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काशीपुर/देहरादून। माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड के "अपराध मुक्त उत्तराखंड" के संकल्प और विज़न को धरातल पर उतारने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा अवैध हथियारों एवं फर्जी शस्त्र लाइसेंस धारकों के खिलाफ चलाया जा रहा विशेष अभियान "ऑपरेशन प्रहार" निरंतर नए आयाम स्थापित कर रहा है। उत्तराखंड एसटीएफ ने इस संगठित अंतरराज्यीय सिंडिकेट पर एक और बड़ा प्रहार करते हुए शनिवार देर रात्रि एक बेहद सटीक और प्रभावी दबिश के दौरान नेटवर्क के एक और सक्रिय अभियुक्त को जनपद ऊधमसिंहनगर के काशीपुर क्षेत्र से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
इस हाई-प्रोफाइल फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में एसटीएफ द्वारा की गई यह 11वीं बड़ी गिरफ्तारी है। पुलिस टीम ने पकड़े गए अभियुक्त के कब्जे से एक अवैध आधुनिक सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल (.32 बोर) और 09 अदद जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं, जिन्हें विधिक प्रक्रिया के तहत सीज कर दिया गया है।
4 जून को दर्ज काशीपुर कोतवाली के मुकदमे में हुई कार्रवाई
एसटीएफ मुख्यालय से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बाहरी राज्यों से फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस बनवाकर उन्हें धोखे से उत्तराखंड ट्रांसफर कराने वाले इस गैंग का पर्दाफाश करने के लिए एसटीएफ की टीमें लगातार तकनीकी विश्लेषण, वित्तीय रिकॉर्ड और भौतिक फाइलों की सघन स्क्रूटनी कर रही हैं। इसी गहन जांच के आधार पर गत 04 जून 2026 को जनपद ऊधमसिंहनगर के थाना कोतवाली काशीपुर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया गया था।
- मूल अभियोग का विवरण: एफआईआर संख्या-213/2026, अन्तर्गत धारा 318(4), 338, 336(3), 340, 61(2), 3(5), 111 बीएनएस (BNS) 2023।
- दबिश की रणनीतिक कार्रवाई: इसी दर्ज मुकदमे की विवेचना के क्रम में साक्ष्यों की कड़ियों को जोड़ते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) एसटीएफ के कुशल नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने दिनांक 27 जून 2026 की देर रात काशीपुर क्षेत्र में अचानक छापेमारी की। इस सघन दबिश के दौरान अभियुक्त फईम अहमद को पुलिस ने चारों तरफ से घेरकर दबोच लिया।
शाहजहांपुर के पते पर जारी हुआ था फर्जी शस्त्र लाइसेंस
एसटीएफ की प्रारंभिक पूछताछ और विधिक छानबीन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए अभियुक्त फईम अहमद ने उत्तर प्रदेश के जनपद शाहजहांपुर के नाम से कूटरचित और फर्जी दस्तावेजों के सहारे अपना शस्त्र लाइसेंस तैयार करवाया था। इस जाली लाइसेंस को सही दर्शाते हुए उसने अवैध रूप से .32 बोर की सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल खरीदी थी, जिसे वह लंबे समय से बिना किसी वैध विधिक प्राधिकार के अपने पास रखे हुए था।
पुलिस अब इस बात की कड़ाई से जांच कर रही है कि फईम अहमद इस सिंडिकेट के मुख्य मास्टरमाइंड सतानन्द शर्मा (जो पूर्व में गिरफ्तार हो चुका है) और उसके स्थानीय एजेंटों के संपर्क में किस प्रकार आया और उसने इस अवैध कार्य के लिए कितने लाख रुपयों का लेनदेन किया था।
एसएसपी एसटीएफ की कड़ी चेतावनी: "दलाल हो या हथियार सप्लायर, कोई बख्शा नहीं जाएगा"
इस बड़ी सफलता के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ उत्तराखंड ने अपने आधिकारिक बयान में इस संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस के इरादे पूरी तरह साफ कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियारों का यह समानांतर नेटवर्क न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश की आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था तथा सार्वजनिक जनसुरक्षा के लिए एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील खतरा है।
एसएसपी एसटीएफ ने नेटवर्क से जुड़े अपराधियों को चेतावनी देते हुए निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:
- सलाखों के पीछे होगी जगह: एसटीएफ इस पूरे सिंडिकेट के अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस जांच के दायरे में आने वाले किसी भी व्यक्ति, बिचौलिए, दलाल, जाली लाइसेंस धारक, अवैध हथियार आपूर्तिकर्ता (Suppliers) अथवा कलेक्ट्रेट के किसी भी सहयोगी कर्मचारी की संलिप्तता प्रमाणित होने पर, उसे बिना किसी ढील के सीधे जेल भेजा जाएगा।
- आत्मसमर्पण का अंतिम अवसर: उन्होंने समस्त संदिग्ध अथवा जाली शस्त्र लाइसेंस धारकों से अपील और चेतावनी मिश्रित लहजे में कहा कि वे स्वयं आगे आएं और कानून के समक्ष आत्मसमर्पण करते हुए अपने शस्त्र एवं लाइसेंस एसटीएफ या जिला प्रशासन को सौंप दें। यदि वे जांच में चिन्हित होते हैं, तो उनके विरुद्ध कठोरतम विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
ऑपरेशन प्रहार: फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में अब तक की कुल प्रगति
उत्तराखंड पुलिस और एसटीएफ द्वारा राज्य की सीमाओं के भीतर राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की गई अब तक की कुल संचयी कानूनी कार्रवाइयों का विवरण इस प्रकार है:
- पंजीकृत अभियोग: इस पूरे नेक्सस को तोड़ने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों में अब तक कुल 03 अलग-अलग मूल अभियोग दर्ज किए जा चुके हैं।
- कुल गिरफ्तारियां: फईम अहमद को मिलाकर अब तक इस मामले में कुल 11 शातिर अभियुक्तों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।
- हथियारों की बरामदगी: गिरोह के सदस्यों और फर्जी लाइसेंस धारकों के पास से अब तक कुल 15 अवैध आधुनिक शस्त्र (जिसमें ऑटोमैटिक पंप एक्शन गन, राइफलें और पिस्टल शामिल हैं) जब्त किए गए हैं।
- एम्युनिशन रिकवरी: विभिन्न छापों में अब तक कुल 350 जिंदा कारतूस बरामद किए जा चुके हैं।
- दस्तावेजों की जब्ती: विभिन्न राज्यों से ट्रांसफर होकर आए भारी संख्या में संदिग्ध, जाली और भौतिक रिकॉर्ड से गायब हो चुके शस्त्र लाइसेंसों की फाइलें एसटीएफ ने अपने कब्जे में ली हैं।
केस प्रोफाइल, बरामदगी एवं गिरफ्तार
| क्र.सं. | प्रशासनिक एवं विधिक मानक (Case Metrics) | दर्ज आधिकारिक विवरण एवं आंकड़े (Official Enforcements) |
|---|---|---|
| 1. | मुख्य जांच एवं कार्रवाई एजेंसी | स्पेशल टास्क फॉर (STF) / ANTF उत्तराखण्ड, देहरादून |
| 2. | विशेष अभियान का आधिकारिक नाम | "ऑपरेशन प्रहार" (फर्जी शस्त्र लाइसेंस एवं अवैध हथियार विरोधी) |
| 3. | 11वें गिरफ्तार अभियुक्त का नाम | फईम अहमद पुत्र श्री इरशाद हुसैन (उम्र- 24 वर्ष) |
| 4. | अभियुक्त का स्थायी मूल निवास | बसई चौक, हरियावाला चौराहा, थाना कुण्डा, जनपद ऊधमसिंहनगर |
| 5. | गिरफ्तारी की तिथि एवं मुख्य स्थान | शनिवार देर रात्रि (27-28 जून 2026) | काशीपुर क्षेत्र, ऊधमसिंहनगर |
| 6. | मूल पंजीकृत मुकदमा संदर्भ | मु0अ0सं0 213/2026, धारा 318(4)/338/336(3)/340/61(2)/3(5)/111 BNS, थाना काशीपुर |
| 7. | अभियुक्त से बरामद कुल अवैध हथियार | 01 अदद सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल (.32 बोर) |
| 8. | अभियुक्त से बरामद जिंदा कारतूस | 09 अदद जिंदा कारतूस (.32 बोर) |
| 9. | फर्जी लाइसेंस का मूल जनपद संदर्भ | जनपद शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) कलेक्ट्रेट रिकॉर्ड रूम सिंडिकेट |
इस सफल दबिश कार्रवाई को अंजाम देने वाली एसटीएफ पुलिस टीम
- संयुक्त टीम नेतृत्व (निरीक्षक): निरीक्षक अरुण कुमार एवं निरीक्षक एम०पी० सिंह
- उपनिरीक्षक (SI): उ0नि0 जगदीप नेगी, उ0नि0 प्रकाश भगत
- मुख्य आरक्षी (Head Constable): हेo काo गोविन्द बिष्ट, हेo काo मोहित वर्मा
- आरक्षी (Constable): कांस्टेबल रवि बोरा
- परिवहन एवं तकनीकी विंग: हेo काo चालक संजय कुमार, हेo काo सुरेन्द्र कनवाल
