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देहरादून, 3 जुलाई, 2026: भारतीय निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में उत्तराखंड के भीतर चुनावी व्यवस्था को पूरी तरह त्रुटिहीन, पारदर्शी और डिजिटल रूप से क्रेडिबल (Credible) बनाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी ने युद्धस्तर पर अभियान छेड़ दिया है। प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के संबंध में शुक्रवार, 3 जुलाई, 2026 को अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने सचिवालय सभागार में राज्य के समस्त मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दलों के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च स्तरीय विधिक समन्वय बैठक की।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची (Electoral Roll) को शत-प्रतिशत शुद्ध बनाना तथा फर्जी या दोहरे पंजीकरण को समाप्त करने के विधिक उपायों पर चर्चा करना था। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनैतिक दलों को अवगत कराया कि उत्तराखंड राज्य में 1 जुलाई, 2026 की अर्हता तिथि (Qualifying Date) के विधिक आधार पर एसआईआर प्रक्रिया को संपन्न किया जा रहा है। 8 जून से 7 जुलाई, 2026 तक प्रदेश में गणना पत्रों के घर-घर वितरण और उनके शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण किया जाना विधिक रूप से सुनिश्चित किया गया है।
सांख्यिकीय विश्लेषण: 71 लाख मतदाताओं का डिजिटाइजेशन और 'अनकलेक्टेड श्रेणी' का वृहद वर्गीकरण
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बैठक में राज्य का आधिकारिक चुनावी डेटा प्रस्तुत किया। प्रदेश में कुल 79,60,762 संभावित मतदाताओं के सापेक्ष अब तक 70,98,501 मतदाताओं के फॉर्म डिजिटल डेटाबेस में दर्ज (Digitize) कर दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न श्रेणियों को मिलाकर कुल 79,45,658 मतदाताओं के रिकॉर्ड्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रबंधित किया जा चुका है।
इस पुनरीक्षण अभियान की सबसे बड़ी खोजी विधिक सफलता यह है कि प्रशासन ने 8,39,486 मतदाताओं को ”अनकलेक्टेड श्रेणी” (Uncollected Category) में चिन्हित किया है। ये वे मतदाता हैं जो या तो अपने मूल विधिक निवास स्थान पर नहीं रह रहे हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। चुनाव आयोग ने राजनैतिक दलों से इन अनकलेक्टेड मतदाताओं के घर-घर जाकर किए जा रहे भौतिक सत्यापन (Physical Verification) अभियान में सक्रिय सहयोग देने की विधिक अपील की है।
उत्तराखंड विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026: 'अनकलेक्टेड श्रेणी' के मतदाताओं का विधिक वर्गीकरण
वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण के दौरान चिन्हित किए गए 8.39 लाख अनकलेक्टेड मतदाताओं के श्रेणीवार आधिकारिक प्रशासनिक आंकड़े इस तालिका में सुव्यवस्थित हैं:
| क्र. सं. | अनकलेक्टेड मतदाता की विधिक उप-श्रेणी | मतदाताओं की कुल संख्या | प्रशासनिक एवं विधिक विलोपन/संशोधन नियम |
| 01 | मृत मतदाता (Deceased Voters) | 1,23,836 | मृत्यु प्रमाण पत्र एवं विधिक पंचनामे के आधार पर नाम सूची से हटाया जाएगा। |
| 02 | स्थाई रूप से शिफ्ट (Permanently Shifted) | 4,77,148 | उत्तराखंड से बाहर या अन्य विधानसभा में विधिक प्रवास करने वाले नागरिक। |
| 03 | अनुपस्थित मतदाता (Absentee Voters) | 1,68,259 | सत्यापन के समय अपने मूल विधिक आवास पर अनुपलब्ध पाए गए नागरिक। |
| 04 | पहले से पंजीकृत (Already Registered) | 61,764 | दोहरे पंजीकरण (Duplicate Voting Identity) के विधिक दायरे में आने वाले मामले। |
| 05 | अन्य विविध कारण (Other Technical Reasons) | 8,479 | तकनीकी त्रुटि या विधिक पहचान दस्तावेजों में विसंगति वाले मतदाता। |
| कुल | संपूर्ण अनकलेक्टेड डेटाबेस | 8,39,486 | भौतिक सत्यापन के पश्चात मतदाता सूची के शुद्धिकरण का मुख्य आधार। |
महत्वपूर्ण समय-सारणी: ड्राफ्ट रोल के प्रकाशन से लेकर अंतिम सूची तक का विधिक कैलेंडर
लोकतांत्रिक सुशासन को समयबद्ध बनाए रखने के लिए अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एसआईआर प्रक्रिया की आगामी वैधानिक तिथियों की घोषणा की है, जिसका अनुपालन सभी दलों और नागरिकों को करना होगा:
- 14 जुलाई, 2026: इस तिथि को संपूर्ण उत्तराखंड में ड्राफ्ट रोल (प्रारूप मतदाता सूची) का आधिकारिक विधिक प्रकाशन कर दिया जाएगा।
- 14 जुलाई से 13 अगस्त, 2026: इस एक माह की विधिक अवधि के भीतर कोई भी नागरिक या राजनैतिक दल सूची पर अपने दावे एवं आपत्तियां (Claims and Objections) दर्ज करा सकता है। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम छूटा है, तो वह फॉर्म-6 के माध्यम से विधिक आवेदन कर सकता है।
- 14 जुलाई से 11 सितंबर, 2026: यह नोटिस की वैधानिक अवधि होगी, जिसके अंतर्गत निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) द्वारा सभी दावों और आपत्तियों का विधिक निस्तारण (Disposal) किया जाएगा।
- 15 सितंबर, 2026: इस ऐतिहासिक तिथि को उत्तराखंड की अंतिम शुद्ध मतदाता सूची (Final Electoral Roll) का विधिक प्रकाशन कर दिया जाएगा, जो आगामी चुनावों का वैधानिक आधार बनेगी।
मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026: आगामी विधिक तिथियां एवं प्रशासनिक मील के पत्थर
| विधिक प्रक्रिया / मील का पत्थर | निर्धारित समय-सीमा (वर्ष 2026) | लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत विधिक महत्व |
| गणना पत्रों का वितरण व डिजिटाइजेशन | 8 जून से 7 जुलाई, 2026 | बीएलओ (BLO) द्वारा घर-घर जाकर डेटा संकलन की अंतिम विधिक अवधि। |
| ड्राफ्ट रोल (प्रारूप सूची) का प्रकाशन | 14 जुलाई, 2026 | जनता के अवलोकन और आपत्तियों के लिए पहली बार सूची सार्वजनिक होगी। |
| दावे एवं आपत्तियां दर्ज करने की अवधि | 14 जुलाई से 13 अगस्त, 2026 | छूटे हुए पात्र नामों को जोड़ने और अपात्र नामों को हटाने की विधिक अवधि। |
| दावे-आपत्तियों का अंतिम विधिक निस्तारण | 14 जुलाई से 11 सितंबर, 2026 | अर्धन्यायिक प्रक्रिया के तहत डेटाबेस का विधिक शुद्धिकरण। |
| अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन | 15 सितंबर, 2026 | आगामी लोकतांत्रिक निर्वाचनों के लिए एकमात्र क्रेडिबल विधिक दस्तावेज। |
बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) की रिकॉर्ड तैनाती: राजनैतिक दलों का संगठनात्मक विधिक समन्वय
चुनाव को पारदर्शी बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त दलों से प्रत्येक पोलिंग बूथ पर शत-प्रतिशत बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) नियुक्त करने की विधिक अपील की थी। डॉ. जोगदंडे ने बताया कि वर्तमान में उत्तराखंड में कुल 11,733 पोलिंग बूथ चिन्हित हैं। इसके सापेक्ष विभिन्न राजनैतिक दलों द्वारा अत्यधिक तत्परता दिखाते हुए 23,102 बीएलए की तैनाती धरातल पर कर दी गई है, जो लोकतंत्र के प्रति दलों की जवाबदेही को दर्शाता है।
इस सर्वदलीय विधिक बैठक में उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री किशन सिंह नेगी, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री मस्तू दास सहित राष्ट्रीय दलों के प्रमुख विधिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे:
- भारतीय जनता पार्टी (BJP) से श्री राजकुमार पुरोहित
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) से श्री अमरेंद्र बिष्ट
- आम आदमी पार्टी (AAP) से श्री श्याम बाबू पांडेय
- बहुजन समाज पार्टी (BSP) से श्री सत्यपाल
- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी (CPI-M) से श्री अनंत आकाश
चुनावी शुद्धिकरण और निष्पक्ष मतदान के 4 मुख्य नीतिगत स्तंभ
उत्तराखंड के निर्वाचन तंत्र को अभेद्य और आधुनिक बनाने के लिए आयोग निम्नलिखित चार नीतिगत स्तंभों पर कार्य कर रहा है:
- दोहरे विधिक पंजीकरण (De-duplication) पर रोक: राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP) के सॉफ्टवेयर द्वारा एक ही मतदाता के दो अलग-अलग बूथों या राज्यों में पंजीकरण को तकनीकी रूप से पकड़कर निरस्त करना।
- मृत एवं विस्थापित नागरिकों का विधिक विलोपन: 1.23 लाख मृत और 4.77 लाख स्थाई रूप से शिफ्ट हो चुके नागरिकों के नामों को हटाकर बोगस वोटिंग (Bogus Voting) की संभावना को पूर्णतः शून्य करना।
- पारदर्शी अर्धन्यायिक निस्तारण: दावे और आपत्तियों के निस्तारण के समय संबंधित नागरिक को सुनवाई का विधिक अवसर देना, ताकि किसी भी वास्तविक और वैध नागरिक का मताधिकार न छीने।
- राजनैतिक दलों के साथ निरंतर क्रेडिबल संवाद: चुनाव से जुड़े हर बड़े तकनीकी या प्रशासनिक निर्णय में सर्वदलीय सहमति और पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
त्रुटिहीन मतदाता सूची ही जीवंत लोकतंत्र की विधिक कसौटी
3 जुलाई, 2026 को सचिवालय देहरादून में संपन्न हुई यह सर्वदलीय विधिक बैठक उत्तराखंड में चुनावी सुशासन (Electoral Governance) की दिशा में एक क्रेडिबल और मील का पत्थर निर्णय है।
लगभग 8.39 लाख मतदाताओं को अनकलेक्टेड श्रेणी में चिन्हित कर उनका शुद्धिकरण करना यह प्रमाणित करता है कि निर्वाचन आयोग चुनाव की घोषणा से पूर्व ही अपने डेटाबेस को कितना चुस्त-दुरुस्त रखना चाहता है। डॉ. विजय कुमार जोगदंडे द्वारा जारी की गई 14 जुलाई से 15 सितंबर की विधिक समय-सारणी राज्य के प्रत्येक जागरूक नागरिक के लिए एक विधिक आमंत्रण है कि वे अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी को समझें। राजनैतिक दलों द्वारा 23 हजार से अधिक बीएलए की नियुक्ति यह सुनिश्चित करेगी कि आने वाले समय में देवभूमि के भीतर होने वाला प्रत्येक मतदान पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक आदर्शों के अनुकूल संपन्न हो सके।
