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पीआईबी देहरादून की मीडिया कार्यशाला ‘वार्ता’: केंद्र सरकार के 12 वर्षों के सुशासन और आर्थिक क्रांति का खाका


Aapki Media AI


ऋषिकेश/देहरादून, 16 जून, 2026: भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन पत्र सूचना कार्यालय (PIB), देहरादून के तत्वावधान में मंगलवार को ऋषिकेश स्थित रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के वीआईपी सभागार में एक दिवसीय हाई-प्रोफाइल मीडिया कार्यशाला ‘वार्ता’ का शानदार आयोजन किया गया। यह कार्यशाला केंद्र की लोक-कल्याणकारी नीतियों, बुनियादी ढांचे के ऐतिहासिक विकास और हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण के बीच एक मजबूत विधिक व प्रशासनिक समन्वय स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई।

पीआईबी देहरादून की मीडिया कार्यशाला ‘वार्ता’: केंद्र सरकार के 12 वर्षों के सुशासन और आर्थिक क्रांति का खाका


"लोक सेवा ही संकल्प- 12 साल विश्वास के, विकास के, जन कल्याण के" के मूल विजन पर केंद्रित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय मीडिया कर्मियों, जिला संवाददाताओं और विषय विशेषज्ञों के बीच एक ऐसा मजबूत तंत्र विकसित करना है, जिससे सरकार की नीतिगत उपलब्धियों की प्रामाणिक जानकारी समाज के अंतिम पायदान (Last Mile) पर खड़े नागरिक तक पहुंच सके। कार्यशाला में मुख्य अतिथि ऋषिकेश के मेयर श्री शम्भू पासवान सहित रेल विकास निगम के शीर्ष भू-वैज्ञानिकों और उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के वरिष्ठ वित्तीय प्रबंधकों ने प्रतिभाग कर पिछले 12 वर्षों (2014 से 2026) में उत्तराखण्ड में आए क्रांतिकारी बदलावों का सांख्यिकीय ब्योरा प्रस्तुत किया।


ऐतिहासिक अनावरण: केंद्र सरकार की 12 वर्षीय नीतिगत उपलब्धियों की 5 पुस्तिकाओं का विमोचन



कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि मेयर शम्भू पासवान और पीआईबी के अधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलन और केंद्र सरकार के 12 वर्षों के सुशासन पर आधारित 5 महत्वपूर्ण नीतिगत पुस्तिकाओं (Booklets) के अनावरण के साथ हुआ। यह पुस्तकें विकसित भारत के पांच प्रमुख विधिक और प्रशासनिक स्तंभों को रेखांकित करती हैं:

  1. विकास भी विरासत भी: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम का मास्टर प्लान और पर्यावरण अनुकूल अवसंरचना।
  2. राष्ट्र प्रथम ही मन्त्र: आंतरिक सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों (वाइब्रेंट विलेज) का सुदृढ़ीकरण और रणनीतिक नीतियां।
  3. राष्ट्र निर्माण ही मिशन: ऑलवेदर रोड, रेल कनेक्टिविटी और डिजिटल इंडिया का बुनियादी ढांचा।
  4. सशक्तिकरण ही सामर्थ्य: लखपति दीदी, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और महिला स्वयं सहायता समूहों की आत्मनिर्भरता।
  5. लोक सेवा ही संकल्प: अंतिम छोर के व्यक्ति को वित्तीय सुरक्षा, मुफ्त राशन और पीएम आवास योजना का विधिक लाभ।


मेयर शम्भू पासवान ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज देश और उत्तराखण्ड का सुगम-दुर्गम क्षेत्र आर्थिक मुख्यधारा से जुड़ चुका है।


केंद्र सरकार सुशासन कार्यशाला 'वार्ता' 2026: अवसंरचना, आर्थिकी एवं नीतिगत मैट्रिक्स



इस उच्च स्तरीय कार्यशाला में रेल विकास निगम और बैंकिंग सेक्टर्स द्वारा प्रस्तुत किए गए तकनीकी आंकड़ों, पर्यावरणीय संरक्षण रणनीतियों और बजटीय सब्सिडी लाभों को इस व्यापक तालिका में संकलित किया गया है:


विकास एवं तकनीकी मानक (Development Benchmarks)आधिकारिक प्रशासनिक एवं वित्तीय डेटा (Statistical Data 2026)सामाजिक-आर्थिक एवं पर्यावरणीय प्रभाव (Strategic Impact)
आयोजक नोडल एजेंसीपत्र सूचना कार्यालय (PIB), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार।मीडिया और सरकार के बीच सटीक सूचना तंत्र का सुदृढ़ीकरण।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन16 अत्याधुनिक सुरंगों (Tunnels) का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में।उत्तराखण्ड के 05 पर्वतीय जिलों की कनेक्टिविटी का ऐतिहासिक कायाकल्प।
सुरंग जल संरक्षण तकनीकसुरंगों से निकलने वाले प्राकृतिक रिसाव के पानी से 'अमृत सरोवर' का विकास।हिमालयी भू-गर्भ जल का विधिक संरक्षण एवं स्थानीय गांवों को सिंचाई लाभ।
पीएम स्वनिधि योजना (PM SVANidhi)रेहड़ी-पटरी और स्ट्रीट वेंडर्स को बिना गारंटी के विधिक ऋण (Collateral-Free Loan)।स्वरोजगार के माध्यम से असंगठित क्षेत्र के नागरिकों का सशक्तिकरण।
शहरी ऋण सब्सिडी (Urban Subsidy)शहरी क्षेत्र के लाभार्थियों को ब्याज पर 7 प्रतिशत (7%) की विधिक सब्सिडी।छोटे व्यापारियों पर ब्याज का बोझ कम कर व्यापार विस्तार में मदद।
ग्रामीण ऋण सब्सिडी (Rural Subsidy)ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार योजनाओं पर 35 प्रतिशत (35%) तक की भारी छूट।पहाड़ों से पलायन रोकने और ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने का मुख्य हथियार।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट: 16 सुरंगों का निर्माण अंतिम चरण में; आबादी और पर्यावरण सुरक्षा सर्वोपरि


कार्यशाला के द्वितीय तकनीकी सत्र में रेल विकास निगम (RVNL) के उप महाप्रबंधक (DGM) श्री ओमप्रकाश मालगुडी ने उत्तराखण्ड की लाइफलाइन बन रहे ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट की वर्तमान भौतिक प्रगति रिपोर्ट साझा की। उन्होंने कहा कि यह रेल लाइन भारतीय इंजीनियरिंग का एक अद्भुत और वैश्विक नमूना है, जो दुर्गम पहाड़ों को चीरकर तीर्थाटन और आर्थिकी को नई गति दे रही है।


  • अंतिम चरण की ओर कदम: प्रोजेक्ट के तहत ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच कुल 16 अत्याधुनिक रेल सुरंगों का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। यह सुरंगें राज्य के 5 महत्वपूर्ण जिलों को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ेंगी।
  • शून्य विस्थापन नीति: डीजीएम ने स्पष्ट किया कि पूरी परियोजना को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि स्थानीय पर्वतीय आबादी और मूल्यवान वनस्पतियों को न्यूनतम प्रभावित किया जाए। जिन गांवों के नीचे से सुरंगे गुजर रही हैं या जो आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं, उन्हें रेल विकास निगम द्वारा प्राथमिकता के आधार पर विधिक मुआवजा, सीएसआर (CSR) फंड के तहत स्वास्थ्य और शिक्षा सहायता पहुंचाई गई है।

 

हिमालयी विविधता और डिजिटल मैपिंग: सुरंगों के पानी से सिंचेंगे पहाड़, बनेंगे 'अमृत सरोवर'


मुख्य भू-वैज्ञानिक विजय डंगवाल का तकनीकी वक्तव्य:


"रेल विकास निगम के मुख्य भू-वैज्ञानिक श्री विजय डंगवाल ने कार्यशाला में हिमालय की संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण पर एक बेहद महत्वपूर्ण वैज्ञानिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि हिमालय के भीतर भू-गर्भीय विविधता (Geological Diversity) बहुत अधिक है, जिसे ध्यान में रखकर ही पूरी रेल लाइन का विधिक एलाइनमेंट (Alignment) तैयार किया गया है। आरवीएनएल की विंग ने पूरे रूट की डिजिटल मैपिंग (Digital Mapping) की है, ताकि किसी भी संवेदनशील फॉल्ट लाइन या प्राकृतिक जल स्रोत को नुकसान न पहुंचे। सबसे क्रांतिकारी घोषणा करते हुए उन्होंने बताया कि सुरंग निर्माण के दौरान पहाड़ों के भीतर से जो भारी मात्रा में प्राकृतिक पानी का रिसाव (Water Seepage) हो रहा है, उसे व्यर्थ नहीं बहने दिया जाएगा। इस पानी को चैनेलाइज करके 'अमृत सरोवर प्रोजेक्ट' (Amrit Sarovar Project) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे न केवल हिमालयी जल का विधिक संरक्षण होगा, बल्कि आसपास के पर्वतीय गांवों को बारहमासी शुद्ध पेयजल और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा।"


बैंकिंग सेक्टर की डिजिटल क्रांति: स्ट्रीट वेंडर्स से लेकर ग्रामीण उद्यमियों तक 4-स्तरीय वित्तीय लाभ


उत्तराखंड ग्रामीण बैंक ऋषिकेश के एचओडी (बिज़नेस) श्री रोहित बडोला ने कार्यशाला के आर्थिक सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में भाग लेते हुए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और पीएम स्वनिधि योजना के माध्यम से आ रहे जमीनी बदलावों के चार मुख्य विधिक स्तंभों को प्रस्तुत किया:


  • अंतिम पायदान का वित्तीय समावेशन: बैंकों के माध्यम से आज समाज के सबसे कमजोर वर्ग, विशेषकर स्ट्रीट वेंडर्स, ठेला चलाने वालों और छोटे दुकानदारों को मुख्यधारा की बैंकिंग से जोड़ा गया है। बिना किसी गारंटर के उन्हें त्वरित ऋण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
  • 100% डिजिटल बैंकिंग एकीकरण: राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों में काम करने वाले छोटे से छोटे व्यापारी को भी क्यूआर कोड (QR Code) और डिजिटल बैंकिंग से जोड़ दिया गया है, जिससे उनकी विधिक क्रेडिट स्कोर (CIBIL) मजबूत हो रही है और वे भविष्य में बड़े व्यापारिक ऋण के पात्र बन रहे हैं।
  • शहरी क्षेत्रों में 7% सब्सिडी: पीएम स्वनिधि और स्वरोजगार ऋणों के अंतर्गत शहरी क्षेत्र के लाभार्थियों को ब्याज दरों पर 7 प्रतिशत की विशेष सब्सिडी दी जा रही है, जिससे उनके व्यवसाय की कार्यशील पूंजी (Working Capital) सुलभ हो गई है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में 35% का महा-अनुदान: पहाड़ों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और ग्रामीण युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत 35 प्रतिशत (35%) तक की विधिक सब्सिडी (अनुदान) दी जा रही है। इसका सीधा लाभ डेयरी, हस्तशिल्प, होमस्टे और स्थानीय विनिर्माण इकाइयों को मिल रहा है।

 

पीआईबी का उद्देश्य: सही, सटीक और प्रामाणिक सूचनाओं का प्रवाह सुनिश्चित करना

 

कार्यशाला के समापन सत्र में पत्र सूचना कार्यालय, देहरादून के मीडिया एवं संचार अधिकारी श्री अनिल दत्त शर्मा ने 'वार्ता' के आयोजन की विधिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित पत्रकारों का आह्वान करते हुए कहा कि आज के 'फेक न्यूज़' और सनसनीखेज पत्रकारिता के दौर में 'विकासात्मक पत्रकारिता' (Developmental Journalism) की प्रासंगिकता बहुत अधिक बढ़ गई है।


पीआईबी का यह निरंतर प्रयास है कि दूर-दराज के जनपदों, ब्लॉक स्तर और सीमावर्ती क्षेत्रों में काम कर रहे संवाददाताओं को सीधे विषय विशेषज्ञों से जोड़ा जाए। जब पत्रकारों के पास बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, बैंकिंग सब्सिडी और जन-कल्याणकारी नियमों की सही, सटीक और प्रामाणिक जानकारी होगी, तभी वे जनता को जागरूक कर सकेंगे और बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त कर सकेंगे।

 

 विकास, विरासत और सुशासन का एक समग्र प्रशासनिक कोलाज 


पत्र सूचना कार्यालय (PIB) देहरादून द्वारा ऋषिकेश में आयोजित यह मीडिया कार्यशाला ‘वार्ता’ केवल एक सरकारी संगोष्ठी नहीं, बल्कि पिछले 12 वर्षों में भारत सरकार द्वारा किए गए नीतिगत और संरचनात्मक सुधारों का एक जीवंत दस्तावेज है। 2014 से 2026 तक के सफर में उत्तराखण्ड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य ने बुनियादी ढांचे और आर्थिकी के क्षेत्र में जो छलांग लगाई है, उसे इस कार्यशाला में पूरी विधिक और तकनीकी पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत किया गया।


विशेष रूप से, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट के मुख्य भू-वैज्ञानिक द्वारा साझा की गई यह जानकारी कि सुरंगों से निकलने वाले पानी को 'अमृत सरोवर' के रूप में जल संरक्षण के लिए उपयोग किया जाएगा, यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार का विजन केवल "अंधाधुंध विकास" का नहीं, बल्कि "सतत पर्यावरण अनुकूल विकास" (Sustainable Green Development) का है। वहीं, बैंकिंग क्षेत्र में ग्रामीण स्तर पर 35% और शहरी स्तर पर 7% की विधिक सब्सिडी यह प्रमाणित करती है कि आर्थिक नीतियां केवल बड़े कॉरपोरेट्स के लिए नहीं, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर बैठे स्ट्रीट वेंडर और ग्रामीण युवा के कल्याण के लिए बनाई जा रही हैं। पीआईबी द्वारा पत्रकारों के साथ स्थापित किया जा रहा यह सीधा संवाद लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को और अधिक सशक्त बनाएगा तथा भ्रामक सूचनाओं के दौर में जनहितैषी सुशासन की सही तस्वीर जनता के सामने लाएगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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