रामनगर: बुक्सा जनजाति की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र का लोकार्पण, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने रेखांकित की प्राथमिकताएं


Aapki Media AI


 रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य के सीमांत और जनजातीय क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण तथा स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विकासात्मक कदम उठाया गया है। रामनगर के सावल्दे क्षेत्र में बुक्सा जनजाति की महिलाओं को स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता से जोड़ने के उद्देश्य से एक विशेष 'प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र' की स्थापना की गई है। इस नवनिर्मित केंद्र का आधिकारिक लोकार्पण प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल द्वारा किया गया।


रामनगर: बुक्सा जनजाति की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र का लोकार्पण, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने रेखांकित की प्राथमिकताएं


इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केंद्र जनजातीय मातृशक्ति को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, उनके पारंपरिक कौशल को तराशने तथा उन्हें आधुनिक बाजार की मांगों के अनुरूप रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक व सामाजिक भूमिका निभाएगा। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि कैसे दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं को आजीविका के स्थाई साधनों से जोड़ा जाए।

केंद्र और राज्य सरकार का संकल्प: जनजातीय उत्थान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

लोकार्पण समारोह के दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने सरकार की प्राथमिकताओं और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के विज़न को साझा किया। उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारें लगातार देश के वंचित और जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए नीतिगत प्रयास कर रही हैं।

इस नीतिगत ढांचे के तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है:

  • जनजातीय समुदायों का समग्र उत्थान: समाज की मुख्यधारा से दूर रह रहे जनजातीय परिवारों तक बुनियादी सुविधाएं और विकास के लाभ पहुंचाना।
  • महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment): महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देने के बजाय उन्हें कौशल विकास (Skill Development) के माध्यम से दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना: स्थानीय स्तर पर ही उत्पादन और प्रसंस्करण (Processing) इकाइयों को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकना।

इसी संकल्प के तहत सावल्दे में बुक्सा जनजाति की महिलाओं के लिए इस विशिष्ट केंद्र की रूपरेखा तैयार की गई है, जहां उन्हें आधुनिक तकनीकी उपकरणों के संचालन, उत्पाद निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कौशल विकास और बाजार लिंकेज (Market Linkage) पर विशेष जोर

कैबिनेट मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि किसी भी उत्पादन केंद्र की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वहां निर्मित होने वाले उत्पादों को सही बाजार मिल पा रहा है या नहीं। कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल कारीगर होने के बावजूद 'मार्केट लिंकेज' की कमी के कारण उत्पाद सही मूल्य पर नहीं बिक पाते।

इस समस्या के समाधान के रूप में यह नवनिर्मित प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र दोहरी भूमिका निभाएगा:

  • कौशल विकास एवं प्रशिक्षण: प्रथम चरण में बुक्सा जनजाति की महिलाओं को उनकी रुचि और पारंपरिक हस्तकला के आधार पर उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे उनके उत्पादों की फिनिशिंग और गुणवत्ता बाजार के मानकों के अनुरूप हो सके।
  • बाजार से जुड़ाव (Market Integration): द्वितीय चरण में इस केंद्र को विभिन्न सरकारी योजनाओं, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और स्थानीय व राज्य स्तरीय बाजारों से जोड़ा जाएगा। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प व उत्पादों का सीधा लाभ उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मिलेगा।

पारंपरिक हस्तकला और सांस्कृतिक धरोहर को प्रोत्साहन

उत्तराखंड का जनजातीय समाज अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, विशिष्ट हस्तकला और अनूठे कौशल के लिए जाना जाता है। बुक्सा जनजाति की महिलाओं में भी पारंपरिक रूप से कई प्रकार के हस्तशिल्प और उत्पाद बनाने का हुनर मौजूद है। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि इस समृद्ध परंपरा और कौशल को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़कर प्रोत्साहित करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शीर्ष पर शामिल है।

यह केंद्र बुक्सा जनजाति की महिलाओं की आंतरिक प्रतिभा को एक नई पहचान देने का काम करेगा। जब स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, तो न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि उनकी आने वाली पीढ़ियां भी अपनी पारंपरिक कला को सहेजने और उसे एक बड़े व्यवसाय में बदलने के लिए प्रेरित होंगी। यह कदम जनजातीय समाज के सामाजिक-आर्थिक स्तर में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाएगा।

कार्यक्रम का मुख्य विवरण


क्र.सं. परियोजना एवं कार्यक्रम मानक (Project Metrics) प्राप्त विवरण एवं प्रशासनिक जानकारी (Details & Context)
1. परियोजना का नाम प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र (बुक्सा जनजाति महिला कल्याण)
2. लोकार्पण स्थल सावल्दे क्षेत्र, रामनगर (जनपद - नैनीताल, उत्तराखंड)
3. मुख्य अतिथि / लोकार्पणकर्ता श्री सुबोध उनियाल (माननीय कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार)
4. मुख्य लक्षित वर्ग बुक्सा जनजातीय समुदाय की महिलाएं एवं मातृशक्ति
5. मूल प्रशासनिक उद्देश्य कौशल विकास, स्वरोजगार के अवसर और आत्मनिर्भरता प्रदान करना
6. सहभागी समूह एवं संस्थाएं स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं स्वयं सहायता समूह (SHGs)
7. रणनीतिक फोकस पारंपरिक हस्तकला का संरक्षण एवं सीधा बाजार लिंकेज सुनिश्चित करना


व्यापक जनभागीदारी और प्रशासनिक मुस्तैदी

सावल्दे में आयोजित इस लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान स्थानीय स्तर पर भारी उत्साह देखा गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण और शहरी निकायों के जनप्रतिनिधियों, संबंधित विभागीय प्रशासनिक अधिकारियों, विभिन्न स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) की सक्रिय महिलाओं तथा बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिकों ने अपनी सहभागिता दर्ज की। स्थानीय जनता और जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के विकास के लिए एक मील का पत्थर बताया।

विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इस केंद्र के दैनिक संचालन, प्रशिक्षण मॉड्यूल की समय-सारणी और कच्ची सामग्रियों की उपलब्धता पर निरंतर निगरानी रखें। प्रशासन का प्रयास है कि इस केंद्र के माध्यम से तैयार होने वाले उत्पादों की प्रदर्शनी राज्य और राष्ट्रीय स्तर के मेलों में भी लगाई जाए, ताकि बुक्सा जनजाति की महिलाओं के हुनर को एक व्यापक मंच मिल सके और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो सके।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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