उत्तराखंड STF का महा-अभियान: जून 2026 में साइबर ठगों के चंगुल से बचाए ₹2.63 करोड़; 1930 हेल्पलाइन की त्वरित 'फॉलो-अप' विंग ने फ्रीज किए खाते


Aapki Media AI


देहरादून, 1 जुलाई, 2026: मुख्यमंत्री उत्तराखंड के "अपराध मुक्त देवभूमि" मिशन के अंतर्गत राज्य पुलिस की तकनीकी और जांच इकाई ने साइबर अपराधियों के विरुद्ध देश का सबसे त्वरित और क्रेडिबल (Credible) रिस्पांस ग्रिड स्थापित किया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) उत्तराखंड श्री दीपम सेठ के विधिक दिशा-निर्देशों के क्रम में, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ द्वारा संचालित राष्ट्रीय वित्तीय हेल्पलाइन 1930 कंट्रोल रूम ने साइबर ठगी के शिकार नागरिकों को 'गोल्डन आवर' (ठगी के तुरंत बाद का समय) में अभूतपूर्व विधिक व तकनीकी राहत पहुंचाई है।

 

उत्तराखंड STF का महा-अभियान: जून 2026 में साइबर ठगों के चंगुल से बचाए ₹2.63 करोड़; 1930 हेल्पलाइन की त्वरित 'फॉलो-अप' विंग ने फ्रीज किए खाते


एसटीएफ द्वारा जारी आधिकारिक विधिक आख्या के अनुसार, वर्ष 2026 के अकेले जून माह की अवधि में 1930 कंट्रोल रूम और नवगठित विशेष 'फॉलो-अप' विंग की त्वरित कार्रवाई के फलस्वरूप, प्रदेश के विभिन्न जिलों के पीड़ितों से ठगी गई ₹2.63 करोड़ की भारी-भरकम धनराशि को सुरक्षित वापस (Hold/Freeze) कराया गया है। यह डेटा देश के वित्तीय साइबर सुरक्षा इतिहास में उत्तराखंड पुलिस की सर्वोच्च तकनीकी दक्षता को प्रमाणित करता है।
वृहद केस स्टडीज: मेल हैकिंग से लेकर अनधिकृत बैंकिंग फ्रॉड तक पर एसटीएफ का कड़ा प्रहार

जून माह के अंतिम सप्ताह में एसटीएफ की 1930 विंग ने जिन बड़े साइबर अपराधों का संज्ञान लेकर पीड़ितों के खातों में पैसे होल्ड कराए, उनकी पांच प्रमुख विधिक केस स्टडीज इस प्रकार हैं:


  1. केस 1 (मेल आईडी हैक स्कैम - ऊधमसिंहनगर): पंतनगर निवासी श्री कपिल सुखीजा की व्यावसायिक मेल आईडी हैक कर साइबर ठगों ने सामान ऑर्डर करने के नाम पर ₹4,20,000 की धोखाधड़ी की थी। 26 जून 2026 को शिकायत मिलते ही 1930 टीम ने शत-प्रतिशत ₹4,20,000 की रकम ठगों के खातों में फ्रीज कर दी।
  2. केस 2 (अनधिकृत बैंकिंग फ्रॉड - हरिद्वार): बहादराबाद निवासी कंचन देवी गुप्ता के साथ ₹18,000,000 (अठारह लाख) का बेहद गंभीर अनधिकृत बैंकिंग फ्रॉड (Unauthorized Banking Fraud) हुआ। एसटीएफ की फॉलो-अप टीम ने त्वरित विधिक इंटरवेंशन करते हुए ₹14,60,094 की राशि को होल्ड कराने में सफलता पाई।
  3. केस 3 (यूपीआई आईडी फ्रॉड - देहरादून): कोतवाली नगर देहरादून निवासी श्री राजा राम के साथ यूपीआई पिन/आईडी फ्रॉड के माध्यम से ₹1,66,000 की ठगी हुई, जिसमें से ₹1,04,424 को तत्काल तकनीकी ग्रिड की मदद से होल्ड कराया गया।


एसटीएफ जून 2026 साइबर रेस्क्यू: पीड़ित प्रोफाइल, ठगी का प्रकार एवं रिकवरी मैट्रिक्स



एसटीएफ की 1930 हेल्पलाइन द्वारा जून 2026 के अंतिम सप्ताह में की गई त्वरित विधिक कार्रवाइयों का प्रामाणिक प्रशासनिक विवरण नीचे तालिका में संकलित है:

शिकायत दिनांकपीड़ित का नाम एवं विधिक निवाससाइबर अपराध का प्रकार / मोडठगी गई कुल राशि (₹)एसटीएफ द्वारा होल्ड राशि (₹)
26.06.2026श्री कपिल सुखीजा, पंतनगर (उधमसिंहनगर)मेल आईडी हैक / फर्जी मर्चेंट ऑर्डर₹4,20,000₹4,20,000 (100% सुरक्षित)
24.06.2026श्री महेश हलधर, रुद्रपुर (उधमसिंहनगर)ऑनलाइन वित्तीय फ्रॉड / फिशिंग लिंक₹2,38,985₹1,21,130
25.06.2026श्री राजा राम, कोतवाली नगर (देहरादून)यूपीआई (UPI) आईडी क्लोनिंग / फ्रॉड₹1,66,000₹1,04,424
25.06.2026कंचन देवी गुप्ता, बहादराबाद (हरिद्वार)अनधिकृत बैंकिंग फ्रॉड (Cyber Breach)₹18,00,000₹14,60,094
26.06.2026श्रीमती रेणू देवी, सिडकुल (हरिद्वार)पार्ट-टाइम टास्क / ऑनलाइन फ्रॉड₹49,000₹40,000

 

'डिजिटल अरेस्ट' और 'इन्वेस्टमेंट स्कैम्स' पर एसएसपी एसटीएफ की विधिक गाइडलाइंस


साइबर ठगों द्वारा अपनाई जा रही नई और घातक कूटनीतियों (Modus Operandi) को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) एसटीएफ उत्तराखंड ने राज्य के नागरिकों के लिए एक विस्तृत विधिक गाइडलाइंस और चेतावनी जारी की है:


  1. 'डिजिटल अरेस्ट' का सच: स्कैमर्स खुद को सीबीआई (CBI), ईडी (ED), या नारकोटिक्स का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं और घर में ही 'डिजिटल अरेस्ट' करने का नाटक करते हैं। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि भारत की कोई भी विधिक जांच एजेंसी ऑनलाइन या वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती है। ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं और तुरंत फोन काटें।
  2. टेलीग्राम व यूट्यूब लाइक इन्वेस्टमेंट फ्रॉड: कम समय में पैसा दोगुना करने, यूट्यूब वीडियो लाइक करने पर कमीशन देने वाले पार्ट-टाइम जॉब ऑफर्स और टेलीग्राम आधारित नकली निवेश वेबसाइटों से दूर रहें। ये गिरोह शुरुआत में छोटा इनाम देकर भरोसा जीतते हैं और बाद में लाखों का निवेश कराकर वेबसाइट बंद कर देते हैं।
  3. रेंटेड बैंक अकाउंट (कमीशन पर खाता देना): कई लोग चंद रुपयों के लालच में अपना बैंक खाता साइबर ठगों को किराए पर या कमीशन पर दे देते हैं। एसटीएफ ने सचेत किया है कि कमीशन पर खाता देना एक संगीन विधिक अपराध है और ऐसे खाताधारकों को सह-अभियुक्त बनाकर जेल भेजा जा रहा है।

 

साइबर इमरजेंसी रिस्पॉन्स के 4 मुख्य सुशासन स्तंभ


एसटीएफ की साइबर विंग द्वारा वित्तीय नुकसान को न्यूनतम करने के लिए निम्नलिखित चार सुरक्षात्मक स्तंभों को कड़ाई से लागू किया जा रहा है:


  • 'गोल्डन आवर' में 1930 की सक्रियता: यदि किसी नागरिक के साथ कोई ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे बिना एक मिनट गंवाए तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करना चाहिए, ताकि बैंक के नोडल अधिकारी के साथ मिलकर पैसे को अगले खाते में ट्रांसफर होने से पहले ही ब्लॉक किया जा सके।
  • गूगल सर्च इंजन कस्टमर केयर नंबरों का निषेध: आम नागरिक बैंकों, जोमैटो, या कूरियर कंपनियों के कस्टमर केयर नंबर गूगल पर सर्च करते हैं, जहां स्कैमर्स ने अपने फर्जी नंबर डाल रखे हैं। हमेशा आधिकारिक मोबाइल ऐप या वेबसाइट से ही नंबर लें।
  • अन्जान वीडियो कॉल और हनीट्रैप से सुरक्षा: अन्जान नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल को रिसीव न करें, न ही अपनी कोई विधिक सूचना या स्क्रीनशॉट किसी के साथ साझा करें।
  • केंद्रीय साइबर पोर्टल (Cyber Crime Portal) पर त्वरित लिंकिंग: 1930 पर दर्ज प्रत्येक शिकायत को स्वतः www.cybercrime.gov.in पर लिंक किया जाता है, जिससे देश भर के सभी बैंकों (RBI विनियमित) को उस ठगी के पैसे का रूट ट्रैक करने में विधिक सहायता मिलती है।

 

डिजिटल युग में सजगता ही सबसे बड़ा विधिक कवच


1 जुलाई, 2026 को एसटीएफ कार्यालय देहरादून से जारी यह विधिक प्रेस नोट इस बात की संपुष्टि करता है कि उत्तराखंड एसटीएफ केवल अपराधियों को पकड़ने में ही नहीं, बल्कि आधुनिकतम तकनीक के सहारे जनता की गाढ़ी कमाई को बचाने में भी देश की अग्रणी एजेंसियों में शुमार हो चुकी है।


वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ द्वारा गठित 'फॉलो-अप' टीम का जून माह में ₹2.68 करोड़ की राशि को होल्ड कराना (जिसमें से ₹2.63 करोड़ पूर्णतः सुरक्षित वापस कराए गए) यह सिद्ध करता है कि त्वरित सूचना और त्वरित पुलिसिंग का समन्वय कितना क्रेडिबल परिणाम दे सकता है। डिजिटल अरेस्ट और टेलीग्राम इन्वेस्टमेंट स्कैम्स के खिलाफ जारी यह विधिक एडवाइजरी हर नागरिक के लिए एक रक्षा कवच है, जिसे अपनाकर देवभूमि को पूरी तरह साइबर सुरक्षित बनाया जा सकता है।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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