उत्तराखंड आयुष क्षेत्र में डिजिटल क्रांति: e-Aushadhi पोर्टल पर औषधि निर्माताओं को मिला क्रेडिबल प्रशिक्षण; अब ऑनलाइन जारी होंगे आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषधियों के विधिक लाइसेंस


Aapki Media AI


देहरादून, 15 जुलाई, 2026: देवभूमि उत्तराखंड को वैश्विक आयुष और हर्बल निर्माण का मुख्य केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक क्रेडिबल डिजिटल छलांग लगाई है। कार्यालय जिला सूचना अधिकारी (सू.वि.) देहरादून द्वारा जारी आधिकारिक प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, 14 जुलाई, 2026 को अपराह्न 03:00 बजे आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवा निदेशालय, उत्तराखण्ड के देहरादून स्थित मुख्य सभागार में एक उच्च स्तरीय विधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल संपादन किया गया।

 

उत्तराखंड आयुष क्षेत्र में डिजिटल क्रांति: e-Aushadhi पोर्टल पर औषधि निर्माताओं को मिला क्रेडिबल प्रशिक्षण; अब ऑनलाइन जारी होंगे आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषधियों के विधिक लाइसेंस

 


आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के कड़े निर्देशों के अनुपालन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य के समस्त आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषधि निर्माताओं तथा औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं (Drug Testing Laboratories) को केंद्र सरकार के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म e-Aushadhi.gov.in पोर्टल के संचालन और विधिक उपयोग की विस्तृत मास्टर ट्रेनिंग प्रदान करना था।


नेतृत्व और क्रियान्वयन: राज्य औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी विंग की क्रेडिबल पहल


इस महत्वपूर्ण तकनीकी और विधिक प्रशिक्षण का संचालन राज्य के शीर्ष आयुष नीति निर्धारकों द्वारा किया गया:


  1. डॉ. मिथिलेश कुमार (राज्य औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी, उत्तराखंड): उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि आयुष क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और विधिक फाइलों की लेटलतीफी को समाप्त करने के लिए यह ऑनलाइन व्यवस्था एक क्रेडिबल ब्रह्मास्त्र साबित होगी।
  2. डॉ. आलोक शुक्ला (सहायक औषधि नियंत्रक, उत्तराखंड): उन्होंने औषधि निर्माताओं और प्रयोगशालाओं के प्रतिनिधियों को पोर्टल पर लाइव डेमो देकर पंजीकरण (Registration) से लेकर लाइसेंस निर्गमन (License Issuance) तक की पूरी विधिक तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया।

 

e-Aushadhi.gov.in पोर्टल प्रशिक्षण: प्रशासनिक, विधिक एवं तकनीकी मैट्रिक्स


14 जुलाई, 2026 को देहरादून में आयोजित इस राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला के मुख्य विधिक घटकों और सांख्यिकीय उद्देश्यों का संकलन इस प्रशासनिक तालिका में प्रस्तुत है:

ई-औषधि (e-Aushadhi) डिजिटल घटकआधिकारिक विधिक नियमावली एवं पोर्टल मानक (वर्ष 2026)मुख्य नोडल प्रशासनिक अधिकारीआयुष विनिर्माण पर क्रेडिबल प्रभाव
मूल नोडल पोर्टलe-Aushadhi.gov.inआयुष मंत्रालय, भारत सरकारबिचौलियों और कागजी विसंगतियों का समूल विधिक अंत।
प्रशिक्षण का एजेंडाविनिर्माण लाइसेंस निर्गमन एवं ऑनलाइन नवीनीकरणडॉ. मिथिलेश कुमार (राज्य औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी)आवेदनों की स्थिति की 100% लाइव ट्रैकिंग और क्रेडिबल ऑडिट।
लक्षित हितधारक वर्गसमस्त औषधि निर्माता एवं परीक्षण प्रयोगशालाएंडॉ. आलोक शुक्ला (सहायक औषधि नियंत्रक)गुणवत्ता मानकों (GMP) का त्वरित और पारदर्शी विधिक अनुपालन।
क्षेत्रीय प्रशासनिक ग्रिडसमस्त जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी विंगजिला सूचना कार्यालय (देहरादून)जमीनी स्तर पर विनिर्माण इकाइयों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करना।

e-Aushadhi पोर्टल के 5 मुख्य विधिक व तकनीकी लाभ


भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए इस डिजिटल सिस्टम से उत्तराखंड के पारंपरिक औषधि क्षेत्र को निम्नलिखित क्रेडिबल प्रशासनिक लाभ प्राप्त होंगे:


  • पूर्णतः पेपरलेस लाइसेंसिंग प्रणाली: नए विनिर्माण लाइसेंस (Manufacturing License) प्राप्त करने और पुराने लाइसेंसों के विधिक नवीनीकरण (Renewal) के लिए अब भौतिक रूप से निदेशालय के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • त्रुटिहीन ऑनलाइन आवेदन (Zero-Error Application): पोर्टल पर ही दस्तावेजों की विधिक जांच (Screening) का सिस्टम मौजूद है, जिससे औषधि निर्माता गलतियां सुधार कर क्रेडिबल तरीके से आवेदन सबमिट कर सकेंगे।
  • औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का डिजिटल ग्रिड: राज्य की सभी मान्यता प्राप्त परीक्षण प्रयोगशालाएं (Testing Labs) दवाओं की गुणवत्ता रिपोर्ट ऑनलाइन ही पोर्टल पर अपलोड करेंगी, जिससे ड्रग स्टैंडर्ड्स की क्रेडिबल मॉनिटरिंग सुनिश्चित होगी।
  • समयबद्ध विधिक स्वीकृतियां (Time-Bound Clearances): पोर्टल पर आवेदन जमा होने के बाद प्रत्येक विधिक स्तर पर फाइल के निस्तारण की समय-सीमा तय की गई है, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।
  • वैश्विक व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business): ऑनलाइन डेटाबेस होने से उत्तराखंड में निर्मित होने वाली दवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात के लिए विधिक अनुमतियां प्राप्त करना बेहद सुगम हो जाएगा।

 

अधिकारियों का कड़ा निर्देश: शत-प्रतिशत डिजिटल माइग्रेशन अनिवार्य


कार्यशाला के समापन पर समस्त जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रांतर्गत (गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में) संचालित होने वाले प्रत्येक छोटे-बड़े औषधि निर्माताओं और प्रयोगशालाओं का इस पोर्टल पर विधिक माइग्रेशन सुनिश्चित कराएं। किसी भी विनिर्माण इकाई द्वारा ऑनलाइन मानकों की अवहेलना करने पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट (Drugs and Cosmetics Act) के तहत विधिक कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है। प्रशिक्षण में भारी संख्या में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर अपनी तकनीकी शंकाओं का समाधान किया।

 

आयुष क्षेत्र में 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' का जीवंत उदाहरण

 


14 जुलाई, 2026 को देहरादून में संपन्न यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्तराखंड के आयुष विनिर्माण क्षेत्र को अधिक पेशेवर, पारदर्शी और क्रेडिबल बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। डॉ. मिथिलेश कुमार और डॉ. आलोक शुक्ला के नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान 'डिजिटल इंडिया' के विज़न को धरातल पर उतारता है।


e-Aushadhi.gov.in पोर्टल के माध्यम से लाइसेंसिंग प्रक्रिया का पूर्णतः डिजिटलीकरण होने से न केवल व्यापार सुगमता बढ़ेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी प्रामाणिक और गुणवत्ता-परीक्षित आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषधियां विधिक रूप से उपलब्ध हो सकेंगी। देवभूमि की यह क्रेडिबल पहल आने वाले समय में राज्य के राजस्व और स्वास्थ्य सुशासन को एक नई और सुरक्षित ऊंचाई प्रदान करेगी।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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