देश की मुख्य चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर अपनी प्रस्तुतियां दीं. युवाओं ने मुख्य रूप से निम्नलिखित सात राष्ट्रीय विषयों पर गहन मंथन किया:
- सशक्त लोकतंत्र और सुशासन (Governance): पारदर्शी शासन प्रणाली और नागरिकों की डिजिटल भागीदारी को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर चर्चा की गई.
- औद्योगिक नवाचार एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र: देश में स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के तकनीकी मॉडलों पर विचार रखे गए.
- पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास (Sustainability): हिमालयी राज्यों के विशेष संदर्भ में जलवायु परिवर्तन के खतरों और उनके व्यावहारिक समाधानों पर युवाओं ने चिंता और कार्ययोजनाएं साझा कीं.
- आधुनिक शिक्षा और कौशल विकास: राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और युवाओं को उद्योग-उन्मुख (Industry-ready) कौशल प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया गया.
- सशक्त समाज और राष्ट्र निर्माण का संकल्प: सत्र के अंत में सभी उपस्थित युवाओं ने अपनी ऊर्जा को देश के सकारात्मक सामाजिक बदलावों में लगाने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में अपनी सक्रिय और निरंतर भूमिका निभाने का सामूहिक संकल्प लिया.
राष्ट्रीय युवा संसद 2026 का संगठनात्मक एवं तथ्यात्मक सार
| क्र.सं. | आयोजन एवं विमर्श के मुख्य मानक (Event Parameters) | प्राप्त आधिकारिक विवरण एवं सांख्यिकीय आंकड़े (Official Data) |
|---|---|---|
| 1. | कार्यक्रम का आधिकारिक नाम | राष्ट्रीय युवा संसद 2026 (National Youth Parliament 2026) |
| 2. | आयोजन की तिथि एवं मुख्य स्थल | 18 जून, 2026 | दून विश्वविद्यालय, देहरादून (उत्तराखंड) |
| 3. | मुख्य अतिथि एवं वक्ता | श्री सुबोध उनियाल (संसदीय कार्य, वन एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड सरकार) |
| 4. | सम्मिलित राज्यों की कुल संख्या | भारत के कुल 21 राज्यों से आए युवा प्रतिनिधि |
| 5. | मुख्य संयुक्त आयोजक मंडल | उत्तराखंड यंग थिंकर्स फोरम, आई-लीड ग्लोबल फाउंडेशन, यूकॉस्ट और दून यूनिवर्सिटी स्टूडेंट काउंसिल |
| 6. | विमर्श के केंद्रीय विषय | लोकतंत्र, सुशासन, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, रोजगार एवं विकसित भारत 2047 |
| 7. | मुख्य राष्ट्रीय विज़न वर्ष | वर्ष 2047 (भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने पर विकसित राष्ट्र का लक्ष्य) |
| 8. | विशिष्ट आमंत्रित विभूतियाँ | पद्मश्री श्रीमती माधुरी बर्थवाल, डॉ. दुर्गेश पंत (महानिदेशक, यूकॉस्ट), श्री मनमोहन भारद्वाज, श्री पुनीत धनोला |
गरिमामयी उपस्थिति और समापन सत्र का विवरण
इस राष्ट्रीय समागम के समापन और मुख्य वैचारिक सत्र के दौरान दून विश्वविद्यालय का परिसर देश के प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक नायकों की उपस्थिति से गौरवान्वित हुआ. कार्यक्रम में मुख्य रूप से देश की प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित पद्मश्री लोकगायिका श्रीमती माधुरी बर्थवाल ने अपनी उपस्थिति से युवाओं का उत्साहवर्धन किया. उनके साथ ही उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत, विशिष्ट सामाजिक विचारक श्री मनमोहन भारद्वाज और श्री पुनीत धनोला ने भी सत्रों का संचालन और मूल्यांकन किया.
इसके अतिरिक्त, विभिन्न विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ शिक्षाविद, नीति विश्लेषक, सामाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक और देशभर से आए सैकड़ों छात्र संगठनों के प्रतिनिधि इस वैचारिक विमर्श के गवाह बने. कार्यक्रम के सफल समापन पर मुख्य अतिथि श्री सुबोध उनियाल ने राष्ट्रीय युवा संसद 2026 के सफल और त्रुटिहीन प्रबंधन के लिए दून विश्वविद्यालय प्रशासन और उत्तराखंड यंग थिंकर्स फोरम की पूरी टीम को अपनी आधिकारिक शुभकामनाएं और बधाई प्रेषित की.
