डीएम डॉ. आशीष चौहान का बड़ा एक्शन: 171 फरियादियों की सुनीं समस्याएं; 15 युवाओं से विदेशी ठगी पर लगेगा गैंगस्टर, 4 साल से रुकी दिव्यांग पेंशन मौके पर स्वीकृत


Aapki Media AI


देहरादून, 30 जून, 2026: उत्तराखण्ड शासन की 'जनता के द्वार' नीति और भ्रष्टाचार व प्रशासनिक शिथिलता के विरुद्ध 'जीरो-टॉलरेंस' के विधिक संकल्प को धरातल पर उतारते हुए देहरादून जिला मुख्यालय में एक ऐतिहासिक जन-सुनवाई संपन्न हुई। सोमवार (29 जून) को जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित ‘समाधान दिवस’ जन-आकांक्षाओं के त्वरित विधिक निस्तारण का मुख्य केंद्र बना।

 

171 फरियादियों की सुनीं समस्याएं; 15 युवाओं से विदेशी ठगी पर लगेगा गैंगस्टर, 4 साल से रुकी दिव्यांग पेंशन मौके पर स्वीकृत


इस उच्च स्तरीय जन-अदालत में सुदूरवर्ती पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों से पहुंचे 171 फरियादियों ने भूमि विवाद, अवैध कब्जे, धोखाधड़ी, बैंकिंग उत्पीड़न और दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों के पुनर्निर्माण से जुड़ी विधिक विसंगतियों को जिलाधिकारी के समक्ष रखा। संवेदनशीलता और कड़े प्रशासनिक रुख का परिचय देते हुए जिलाधिकारी ने अधिकांश मामलों का मौके पर ही (On-The-Spot) निस्तारण किया, जबकि आपराधिक व धोखाधड़ी के मामलों में तत्काल कठोर दंडात्मक विधिक कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए।


आपराधिक नेटवर्क पर कड़ा प्रहार: ऋषिकेश के 15 युवाओं से विदेश के नाम पर ठगी, लगेगा गैंगस्टर एक्ट



समाधान दिवस के दौरान उस समय प्रशासनिक और विधिक मोर्चे पर हड़कंप मच गया, जब ऋषिकेश क्षेत्र के करीब 15 पीड़ित बेरोजगार युवा एक सुर में अपनी आपबीती लेकर जिलाधिकारी के समक्ष उपस्थित हुए। पीड़ितों ने विधिक साक्ष्यों के साथ आरोप लगाया कि एक शातिर अंतर-राज्यीय ठग ने उन्हें विदेशों में सुनहरा भविष्य और प्रतिष्ठित नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनके पासपोर्ट और लाखों रुपये हड़प लिए हैं।

  1. जान से मारने की धमकी: पीड़ितों का आरोप है कि जब उन्होंने अपने विधिक धन की वापसी की मांग की, तो जालसाज उन्हें जान से मारने की धमकियां देने लगा।
  2. एसएसपी को कड़े विधिक निर्देश: मामले की भू-राजनीतिक संवेदनशीलता और युवाओं के भविष्य से जुड़े इस जघन्य अपराध को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून से कूटनीतिक वार्ता की। उन्होंने पुलिस कार्यपालिका को निर्देश दिए कि आरोपी के खिलाफ तत्काल संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गैंगस्टर एक्ट (Gangster Act) जैसी सख्त दंडात्मक विधिक धाराओं के तहत त्वरित दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए, ताकि युवाओं को ठगने वाले अन्य गिरोहों में कड़ा विधिक संदेश जाए।

 

देहरादून समाधान दिवस जून-2026: जन-सुनवाई एवं विधिक निस्तारण मैट्रिक्स



समाधान दिवस में आए 171 मामलों में से सर्वाधिक संवेदनशील विधिक प्रकरणों, उन पर जिलाधिकारी के ऑन-स्पॉट निर्णयों और उत्तरदायी प्रशासनिक अधिकारियों का संपूर्ण प्रामाणिक डेटा इस तालिका में संकलित है:


पीड़ित पक्षकार एवं भौगोलिक क्षेत्रमुख्य शिकायत/विधिक विसंगति की प्रकृतिजिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान का ऑन-स्पॉट कड़ा विधिक निर्देश
15 बेरोजगार युवा, ऋषिकेश क्षेत्र।विदेश में नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी व पासपोर्ट ज़ब्ती।गैंगस्टर एक्ट के तहत तत्काल विधिक एफआईआर एवं गिरफ्तारी के आदेश।
संगीता देवी, निवासी- नेहरू ग्राम।पति के दिव्यांग होने के बावजूद 4 वर्ष से दिव्यांग पेंशन का अभाव।CMO को आज ही मेडिकल जाँच व समाज कल्याण अधिकारी को 1 सप्ताह में पेंशन का आदेश।
अर्चना देवी (ऋण खाताधारक)।ऋण पुनर्गठन की मांग पर बैंक अधिकारियों द्वारा मानसिक उत्पीड़न।लीड बैंक अधिकारी (LBO) को उत्पीड़न की जांच कर न्यायोचित समाधान के निर्देश।
ग्राम पंचायत रायवाला & नया गांवसार्वजनिक मार्ग और सड़कों पर किया गया अवैध निर्माण व अतिक्रमण।संबंधित उपजिलाधिकारी (SDM) और पुलिस को अवैध निर्माण तत्काल ध्वस्त करने के निर्देश।
ग्राम म्यूंढा (चकराता) & बनसारदैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त सिंचाई नहर, गूल व खेतों की सुरक्षा दीवार।लघु सिंचाई विभाग को नकदी फसलों के नुकसान की भरपाई हेतु तुरंत प्रस्ताव का आदेश।
निवासी, सुंदरवाला (आईआरडीई)नालियां चोक होने से आवासीय भवनों के गिरने व बाढ़ का विधिक खतरा।आपदा प्रबंधन अधिकारी को अंतर्विभागीय समन्वय से तत्काल जल निकासी के निर्देश।

मानवीय संवेदना की मिसाल: 4 साल का प्रशासनिक गतिरोध मिनटों में दूर, बुजुर्ग मां की जमीन पर जांच


समाधान दिवस में जहाँ एक ओर अपराधियों के खिलाफ डीएम का कड़ा रुख दिखा, वहीं दूसरी ओर निर्धन और असहाय नागरिकों के प्रति उनका मानवीय और संवेदनशील चेहरा भी सामने आया। नेहरू ग्राम की संगीता देवी ने रोते हुए अपनी आर्थिक बदहाली बयां की कि उनके पति 4 वर्षों से गंभीर रूप से दिव्यांग हैं। समुचित विधिक मार्गदर्शन और 'दिव्यांग प्रमाण पत्र' न बन पाने के कारण परिवार भुखमरी की कगार पर था और उन्हें पेंशन नहीं मिल पा रही थी।


डीएम ने तत्काल मामले को अपने हाथ में लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को आदेश दिया कि वे आज ही विशेष मेडिकल टीम भेजकर दिव्यांगता का विधिक प्रमाणीकरण करें और समाज कल्याण विभाग को एक सप्ताह के भीतर हर हाल में पेंशन स्वीकृत करने का विधिक अल्टीमेटम (SLA) दे दिया। इसी तरह, एक बुजुर्ग माँ की ज़मीन उसकी ही बेटी द्वारा धोखे से हड़पने के मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने क्षेत्राधिकारी (CO) पुलिस को तत्काल धोखाधड़ी की विधिक जाँच सौंपकर रिपोर्ट तलब की।


पारदर्शी लोक-प्रशासन और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के 4 मुख्य विधिक स्तंभ


जिलाधिकारी ने समाधान दिवस के अंत में उपस्थित समस्त जिला स्तरीय अधिकारियों को सुशासन के निम्नलिखित चार विधिक स्तंभों का कड़ाई से पालन करने की चेतावनी दी:


  • अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर बुलडोजर एक्शन: रायवाला और नया गांव (सेवालाखुर्द) की तर्ज पर सार्वजनिक सड़कों को अवरुद्ध करने वाले किसी भी अवैध ढांचे को बिना किसी विधिक रियायत के तत्काल ध्वस्त करना और नया गांव में किरायेदारों का अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन (Verification) करना।
  • विद्युत और वन विभाग का संयुक्त सुरक्षा ऑडिट: नथुवाला जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जहाँ पेड़ों के बीच से हाई-टेंशन बिजली के तार गुजर रहे हैं, वहाँ दोनों विभाग आपसी विधिक समन्वय से तुरंत टहनियों की छंटान करेंगे ताकि मानसून में करंट या आग का खतरा न हो।
  • आपदा अवसंरचना का अग्रिम बजटीय प्रस्ताव: चकराता के पर्वतीय क्षेत्रों (म्यूंढा और बनसार) में क्षतिग्रस्त कृषि गूलों और दीवारों के लिए लघु सिंचाई विभाग 48 घंटे के भीतर तकनीकी डिजाइन और बजटीय मांग शासन को भेजेगा।
  • बुजुर्गों और महिलाओं के उत्पीड़न पर 'शून्य सहनशीलता' (Zero Tolerance): घरेलू हिंसा, संपत्ति पर अवैध कब्जे या धोखाधड़ी के शिकार वरिष्ठ नागरिकों के मामलों को 'माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण अधिनियम' के तहत प्राथमिकता पर निस्तारित करना।

 

क्रेडिबिलिटी और सुशासन की कसौटी पर जिला कार्यपालिका


29 जून 2026 को कलेक्ट्रेट देहरादून में आयोजित यह 'समाधान दिवस' इस प्रशासनिक सत्य का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जनता का लोकतंत्र पर विश्वास तभी अक्षुण्ण रहता है जब उसकी विधिक समस्याओं का समाधान फाइलों के मकड़जाल से बाहर निकलकर धरातल पर होता है।


जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के नेतृत्व में अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट राजेश तिवारी और सभी उपजिलाधिकारियों (SDMs) की भौतिक उपस्थिति में लिए गए कड़े विधिक निर्णय यह सिद्ध करते हैं कि देहरादून प्रशासन जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। ठगों पर गैंगस्टर लगाने का आदेश और असहाय दिव्यांगों को मौके पर पेंशन दिलाना यह संदेश देता है कि सुशासन केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक विधिक जिम्मेदारी है जिसे हर अधिकारी को समयबद्ध ढंग से निभाना होगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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