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नरेंद्रनगर (टिहरी गढ़वाल)। उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों द्वारा अपने विधिक व सामाजिक अधिकारों के साथ-साथ पर्यावरणीय चेतना को जोड़ने का एक अनूठा प्रयास सामने आया है। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा (National Old Pension Restoration United Front - NOPRUF), ब्लॉक नरेंद्रनगर (जनपद टिहरी गढ़वाल) के बैनर तले रविवार, 12 जुलाई 2026 को “एक पेड़ पुरानी पेंशन बहाली (OPS) के नाम” अभियान का सफलतापूर्वक और व्यापक स्तर पर आयोजन किया गया।
इस विशेष अभियान के अंतर्गत नरेंद्रनगर विकासखंड के विभिन्न राजकीय विद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और विभागीय परिसरों में तैनात शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और विभिन्न संवर्गों के कार्मिकों ने सामूहिक रूप से बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। इस दौरान विभिन्न औषधीय, छायादार और फलदार पौधों का रोपण कर जहाँ एक ओर पर्यावरण संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में अपना योगदान दिया गया, वहीं दूसरी ओर देश व प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) को पुनः लागू करने की मांग के प्रति अपनी दृढ़ विधिक और सांगठनिक प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया गया।
सांगठनिक मजबूती और संकल्प का प्रतीक है यह हरित अभियान: ब्लॉक अध्यक्ष प्रवीण सिंह पंवार
अभियान के मुख्य सूत्रधार और राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा (NOPRUF), नरेंद्रनगर के ब्लॉक अध्यक्ष श्री प्रवीण सिंह पंवार ने पौधारोपण कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए उपस्थित शिक्षक समाज और कार्मिकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि "एक पेड़ पुरानी पेंशन बहाली के नाम" अभियान केवल एक प्रतीकात्मक पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम या सामान्य वृक्षारोपण मात्र नहीं है। वास्तव में, यह अभियान प्रदेश के समस्त कर्मचारियों की अटूट एकजुटता, सांगठनिक शक्ति, लोकतांत्रिक मूल्यों और बुढ़ापे के विधिक सहारे यानी पुरानी पेंशन को वापस पाने के अटूट संकल्प का एक जीवंत प्रतीक है।
ब्लॉक अध्यक्ष ने अपने संबोधन में शिक्षकों और कर्मचारियों से निम्नलिखित अपीलें कीं:
- सतत पर्यावरण संरक्षण: केवल पौधा लगाना ही हमारा लक्ष्य नहीं होना चाहिए; प्रत्येक शिक्षक और कर्मचारी का यह नैतिक दायित्व है कि वे लगाए गए पौधों के पूर्ण संरक्षण, सिंचाई और उनकी जीवित रहने की दर (Survival Rate) सुनिश्चित करने के लिए नियमित देखभाल करें।
- आंदोलन को वैचारिक धार देना: जिस प्रकार एक पौधा धीरे-धीरे वटवृक्ष बनता है, उसी प्रकार कर्मचारियों को अपनी सांगठनिक इकाइयों को जमीनी स्तर पर सींचना होगा, ताकि पुरानी पेंशन बहाली के इस लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन को और अधिक सशक्त तथा नीतिगत रूप से मजबूत बनाया जा सके।
- जनचेतना का प्रसार: विद्यालयों और समाज के बीच जाकर पुरानी पेंशन के आर्थिक और सामाजिक लाभों के प्रति आमजन को भी जागरूक किया जाए, क्योंकि यह सीधे तौर पर राष्ट्र के निर्माण में जीवन खपाने वाले कर्मचारियों के स्वाभिमान से जुड़ा विषय है।
विभिन्न विद्यालयों में व्यापक वृक्षारोपण: शिक्षकों और कार्मिकों ने प्रदर्शित की एकजुटता
नरेंद्रनगर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले विभिन्न संकुलों (Clusters) और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यालयों में भी इस अभियान का व्यापक असर देखने को मिला। अवकाश के दिन भी कर्मचारियों ने स्वेच्छा से आगे आकर अपने-अपने कार्यक्षेत्रों के आस-पास हरित पट्टियों का निर्माण किया। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सरकारी कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति के बाद की सामाजिक सुरक्षा (Social Security), दोनों ही सीधे तौर पर व्यापक जनहित और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़े हुए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। संगठन इन दोनों ही मोर्चों पर अपनी सामाजिक और विधिक जिम्मेदारियों को समझते हुए निरंतर धरातल पर कार्य करता रहेगा।
इस अभियान के दौरान पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन को और अधिक धारदार, वैचारिक और संगठित बनाने के लिए सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में अपनी हुंकार भरी और संकल्प पत्र को दोहराया।
जनहित के विषयों पर निरंतर कार्य करने का सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के समापन सत्र में उपस्थित श्रीमती राजेश्वरी पंवार, प्रवीन पंचपुरी समेत सभी शिक्षक-कर्मचारियों और मोर्चा के पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से रोपे गए पौधों की सुरक्षा के लिए विधिक और व्यावहारिक घेराबंदी (Fencing) करने तथा उनके पल्लवित होने तक निरंतर मॉनिटरिंग करने की शपथ ली। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा केवल वित्तीय लाभ का नहीं है, बल्कि यह लोक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की उस अवधारणा को मजबूत करता है जहाँ अपने जीवन के 30 से 35 वर्ष राजकीय सेवा में देने वाले कर्मचारी को वृद्धावस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का विधिक अधिकार प्राप्त होता है।
सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में इस बात पर भी बल दिया कि आने वाले समय में नरेंद्रनगर ब्लॉक के इस हरित मॉडल को जनपद टिहरी गढ़वाल के अन्य ब्लॉकों और संपूर्ण उत्तराखंड राज्य में एक मिसाल के रूप में फैलाया जाएगा, जिससे पर्यावरण चेतना और सामाजिक अधिकारों की इस साझा जंग को एक नई वैचारिक दिशा मिल सके।


