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देहरादून, 3 जुलाई, 2026: भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून में 3 जुलाई, 2026 को एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस उच्च स्तरीय विधिक व प्रशासनिक वार्ता को मुख्य अतिथि के रूप में अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (दिल्ली एवं उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख जोन) श्री अजय के. मेहरा ने संबोधित किया।
प्रेस वार्ता में श्री मेहरा ने उत्तराखंड क्षेत्र में ईपीएफओ की प्रगति, ऐतिहासिक उपलब्धियों तथा हाल ही में संगठन द्वारा लागू की गई सुधारात्मक, विधिक एवं तकनीकी पहलों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक श्रम सुशासन का मुख्य उद्देश्य अंशदाताओं के 'Ease of Living' (जीवन सुगमता) को बढ़ाना तथा उनके सेवानिवृत्ति कोष को विधिक रूप से अधिक सुरक्षित व लाभकारी बनाना है। उत्तराखंड में वर्तमान में 9,744 अंशदायी प्रतिष्ठान (Contributing Establishments) सक्रिय हैं, जिनसे कुल 7,74,377 अंशदायी सदस्य विधिक रूप से जुड़कर सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
'संवेदना' सेल की ऐतिहासिक विधिक सफलता: अब पूरे जोन में लागू होगा देहरादून का मानवीय मॉडल
अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून के प्रशासनिक नवाचार की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए विशेष रूप से "संवेदना" सेल के विधिक प्रभावों को रेखांकित किया।
- उद्देश्य और संवेदनशीलता: यह सेल क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून द्वारा स्थापित एक अत्यंत संवेदनशील विधिक इकाई है। इसका एकमात्र उद्देश्य कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) तथा कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) के अंतर्गत प्राप्त होने वाले मृत्यु दावों (Death Claims) का त्वरित, त्रुटिरहित और मानवीय संवेदनाओं के साथ समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना है।
- विधिक विकेंद्रीकरण: किसी श्रमिक की मृत्यु के पश्चात उसके आश्रितों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए "संवेदना" मॉडल को अब दिल्ली, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण जोन में कड़ाई से लागू किया जाएगा, जो प्रशासनिक सुशासन की एक क्रेडिबल मिसाल है।
उत्तराखंड ईपीएफओ सुशासन: संगठनात्मक डेटाबेस एवं योजना परिव्यय मैट्रिक्स
3 जुलाई, 2026 को जारी आधिकारिक विधिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड क्षेत्र की प्रगति और राष्ट्रीय रोजगार योजनाओं का प्रामाणिक विवरण इस तालिका में संकलित है:
| प्रशासनिक एवं योजनागत घटक | ग्राउंड जीरो आधिकारिक सांख्यिकी (वर्ष 2026) | विधिक एवं सामाजिक सुरक्षा प्रभाव |
| कुल अंशदायी प्रतिष्ठान (कंपनियां) | 9,744 प्रतिष्ठान | उत्तराखंड के भीतर ईपीएफओ के दायरे में आने वाले कुल पंजीकृत उद्योग/संस्थान। |
| कुल सक्रिय अंशदायी सदस्य | 7,74,377 श्रमिक / कर्मचारी | भविष्य निधि और पेंशन सुरक्षा का प्रत्यक्ष लाभ पाने वाले कुल नागरिक। |
| प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) | ₹99,446 करोड़ कुल वित्तीय परिव्यय | दो वर्षों में देश के भीतर 3.5 करोड़ से अधिक नए रोजगार सृजित करने का राष्ट्रीय लक्ष्य। |
| प्रथम बार कार्यबल में प्रवेशकर्ता युवा | 1.92 करोड़ नए युवा कर्मचारी | विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) को विशेष विधिक प्रोत्साहन व सब्सिडी। |
| लंबित EDLI प्रकरण का विलोपन | वेल्हम बॉयज़ स्कूल, देहरादून | प्राचार्य सुश्री संगीता कैन को विधिक 'EDLI Exemption Order' प्रदान किया गया। |
ईपीएफ आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) नियमों का उदारीकरण: 13 जटिल नियमों का विलोपन
कर्मचारियों को उनकी गंभीर पारिवारिक और सामाजिक आवश्यकताओं के समय उनके ही पैसे आसानी से उपलब्ध कराने के लिए ईपीएफओ ने अपने विधिक ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव किया है। श्री अजय के. मेहरा ने बताया कि संगठन ने 13 पुराने और जटिल प्रावधानों को आपस में समाहित (Consolidate) कर एक अत्यंत सरल, सुव्यवस्थित और एकीकृत नियमावली लागू कर दी है:
- तीन विशिष्ट श्रेणियां: अब सभी प्रकार की आंशिक निकासी (Advance) को केवल तीन व्यावहारिक श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है — 1. आवश्यक आवश्यकताएं (Emergency/Medical), 2. आवास संबंधी आवश्यकताएं (Housing/Land), और 3. विशेष परिस्थितियां।
- शिक्षा एवं विवाह हेतु ऐतिहासिक रियायत: नए विधिक नियमों के तहत अब कोई भी सदस्य बच्चों की उच्च शिक्षा हेतु अपने सेवाकाल में कुल 10 बार तथा स्वयं या बच्चों के विवाह हेतु कुल 5 बार आंशिक निकासी कर सकता है। उल्लेखनीय है कि पूर्व के कठोर नियमों में इन दोनों उद्देश्यों को मिलाकर केवल तीन बार ही निकासी की अनुमति थी।
- न्यूनतम सेवा अवधि में कटौती: सभी प्रकार की आंशिक निकासी के लिए आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि (Minimum Service Tenure) को घटाकर मात्र 12 माह (1 वर्ष) कर दिया गया है।
- सेवानिवृत्ति कोष की विधिक सुरक्षा: आंशिक निकासी के बावजूद सदस्यों के कुल अंशदान का 25 प्रतिशत न्यूनतम शेष राशि (Minimum Balance) के रूप में खाते में अनिवार्य रूप से बनाए रखने का प्रावधान किया गया है। इसका विधिक लाभ यह होगा कि सदस्यों का चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) का बड़ा नुकसान नहीं होगा और वे सुदृढ़ सेवानिवृत्ति कोष (Retirement Corpus) का निर्माण कर सकेंगे।
ईपीएफ आंशिक निकासी (EPF Advance): पुराने नियमों बनाम नवीन विधिक प्रावधानों का तुलनात्मक चार्ट
13 जटिल प्रावधानों को समाप्त कर लागू किए गए नए सरल नियमों का विधिक तुलनात्मक विवरण नीचे तालिका में सुव्यवस्थित है:
| निकासी का विधिक उद्देश्य / मापदंड | पुराने विधिक नियम व सीमाएं | नए सुव्यवस्थित नियम (3 जुलाई, 2026 से प्रभावी) | 'Ease of Living' नीतिगत सुशासन प्रभाव |
| शिक्षा हेतु आंशिक निकासी | कुल सेवाकाल में सीमित अवसर | अधिकतम 10 बार निकासी की विधिक अनुमति। | बच्चों की उच्च शिक्षा और तकनीकी कोर्सेज के लिए तत्काल वित्तीय उपलब्धता। |
| विवाह हेतु आंशिक निकासी | शिक्षा के साथ संयुक्त रूप से केवल 3 बार | अधिकतम 5 बार निकासी की विधिक अनुमति। | परिवार के सामाजिक उत्तरदायित्वों को बिना कर्ज लिए पूरा करने की सुविधा। |
| आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि | विभिन्न श्रेणियों के लिए कई वर्ष अनिवार्य | मात्र 12 माह (1 वर्ष) की न्यूनतम सेवा अवधि। | नए कर्मचारियों को भी आपातकाल में अपने फंड के उपयोग का विधिक अधिकार। |
| खाते में अनिवार्य न्यूनतम शेष | कोई कड़ा एकीकृत नियम नहीं था | कुल अंशदान का 25% शेष रखना अनिवार्य | उच्च ब्याज दर (High Interest Rate) का निरंतर लाभ और सुरक्षित सेवानिवृत्ति भविष्य। |
CITES प्रणाली: ईपीएफओ का अत्याधुनिक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल ईको-सिस्टम
श्रम और रोजगार मंत्रालय के सुशासन विज़न के अंतर्गत तकनीकी रीढ़ के रूप में विकसित CITES (Centralised IT Enabled System) की विधिक कार्यप्रणाली पर भी प्रकाश डाला गया।
यह प्रणाली दावों के स्वचालन (Automation) और सरलीकरण की दिशा में एक युगांतकारी कदम है। इसके लागू होने से अब दावों के निपटान में मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम हो गया है, जिससे भ्रष्टाचार और क्लिनिकल देरी की संभावनाएं समाप्त हो गई हैं। CITES प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, पीएफ दावों का सीधे बैंक खातों में त्वरित ट्रांसफर और दशकों पुराने लंबित पड़े मामलों का वन-क्लिक विधिक समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।
प्रेस वार्ता के अंत में क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-I श्री वी.वी.बी. सिंह, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-II श्री उदित साह, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-II श्री मोहम्मद जैद, सहायक भविष्य निधि आयुक्त श्री संतोष कुमार तथा श्री राजेश कुमार सहित जोन के अन्य विधिक अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने फील्ड स्तर पर इन नियमों को कड़ाई से लागू करने की विधिक प्रतिबद्धता दोहराई।
ईपीएफओ सुशासन और त्वरित रिस्पांस ग्रिड के 4 मुख्य नीतिगत स्तंभ
कर्मचारियों के वित्तीय अधिकारों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय द्वारा निम्नलिखित चार नीतिगत स्तंभों पर कड़ा पहरा बिठाया गया है:
- मृत्यु दावों का शत-प्रतिशत त्रुटिरहित निस्तारण: "संवेदना" सेल के माध्यम से मृत कर्मचारी के परिवार को EDLI और आश्रित पेंशन का लाभ बिना किसी विधिक अड़चन के तत्काल प्रदान करना।
- डिजिटल पारदर्शिता (Transparency): CITES के तहत हर दावे की लाइव ट्रैकिंग और उमंग (UMANG) मोबाइल ऐप के माध्यम से सदस्य को पल-पल की डिजिटल सूचना देना।
- नियोक्ताओं (Employers) की विधिक जवाबदेही: 9,744 अंशदायी प्रतिष्ठानों द्वारा कर्मचारियों के वेतन से काटे गए पीएफ अंशदान को समय पर ईपीएफओ ट्रस्ट में जमा कराने की निरंतर विधिक मॉनिटरिंग।
- उच्च ब्याज सुरक्षा और सुदृढ़ कोष: 25% अनिवार्य बैलेंस नियम के जरिए श्रमिकों को सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना।
सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत का क्रेडिबल रिस्पांस
3 जुलाई, 2026 को ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून से जारी यह विधिक और प्रशासनिक सुधारों का खाका इस बात की स्पष्ट संपुष्टि करता है कि देश का श्रम प्रशासन अब कागजी लालफीताशाही से बाहर निकलकर पूर्णतः डिजिटल और मानवीय दृष्टिकोण अपना चुका है।
उत्तराखंड के 7.74 लाख से अधिक कामकाजी नागरिकों के लिए आंशिक निकासी नियमों का यह उदारीकरण किसी बड़े उपहार से कम नहीं है। शिक्षा के लिए 10 बार और शादी के लिए 5 बार पैसे निकालने की विधिक छूट देना और न्यूनतम सेवाकाल को घटाकर केवल एक वर्ष करना, सीधे तौर पर श्रमिक वर्ग के आर्थिक लोकतंत्रीकरण को दर्शाता है। CITES जैसी केंद्रीकृत तकनीकों और "संवेदना" जैसे करुणा-आधारित विधिक मॉडलों के समन्वय से ईपीएफओ ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह विकसित भारत की यात्रा में देश के कार्यबल को सामाजिक सुरक्षा का सबसे मजबूत और क्रेडिबल विधिक कवच प्रदान करने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है।
