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देहरादून। उत्तराखंड को पूरी तरह से नशा मुक्त बनाने और युवा पीढ़ी को मादक पदार्थों के जानलेवा चंगुल से सुरक्षित निकालने की दिशा में राज्य पुलिस और खुफिया तंत्र ने अपनी रणनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी विजन "नशा मुक्त उत्तराखंड" को धरातल पर कड़ाई से लागू करने के लिए आज दिनांक 22 जून 2026 को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय गोष्ठी (बैठक) का आयोजन किया गया। पुलिस महानिरीक्षक (एसटीएफ/साइबर/एएनटीएफ) की अध्यक्षता में आयोजित इस विशेष बैठक में उत्तराखंड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों सहित राज्य के विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों तथा नशा मुक्ति व पुनर्वास केंद्रों (De-addiction Centers) के संचालकों ने प्रतिभाग किया।
इस महत्वपूर्ण गोष्ठी के दौरान उपस्थित सभी हितधारकों ने राज्य में युवाओं और आम जनमानस को नशे के गंभीर दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करने, नशा तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने तथा नशे की लत से पीड़ित व्यक्तियों के व्यावहारिक पुनर्वास (Rehabilitation) को लेकर एक व्यापक और बहुआयामी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
जागरूकता, मेडिकल ट्रीटमेंट और काउंसलिंग पर विशेष बल
प्रशासनिक स्तर पर आयोजित इस गोष्ठी में इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया गया कि नशे के खिलाफ केवल दंडात्मक कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के भीतर एक व्यापक चेतना और उपचार तंत्र का होना भी अनिवार्य है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में आने से शुरूआती स्तर पर ही रोकने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में चल रहे जागरूकता कार्यक्रमों को तकनीकी रूप से और अधिक प्रभावी व आकर्षक बनाया जाए।
इसके अतिरिक्त, जो व्यक्ति या युवा पहले से ही किसी भी प्रकार की नशे की लत (Substance Abuse) से प्रभावित हो चुके हैं, उन्हें अपराधी के रूप में देखने के बजाय समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए निम्नलिखित तीन आयामी नीति पर विशेष जोर दिया जाएगा:
- प्रभावी मेडिकल ट्रीटमेंट (Medical Treatment): सरकारी अस्पतालों और मान्यता प्राप्त नशा मुक्ति केंद्रों के माध्यम से प्रभावितों को उचित और सुरक्षित विषहरण (Detoxification) चिकित्सा उपलब्ध कराई जाएगी।
- व्यावसायिक काउंसलिंग (Counseling): मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और परामर्शदाताओं के माध्यम से पीड़ितों और उनके परिवारों की नियमित काउंसिलिंग की जाएगी ताकि वे अवसाद और मानसिक तनाव से उबर सकें।
- पुनर्वास सुविधाएं (Rehabilitation): नशा मुक्ति केंद्रों के बुनियादी ढांचे में सुधार कर पुनर्वास की सुविधाओं को और सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे पीड़ित व्यक्ति शीघ्र स्वस्थ होकर एक सामान्य, सम्मानित और आत्मनिर्भर जीवन की ओर वापस लौट सकें।
26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस पर होंगे राज्यव्यापी कार्यक्रम
प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आगामी 26 जून 2026 को आयोजित होने वाले 'अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस' (International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking) के सुअवसर पर पूरे उत्तराखंड में ब्लॉक, थाना और जिला स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता और जनसहभागिता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
वर्तमान में राज्य के भीतर 12 जून से लेकर 26 जून 2026 तक निरंतर "नशामुक्त भारत पखवाड़ा" अत्यंत सक्रियता के साथ मनाया जा रहा है। इस पाक्षिक अभियान के अंतर्गत समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने के लिए कई प्रकार की जमीनी और डिजिटल गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- सड़क और डिजिटल माध्यम: विभिन्न शहरों और कस्बों में नशा विरोधी जागरूकता रैलियों, सेमिनार, तकनीकी कार्यशालाओं और स्थानीय स्तर पर नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया जा रहा है।
- हस्ताक्षर एवं ई-प्रतिज्ञा: आम नागरिकों को नैतिक रूप से इस अभियान का हिस्सा बनाने के लिए व्यापक हस्ताक्षर अभियान और डिजिटल माध्यम से 'ई-प्रतिज्ञा' (E-Pledge) अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।
- थाना स्तर पर संदेश प्रसारण: प्रत्येक थाना क्षेत्र के अंतर्गत कम से कम एक प्रमुख सार्वजनिक या व्यावसायिक स्थान का चयन किया गया है, जहाँ नशा विरोधी पूर्व-रिकॉर्डेड ऑडियो संदेशों (Audio Messages) का लाउडस्पीकरों के माध्यम से नियमित रूप से प्रसारण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि आम राहगीर भी इसके प्रति सचेत हो सकें।
- शैक्षणिक प्रतियोगिताएं: विद्यालयों और महाविद्यालयों (Colleges) में छात्रों की रचनात्मकता को इस विजन से जोड़ने के लिए निबंध लेखन, चित्रकला (Poster Making) प्रतियोगिताएं, नशा विरोधी प्रदर्शनियां और प्रेरक नाट्य प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं।
राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबरों का होगा व्यापक प्रचार-प्रसार
गोष्ठी के दौरान पुलिस महानिरीक्षक ने निर्देश दिए कि नशामुक्त समाज के निर्माण की इस मुहिम में अधिक से अधिक आम नागरिकों को डिजिटल माध्यम से 'ई-प्रतिज्ञा अभियान' से जोड़ा जाए। इसके साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित की जा रही निःशुल्क परामर्श सेवाओं की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जाएगी।
इसके तहत भारत सरकार द्वारा जारी निम्नलिखित दो प्रमुख राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार प्रत्येक पुलिस विंग और शैक्षणिक संस्थान द्वारा किया जाएगा:
- राष्ट्रीय टोल-फ्री डी-एडिक्शन हेल्पलाइन नम्बर (14446): इस नंबर पर कॉल करके कोई भी व्यक्ति नशे की लत से छुटकारे के लिए सरकारी स्तर पर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और परामर्श की निःशुल्क जानकारी प्राप्त कर सकता है।
- मानस (MANAS) टोल-फ्री हेल्पलाइन नम्बर (1933): यह हेल्पलाइन नंबर मादक पदार्थों की अवैध तस्करी की गुप्त सूचना देने और मानसिक स्वास्थ्य व नशा मुक्ति के संबंध में विशेषज्ञ सहायता एवं निःशुल्क कानूनी व चिकित्सीय परामर्श प्राप्त करने का एक अत्यंत गोपनीय और सुरक्षित माध्यम है।
इन नंबरों के माध्यम से नशे से गंभीर रूप से प्रभावित व्यक्तियों एवं उनके चिंतित परिजनों को समय पर सही और प्रामाणिक सहायता बिना किसी शुल्क के आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
गोष्ठी एवं नशा मुक्ति अभियान का मुख्य प्रशासनिक व रणनीतिक सार
| क्र.सं. | अभियान एवं गोष्ठी के मुख्य प्रशासनिक मानक (Campaign Metrics) | प्राप्त विवरण एवं आधिकारिक लक्ष्य (Official Details) |
|---|---|---|
| 1. | आयोजित मुख्य गोष्ठी का विषय | मिशन 'ड्रग्स फ्री देवभूमि' के अंतर्गत समन्वय बैठक |
| 2. | बैठक की तिथि एवं मुख्य आयोजक | 22 जून, 2026 | पुलिस महानिरीक्षक (STF/साइबर/ANTF), उत्तराखंड |
| 3. | सम्मिलित होने वाले मुख्य पक्ष | उत्तराखंड पुलिस, विभिन्न शैक्षणिक संस्थान एवं नशा मुक्ति केंद्रों के संचालक |
| 4. | चल रहे वर्तमान अभियान का नाम | नशामुक्त भारत पखवाड़ा (अवधि: 12 जून से 26 जून, 2026) |
| 5. | अंतर्राष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस की तिथि | 26 जून, 2026 (राज्यभर में व्यापक जनसहभागिता कार्यक्रमों का आयोजन) |
| 6. | राष्ट्रीय डी-एडिक्शन हेल्पलाइन नंबर | 14446 (भारत सरकार द्वारा जारी टोल-फ्री नंबर) |
| 7. | मानस (MANAS) टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर | 1933 (निःशुल्क परामर्श एवं सहायता हेतु) |
| 8. | प्रचार की मुख्य जमीनी रणनीति | नुक्कड़ नाटक, ई-प्रतिज्ञा, हस्ताक्षर अभियान और थानों में ऑडियो संदेश प्रसारण |
| 9. | उपचार के तीन मुख्य स्तंभ | मेडिकल ट्रीटमेंट (Medical Treatment), काउंसलिंग (Counseling) एवं रिहैबिलिटेशन |
