Aapki Media AI
देहरादून, 16 जून, 2026: लोकतान्त्रिक प्रणाली की रीढ़, यानी एक पूर्णतः शुद्ध, त्रुटिहीन और पारदर्शी मतदाता सूची (Electoral Roll) तैयार करने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड में निर्वाचन विभाग ने अपनी पूरी प्रशासनिक मशीनरी को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत राज्य में चलाए जा रहे 'विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान-2026' (Special Deep Voter Roll Revision Campaign) की प्रगति को लेकर मंगलवार को सचिवालय में एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई।
उत्तराखण्ड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम एवं भारत निर्वाचन आयोग के उप निर्वाचन आयुक्त श्री संजय कुमार ने संयुक्त रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से सूबे के सभी 13 जनपदों के जिलाधिकारियों (District Magistrates/DEOs) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) के साथ सघन समीक्षा की। बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही को विधिक रूप से बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने 'गणना फार्म' (Enumeration Forms) के वितरण, उनके शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन और संदिग्ध मतदाताओं के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) को लेकर बेहद कड़े और व्यावहारिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
त्रि-स्तरीय विजिट नीति: अनुपस्थित मतदाताओं के घर बीएलओ और बीएलए की संयुक्त विधिक टीम करेगी दौरा
समीक्षा बैठक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण विधिक निर्देश बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के समन्वय को लेकर दिया गया। निर्वाचन विभाग के संज्ञान में आया है कि कई बूथों पर मतदाता अपने पंजीकृत पते पर अनुपस्थित मिल रहे हैं, जिसके कारण मतदाता सूची को अंतिम रूप देने में तकनीकी और विधिक अड़चनें आ रही हैं।
- संयुक्त टीम का गठन: मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने कड़े निर्देश दिए कि जिन मतदाताओं के घरों पर ताला लगा है या जो अस्थाई रूप से अनुपस्थित हैं, वहां बीएलओ (BLO) अकेले नहीं जाएंगे। वे संबंधित राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) को अनिवार्य रूप से अपने साथ लेकर जाएंगे।
- अनिवार्य तीन विजिट (3 Mandatory Visits): यदि कोई मतदाता पहली बार में घर पर नहीं मिलता है, तो बीएलओ और बीएलए की संयुक्त टीम को अनिवार्य रूप से तीन अलग-अलग तिथियों और समय पर उनके आवास का दौरा करना होगा। तीन बार जाने के बाद ही उस मतदाता के संबंध में कोई अंतिम विधिक आख्या (Field Report) तैयार की जाएगी।
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान 2026: प्रशासनिक प्रोटोकॉल एवं फील्ड रिपोर्ट मैट्रिक्स
मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए जारी किए गए तकनीकी मापदंडों, एएसडी (ASD) वोटरों के विधिक वर्गीकरण और डिजिटल टाइमलाइन को इस व्यापक प्रशासनिक तालिका में संकलित किया गया है:
| निर्वाचन मानक एवं श्रेणियां (Electoral Parameters) | आयोग का विधिक एवं फील्ड प्रोटोकॉल (ECI Guidelines 2026) | अंतिम उद्देश्य एवं प्रशासनिक महत्ता (Strategic Objective) |
| गणना फार्म वितरण (Form Distribution) | सभी जनपदों को तय समय-सीमा (Timeline) के भीतर 100% वितरण पूर्ण करने के निर्देश। | प्रत्येक नागरिक तक मतदाता पंजीकरण फॉर्म की विधिक पहुंच सुनिश्चित करना। |
| धीमी प्रगति वाले बूथ (Slow Progress Booths) | जिलाधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत बूथवार (Booth-wise) समीक्षा; हेल्पिंग हैंड (Helping Hand) के रूप में अतिरिक्त कार्मिकों की तैनाती। | मैनपावर बढ़ाकर बैकलॉग को खत्म करना और समय पर काम पूरा करना। |
| डाटा डिजिटाइजेशन (Data Digitization) | फार्म वितरण पूर्ण होते ही डेटा को राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP/Garuda App) पर लाइव फीड करना। | पेपरवर्क को तुरंत डिजिटल रिकॉर्ड में तब्दील कर ऑनलाइन पारदर्शिता लाना। |
| एबसेंट वोटर (Absentee Voters) | ऐसे मतदाता जो पंजीकरण के समय अपने स्थायी निवास स्थान पर भौतिक रूप से मौजूद नहीं हैं। | 3 अनिवार्य विजिट के बाद बीएलए (BLA) की सहमति से फील्ड रिपोर्ट दर्ज करना। |
| शिफ्टेड वोटर (Shifted Voters) | जो मतदाता भुड्डी, छरबा या अन्य क्षेत्रों से स्थाई रूप से किसी दूसरे जनपद/राज्य में चले गए हैं। | नए पते पर वोट ट्रांसफर सुनिश्चित करना तथा पुराने स्थान से नाम विलोपन (Deletion)। |
| डेथ वोटर (Deceased Voters) | जिन पंजीकृत मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, परंतु उनका नाम सूची में अंकित है। | मृत्यु प्रमाण पत्र या पंचनामे के आधार पर नाम हटाकर बोगस वोटिंग की संभावना शून्य करना। |
| डूप्लीकेट वोटर (Duplicate Voters) | एक ही मतदाता का नाम दो अलग-अलग बूथों या विधानसभाओं की सूची में दर्ज होना। | डी-डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और फील्ड रिपोर्ट के जरिए एक नागरिक-एक वोट का विधिक नियम लागू करना। |
ASD और डुप्लीकेट वोटर्स पर ECI के उप निर्वाचन आयुक्त का सख्त निर्देश: दर्ज होगी फील्ड रिपोर्ट
भारत निर्वाचन आयोग के उप निर्वाचन आयुक्त श्री संजय कुमार ने दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ते हुए जनपदों के जिलाधिकारियों को तकनीकी और कानूनी रूप से अत्यधिक सतर्क रहने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनाव की पहली शर्त एक 'साफ-सुथरी मतदाता सूची' है।
उप निर्वाचन आयुक्त ने विशेष रूप से ASD श्रेणी यानी— Absent (अनुपस्थित), Shifted (स्थान परिवर्तित), Death (मृतक) और Duplicate (समान नाम वाले) मतदाताओं पर फोकस करने को कहा:
उप निर्वाचन आयुक्त श्री संजय कुमार का विधिक आदेश:
"जिन जनपदों में गणना फार्म वितरण का प्राथमिक कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुका है और वहां कई मतदाता अपने पते पर उपस्थित नहीं मिल रहे हैं, वहां अधिकारी डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करें। इसके तत्काल बाद, ऐसे अनुपस्थित (Absentee) मतदाताओं की पूरी सूची बीएलओ द्वारा संबंधित मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) के साथ लिखित रूप से साझा की जानी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गणना फार्म के 'फील्ड रिपोर्ट कॉलम' (Field Report Section) में बीएलओ को अनिवार्य रूप से स्पष्ट और विधिसम्मत विधिक आख्या दर्ज करनी होगी कि संबंधित वोटर एबसेंट है, शिफ्ट हो चुका है, मृत है या डुप्लीकेट है। बिना ठोस फील्ड रिपोर्ट के किसी भी मतदाता का नाम न तो जोड़ा जाएगा और न ही विलोपित (Delete) किया जाएगा।"
जिलाधिकारियों को सीईओ की 4-स्तरीय प्रशासनिक गाइडलाइन
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीएम) को इस पुनरीक्षण अभियान को मिशन मोड में संचालित करने के लिए चार रणनीतिक निर्देश दिए:
- जिलाधिकारियों द्वारा बूथवार समीक्षा: सभी डीएम अपने-अपने जनपदों में क्लोज-मॉनिटरिंग करेंगे। वे केवल तहसील स्तर की रिपोर्ट पर निर्भर न रहकर स्वयं एक-एक पोलिंग बूथ की प्रगति का विधिक ऑडिट करेंगे।
- अतिरिक्त कार्मिकों (हेल्पिंग हैंड) की तैनाती: जिन पोलिंग स्टेशनों या दूरस्थ पर्वतीय मतदेय स्थलों पर भौगोलिक विसंगतियों के कारण फॉर्म वितरण और उनके ऑनलाइन डिजिटाइजेशन की गति धीमी पाई जाएगी, वहां जिला प्रशासन तुरंत अतिरिक्त कर्मचारियों को 'हेल्पिंग हैंड' के रूप में नियुक्त करेगा ताकि निर्धारित समय-सीमा (Deadline) का उल्लंघन न हो।
- डेटा की विधिक शुद्धता: डिजिटाइजेशन करते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि मतदाता के नाम, उपनाम, आयु, लिंग और मकान नंबर की प्रविष्टि में कोई स्पेलिंग मिस्टेक या तकनीकी त्रुटि न रहे, जिससे भविष्य में मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) जारी करते समय कोई विसंगति उत्पन्न न हो।
- राजनीतिक दलों से समन्वय: तहसील और जिला स्तर पर पंजीकृत राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जाएं, ताकि मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और विवाद-रहित बनी रहे।
बैठक में निर्वाचन विभाग के शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति
इस अत्यंत महत्वपूर्ण डिजिटल समीक्षा बैठक में उत्तराखण्ड निर्वाचन सचिवालय और कलेक्ट्रेट स्तर के सभी शीर्ष विधिक एवं प्रशासनिक अधिकारी भौतिक व वर्चुअल रूप से उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- डॉ. विजय कुमार जोगदण्डे (अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड)
- श्री प्रकाश चन्द्र दुम्का (संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी)
- श्री मस्तू दास (सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी)
- इसके अतिरिक्त, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी 13 जनपदों के जिलाधिकारी (District Election Officers) और उनके अधीन कार्यरत निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) अपने-अपने जिला मुख्यालयों से तकनीकी साक्ष्यों के साथ उपस्थित रहे।
लोकतंत्र के शुद्धिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रशासनिक कदम
मुख्य निर्वाचन अधिकारी और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ली गई आज की यह उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक उत्तराखण्ड की चुनावी शुचिता और सुशासन (Electoral Integrity and Good Governance) को स्थापित करने की दिशा में एक अत्यंत व्यावहारिक कदम है। अक्सर चुनावों के दौरान यह शिकायतें सामने आती हैं कि कई मृत या अन्यत्र चले गए लोगों के नाम मतदाता सूची में बने रहते हैं, जिसका दुरुपयोग होने की संभावना बनी रहती है। आयोग ने इस बार ASD (एबसेंट, शिफ्टेड, डेथ) और डुप्लीकेट मतदाताओं की गणना पर जो कड़ा रुख अपनाया है, वह इस समस्या को जड़ से खत्म कर देगा।
बीएलओ और बीएलए को एक साथ जोड़कर "तीन बार अनिवार्य विजिट" करने की जो नीति बनाई गई है, वह न केवल पारदर्शी है बल्कि पूरी तरह न्यायसंगत भी है। इससे किसी भी वैध मतदाता का नाम गलती से हटने की गुंजाइश समाप्त हो जाती है और राजनीतिक दलों का प्रशासनिक तंत्र पर विश्वास भी बढ़ता है। जिलाधिकारियों को 'बूथवार समीक्षा' करने और सुस्त बूथों पर 'अतिरिक्त हेल्पिंग हैंड' लगाने के निर्देश यह दर्शाते हैं कि निर्वाचन विभाग आधुनिक तकनीक और कुशल प्रबंधन (Efficient Management) के समन्वय से इस पूरे गहन पुनरीक्षण अभियान को समय से पहले और त्रुटिहीन तरीके से संपन्न कराने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है। एक पारदर्शी लोकतंत्र के निर्माण में यह प्रशासनिक कड़ाई अत्यंत सराहनीय है।
.jpeg)