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देहरादून। उत्तराखंड में सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार करने, देश की एकता, अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा को प्रभावित करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक और बड़ा प्रहार किया है. माननीय मुख्यमंत्री के "अपराध मुक्त उत्तराखंड" के विजन और पुलिस महानिदेशक श्री दीपम सेठ के कुशल निर्देशन में एसटीएफ की एक विशेष टीम ने देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है.
एसटीएफ की टीम ने खुफिया और गोपनीय सूचनाओं के आधार पर जनपद ऊधमसिंहनगर के गदरपुर क्षेत्र से इस आरोपी को दबोचा है. प्रारंभिक जांच और तकनीकी विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि आरोपी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित होने वाले एक बड़े राष्ट्रविरोधी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और उसे सीमा पार से संचालित किया जा रहा था.
देर रात्रि सर्च ऑपरेशन: भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार बरामद
हिरासत में लिए जाने के बाद एसटीएफ और खुफिया एजेंसियों द्वारा आरोपी से बेहद गहनता और पेशेवर तरीके से पूछताछ की गई. पूछताछ के दौरान मिली संवेदनशील जानकारियों और आरोपी की निशानदेही पर सुरक्षा बलों ने देर रात्रि एक विशेष सर्च अभियान (सर्च ऑपरेशन) चलाया. इस तलाशी अभियान के दौरान आरोपी के ठिकाने से घातक हथियार और विस्फोटक सामग्रियां बरामद की गईं.
बरामद किए गए हथियारों और युद्धक सामग्रियों की सूची इस प्रकार है:
- विदेशी पिस्तौल: 01 अदद इंग्लिश पिस्तौल (English Pistol).
- पिस्तौल के कारतूस: 05 अदद जिंदा कारतूस.
- प्रतिबंधित सैन्य कारतूस: 02 अदद एके-47 (AK-47) राइफल के जिंदा कारतूस.
- विस्फोटक सामग्री: 04 अदद डेटोनेटर (Detonator), जिनका उपयोग ब्लास्ट या किसी अप्रिय घटना को अंजाम देने के लिए किया जाना था.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जिहादी समूहों और चैट्स का खुलासा
एसटीएफ द्वारा की गई तकनीकी और फॉरेंसिक जांच में आरोपी के मोबाइल फोन से कई चौंकाने वाले साक्ष्य मिले हैं. आरोपी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे—इंस्टाग्राम (Instagram), टेलीग्राम (Telegram) और सिग्नल (Signal) ऐप का उपयोग कर रहा था. इन ऐप्स के माध्यम से वह स्थानीय स्तर पर युवाओं को भ्रमित कर उन्हें उग्र और कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रेरित करने का प्रयास कर रहा था.
जांच के दौरान मोबाइल फोन से निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं:
कट्टरपंथी सामग्रियां: सिग्नल और टेलीग्राम ऐप पर कई ऐसे समूह (Groups) और चैट मिले हैं, जिनमें कथित रूप से जिहाद, शहादत और राष्ट्रविरोधी विचारों से संबंधित डिजिटल सामग्री और भड़काऊ संदेश साझा किए गए थे.
हथियारों की आवाजाही पर चर्चा: विभिन्न चैट्स के विश्लेषण से पता चला है कि आरोपी हथियारों और विस्फोटक सामग्रियों के सुरक्षित भंडारण (Storage) तथा उनकी एक स्थान से दूसरे स्थान पर आवाजाही (Logistics) से संबंधित संदिग्ध बातचीत में सक्रिय रूप से शामिल था.
डेटा डिलीट करने की पुष्टि: पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि पकड़े जाने के डर से उसने हाल ही में कई महत्वपूर्ण चैट, दस्तावेज़ और संदिग्ध संपर्कों (Contacts) को अपने फोन से डिलीट कर दिया था, जिन्हें रिकवर करने के लिए फोन को फॉरेंसिक लैब भेजा जा रहा है.
अंतरराष्ट्रीय और ट्रांस-बॉर्डर कनेक्शन: पाकिस्तान और मलेशिया से जुड़े तार
इस पूरे मामले की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), स्पेशल टास्क फोर्स उत्तराखंड ने एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण आधिकारिक बयान जारी किया है. प्रारंभिक पूछताछ और गोपनीय सोर्सेज (Intelligence Input) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे देश विरोधी नेटवर्क के तार सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय और ट्रांस-बॉर्डर कट्टरपंथी तत्वों से जुड़े हुए हैं.
"प्रारंभिक जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त इस अपराधी को पाकिस्तान द्वारा मलेशिया में बैठे एक हैंडलर (Handler) के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। यह नेटवर्क राज्य और देश के भीतर किसी बड़ी अप्रिय घटना को अंजाम देने के लिए पूरी तैयारी कर रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए देश की सभी केंद्रीय अभिसूचना एजेंसियों (Intelligence Agencies) और संबंधित विभागों को इस संबंध में तत्काल अवगत करा दिया गया है और आगे की विधिक कार्रवाई संयुक्त रूप से की जा रही है।" — एसएसपी, स्पेशल टास्क फोर्स उत्तराखंड
एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के उत्तर प्रदेश के रामपुर निवासी एक संदिग्ध व्यक्ति से भी गहरे संपर्क थे, जो इस नेटवर्क को अंतरराज्यीय स्तर पर फैलाने में मदद कर रहा था. इस इनपुट के आधार पर एसटीएफ की विशेष टीमों ने उत्तर प्रदेश के रामपुर और अन्य संभावित ठिकानों पर दबिश (छापेमारी) दी है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जा सके.
कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तार अभियुक्त का विवरण और एसटीएफ की अपील
आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह कुछ विशेष वैश्विक और स्थानीय घटनाओं से प्रभावित था, जिसके कारण उसके भीतर यह कट्टरपंथी सोच विकसित हुई थी. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे नियमानुसार गिरफ्तार कर लिया गया है.
गिरफ्तार अभियुक्त का विवरण:
- नाम: मोहम्मद सलाउद्दीन
- पिता का नाम: अब्दुल मालिक
- पता: मजरासीला, गदरपुर, जनपद ऊधमसिंहनगर (उत्तराखंड)
- दर्ज धाराएं: धारा 152 (देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालना), 61(2) बीएनएस तथा आईटी एक्ट, 2000 की धारा 66(C) एवं 66(F) (साइबर आतंकवाद से संबंधित).
एसटीएफ द्वारा आम जनमानस से यह विशेष अपील की गई है कि यदि किसी भी नागरिक को अपने आसपास, सोशल मीडिया पर या किसी व्यक्ति द्वारा देश/राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता की कोई भी संदिग्ध सूचना प्राप्त होती है, तो वे तत्काल एसटीएफ उत्तराखंड को सूचित करें. सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान और गोपनीयता को पूरी तरह से गुप्त रखा जाएगा.
कार्रवाई का मुख्य विवरण एवं सांख्यिकीय सार
| क्र.सं. | कार्रवाई एवं नेटवर्क के मुख्य मानक (Operation Metrics) | प्राप्त विवरण एवं आधिकारिक आंकड़े (Case Details) |
|---|---|---|
| 1. | कार्रवाई करने वाली मुख्य एजेंसी | स्पेशल टास्क फोर्स (STF), उत्तराखंड पुलिस |
| 2. | गिरफ्तार मुख्य आरोपी का नाम | मोहम्मद सलाउद्दीन पुत्र अब्दुल मालिक |
| 3. | अभियुक्त का मूल निवास स्थान | मजरासीला, गदरपुर, जनपद ऊधमसिंहनगर (उत्तराखंड) |
| 4. | सर्च ऑपरेशन के दौरान बरामद हथियार | 01 इंग्लिश पिस्तौल, 05 कारतूस और 02 एके-47 के कारतूस |
| 5. | बरामद विस्फोटक सामग्री | 04 अदद डेटोनेटर (Detonators) |
| 6. | प्रयुक्त सोशल मीडिया ऐप्स | इंस्टाग्राम, टेलीग्राम एवं सिग्नल (Signal App) |
| 7. | अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का केंद्र (क्रॉस-बॉर्डर) | पाकिस्तान (संचालन स्थल: मलेशिया में बैठा हैंडलर) |
| 8. | अंतरराज्यीय लिंक / छापेमारी स्थल | रामपुर, उत्तर प्रदेश (यूपी) |
| 9. | पंजीकृत कानूनी धाराएं | धारा 152, 61(2) BNS एवं धारा 66(C), 66(F) आईटी एक्ट, 2000 |
अभिसूचना एजेंसियों की सतर्कता और आगे का रोडमैप
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां अत्यधिक सतर्क मोड पर हैं. सोशल मीडिया पर चल रहे भड़काऊ और देश विरोधी पेजों व हैंडल्स की निगरानी बढ़ा दी गई है. एसटीएफ की तकनीकी विंग आरोपी के डिलीट किए गए डिजिटल डेटा को रिकवर करने में जुटी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसने उत्तराखंड या उत्तर प्रदेश के रामपुर में किन-किन स्थानीय युवाओं को प्रभावित किया था या वे किसी स्लीपर सेल (Sleeper Cell) के निर्माण की प्रक्रिया में तो शामिल नहीं थे.
एसटीएफ की इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई के कारण राज्य में एक बड़ी संभावित आतंकी या हिंसक घटना को समय रहते टाल दिया गया है. पुलिस महानिदेशक के निर्देशों के अनुसार, सीमांत जनपदों और संवेदनशील क्षेत्रों में सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को 24 घंटे सक्रिय रहने को कहा गया है ताकि किसी भी प्रकार की राष्ट्रविरोधी गतिविधि को पनपने से पहले ही समाप्त किया जा सके.
