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हरिद्वार: भारत की वित्तीय संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने, नकली मुद्रा (Fake Indian Currency Notes - FICN) के सिंडिकेट को ध्वस्त करने और देश की अर्थव्यवस्था को अपूरणीय क्षति पहुंचाने वाले राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ हरिद्वार पुलिस ने एक और ऐतिहासिक विधिक व सामरिक सफलता अर्जित की है। जनपद के श्यामपुर थाना पुलिस ने बीते शनिवार को 52,500 रुपये के जाली नोटों के साथ तीन आरोपियों की विधिक गिरफ्तारी के बाद, इस संगठित गिरोह की जड़ों को खोदते हुए सोमवार को एक और अत्यंत बड़ी और निर्णायक दंडात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) हरिद्वार के कुशल विधिक मार्गदर्शन में संचालित इस विशेष अभियान के तहत, पुलिस ने एक खुफिया सूचना के आधार पर कार सवार अपराधियों को घेरकर दबोचा, जो जाली नोट छापने के आधुनिक उपकरणों और छपे हुए अधकटे नोटों को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के बड़ापुर, बिजनौर की ओर भागने की फिराक में थे। पुलिस कार्यपालिका ने इस पूरे नेटवर्क को 'संगठित अपराध गिरोह' (Organized Crime Syndicate) घोषित करते हुए इसके विधिक दमन की प्रक्रिया तेज कर दी है।
लालढांग तिराहे पर विधिक घेराबंदी: कार से बरामद हुए जाली नोट, लैपटॉप और छपाई की आधुनिक पेपरशीट
सोमवार को श्यामपुर पुलिस की खुफिया विंग को रीयल-टाइम इनपुट प्राप्त हुआ कि जाली नोट नेटवर्क के मुख्य संचालक अपने अवैध कारखाने को समेटकर उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने वाले हैं।
- त्वरित घेराबंदी: सूचना की संवेदनशीलता को देखते हुए एसएसपी हरिद्वार के निर्देश पर पुलिस टीम ने तत्काल लालढांग तिराहे के पास सामरिक नाकेबंदी (Barricading) की। संदेह के आधार पर एक निर्दिष्ट कार को रोककर जब उसकी विधिक तलाशी ली गई, तो पुलिस टीम दंग रह गई।
- बरामदगी की विधिक सूची: कार के भीतर से पुलिस ने 3 मुख्य आरोपियों को हिरासत में लिया। उनके कब्जे से जाली नोट बनाने में प्रयुक्त होने वाला 01 आधुनिक लैपटॉप, 02 हाई-डेफिनिशन कलर प्रिंटर, 4 असली नोट (500-500 रुपये के, जिनका उपयोग मास्टर कॉपी के रूप में किया जाता था) और 25 विशेष पेपरशीट बरामद की गईं। इस पेपरशीट पर करीब 50 हजार रुपये मूल्य के जाली नोट पहले से ही प्रिंट थे, जिनकी विधिक कटिंग (Finishing) की जानी शेष थी।
हरिद्वार जाली नोट सिंडिकेट पर्दाफाश: प्रशासनिक, तकनीकी एवं बरामदगी सांख्यिकी आख्या
इस संगठित देशविरोधी नेटवर्क के अपराधियों की कार्यप्रणाली, बरामद तकनीकी उपकरणों और पुलिस की विधिक आख्या का प्रामाणिक डेटा इस तालिका में संकलित है:
| विधिक एवं आपराधिक जांच घटक | ग्राउंड जीरो आधिकारिक प्रशासनिक डेटा (1 जुलाई, 2026) | वित्तीय अपराध निवारण एवं तकनीकी जांच का प्रभाव |
| मुख्य नोडल थाना एवं क्षेत्र | कोतवाली श्यामपुर, जनपद हरिद्वार (उत्तराखंड)। | राष्ट्रीय वित्तीय अपराध डेटाबेस (FICN Tracking) में केस दर्ज। |
| ताजा गिरफ्तारी का विशिष्ट स्थल | लालढांग तिराहा, बिजनौर-उत्तर प्रदेश सीमा मार्ग। | अंतर्राज्यीय तस्कर रूटों पर जिला पुलिस की विधिक नाकेबंदी की जीत। |
| पूर्व एवं वर्तमान बरामदगी मूल्य | शनिवार को ₹52,500 + सोमवार को ₹50,000 (अधकटे नोट शीट)। | कुल ₹1,02,500 से अधिक की प्रत्यक्ष जाली मुद्रा बाजार में जाने से रोकी गई। |
| जब्त तकनीकी अवसंरचना | 01 लैपटॉप, 02 कलर प्रिंटर, 25 विशेष पेपरशीट। | आरोपियों द्वारा प्रयुक्त साइबर उपकरणों की फॉरेंसिक लैब (FSL) जांच शुरू। |
| मास्टर कॉपी करेंसी नोट | ₹500 के 4 असली नोट (फोटो एवं स्कैनिंग हेतु प्रयुक्त)। | असली नोटों के सुरक्षा धागों (Security Threads) की जालसाजी का प्रयास। |
| मुख्य जांच विधिक गाइड | श्रीमती निशा यादव, पुलिस अधीक्षक (SP) क्राइम, हरिद्वार। | संगठित अपराध धाराओं (BNS) के तहत गिरोह चार्ट तैयार करने का निर्देश। |
| आरोपियों का पूर्व क्राइम रिकॉर्ड | वन कर्मियों से मारपीट एवं श्यामपुर में पूर्व उपद्रव। | अपराधियों के हिंसक और संगठित सिंडिकेट होने की विधिक संपुष्टि। |
आपराधिक कार्यप्रणाली (Modus Operandi): ऑनलाइन पेपर डिलीवरी और हाई-टेक ऐप्स से नोटों की क्लोनिंग
एसपी क्राइम निशा यादव के निर्देशन में हुई गहन विधिक पूछताछ के दौरान इस गिरोह की चौंकाने वाली और अत्यधिक तकनीकी कार्यप्रणाली (Modus Operandi) का पर्दाफाश हुआ है, जिसने पुलिस और साइबर विशेषज्ञों को भी चिंता में डाल दिया है:
- ई-कॉमर्स से पेपर की विधिक तस्करी: गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड आरोपी गुलजार ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की मदद से विशेष प्रकार का 'नोट छापने वाला नॉन-रिफ्लेक्टिव पेपर' मंगवाता था, जो छूने में हुबहू असली भारतीय मुद्रा जैसा महसूस होता था।
- सॉफ्टवेयर और ऐप्स से एन्हांसमेंट: इसके बाद आरोपी शगुन जोशी असली 500 रुपये के नोट की हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीर खींचता था और एडवांस्ड ग्राफिक ऐप्स व डिजिटल सॉफ्टवेयर की मदद से उसकी इमेज क्वालिटी, वॉटरमार्क और सीरियल नंबरों की विधिक तीक्ष्णता को बढ़ाता था, ताकि प्रिंट होने पर आम नागरिक या छोटे दुकानदार असली-नकली का भेद न कर सकें।
- बिजनौर से उत्तराखंड तक नेटवर्क का विस्तार: आरोपी देवेंद्र ने स्वीकार किया कि इससे पहले उसने और गुलजार ने मिलकर उत्तर प्रदेश के बड़ापुर (बिजनौर) में 1 लाख रुपये के नकली नोट छापे थे, जिसमें से 40 हजार रुपये के नोट प्रिंटिंग की खराबी के कारण नष्ट कर दिए गए थे, लेकिन करीब 60 हजार रुपये के जाली नोट वे बाजार में खपा चुके हैं। मुनाफा बढ़ते ही उन्होंने देवेंद्र के जीजा शिवम और शगुन जोशी को शामिल कर सिंडिकेट का विस्तार किया।
अर्थव्यवस्था की सुरक्षा और जाली नोट सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने के 4 मुख्य विधिक स्तंभ
हरिद्वार पुलिस और खुफिया एजेन्सियों के साझा रोडमैप के अनुसार, इस अंतर्राज्यीय नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए निम्नलिखित चार विधिक स्तंभों पर कार्य किया जा रहा है:
- BNS की जाली मुद्रा धाराओं के तहत कठोरतम चार्जशीट: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की नई जाली नोट धाराओं के तहत आरोपियों के खिलाफ बिना किसी विधिक ढील के 90 दिनों के भीतर कोर्ट में ठोस वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ चार्जशीट दाखिल करना।
- बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की विधिक जांच: ऑनलाइन पेपर सप्लाई करने वाली डिजिटल कंपनियों को विधिक नोटिस जारी कर यह पता लगाना कि गुलजार ने किस अकाउंट से और कितनी बार यह पेपर मंगाया, साथ ही बिजनौर के उन सर्राफा व किराना व्यापारियों को चिन्हित करना जहां ₹60,000 चलाए गए।
- गैंगस्टर एक्ट और संपत्ति ज़ब्ती की विधिक प्रक्रिया: इस नेटवर्क को एक संगठित वित्तीय अपराध सिंडिकेट मानते हुए इसके सभी सदस्यों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट लागू करना तथा अवैध जाली नोटों की कमाई से अर्जित चल-अचल संपत्तियों को कुर्क (Seize) करना।
- व्यापारिक क्षेत्रों में 'फेक करेंसी डिटेक्शन' अभियान: सावन कांवड़ मेले और पर्यटन सीजन को देखते हुए हरिद्वार के तीर्थ क्षेत्रों, ढाबों और हाट बाजारों के व्यापारियों को असली-नकली नोटों की पहचान करने हेतु विशेष पुलिस विंग द्वारा जागरूक करना।
वित्तीय आतंकवाद के विरुद्ध उत्तराखंड पुलिस की जीरो-टॉलरेंस नीति
1 जुलाई, 2026 को एसपी क्राइम निशा यादव और श्यामपुर थाना पुलिस की संयुक्त विधिक आख्या इस कड़वे सच को उजागर करती है कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल ऐप्स का दुरुपयोग अब पारंपरिक अपराधी देश की वित्तीय रीढ़ को तोड़ने के लिए कर रहे हैं।
गुलजार, शगुन, देवेंद्र और शिवम जैसे शातिर अपराधियों द्वारा ऑनलाइन पेपर मंगाकर असली नोटों की डिजिटल क्लोनिंग करना एक अत्यंत गंभीर श्रेणी का वित्तीय अपराध है। लालढांग तिराहे पर लैपटॉप और अधकटे नोटों की शीट के साथ इनकी रंगे हाथों गिरफ्तारी करके हरिद्वार पुलिस ने देश के भीतर सक्रिय एक बड़े वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। एसएसपी हरिद्वार की यह त्वरित और कूटनीतिक पुलिसिंग यह सिद्ध करती है कि देवभूमि में कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संगठित गिरोह का विधिक अंत केवल और केवल सलाखें हैं।
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