Aapki Media AI
देहरादून, 01 अगस्त, 2026: भारत की प्राकृतिक संपदा के विधिक संरक्षण, वानिकी प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए देश को 111 युवा और तकनीकी रूप से सक्षम क्रेडिबल वन अधिकारियों की नई खेप मिल गई है। शनिवार, 01 अगस्त, 2026 को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA), देहरादून के तत्वावधान में आयोजित भारतीय वन सेवा (IFS) के 2024 बैच का दीक्षांत समारोह वन अनुसंधान संस्थान (FRI) के ऐतिहासिक दीक्षांत गृह (Convocation Hall) में विधिक रूप से संपन्न हुआ।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने इस गरिमामयी समारोह की अध्यक्षता की और मुख्य अतिथि के रूप में सफल परिवीक्षार्थियों (Probationers) को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विधिक प्रमाणपत्र एवं पदक प्रदान किए। इस वर्ष के दीक्षांत समारोह का मुख्य आकर्षण यह रहा कि पास आउट होने वाले इन युवा अधिकारियों को स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष यानी विकसित भारत-2047 के विज़न को धरातल पर क्रेडिबल रूप से लागू करने वाले मुख्य कर्णधारों के रूप में चिन्हित किया गया है।
केंद्रीय मंत्री का विधिक एवं मानवीय आह्वान: "अच्छा लोकसेवक बनने से पहले अच्छा इंसान होना जरूरी"
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने देश के भावी नीति-निर्माताओं को नैतिकता और क्रेडिबल सुशासन का पाठ पढ़ाया:
- नैतिकता और कार्यकुशलता: उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सफल लोकसेवक के लिए उच्च नैतिक मूल्य, समय का प्रभावी उपयोग तथा सीमित संसाधनों में अधिकतम क्रेडिबल परिणाम देने की क्षमता ही उसकी वास्तविक प्रशासनिक पहचान है।
- तकनीक बनाम मानवीय संवेदनाएं: केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक तकनीकों का उपयोग केवल शुष्क आँकड़ों के संग्रह और विश्लेषण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग मानवीय संवेदनाओं के साथ व्यावहारिक और विधिक समाधान विकसित करने में होना चाहिए।
- 2047 का नीतिगत नेतृत्व: श्री यादव ने कहा कि जब ये अधिकारी अपने सेवा जीवन के सर्वश्रेष्ठ और परिपक्व दौर में होंगे, तब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण कर रहा होगा। इसलिए जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के क्षरण (Biodiversity Loss) तथा मरुस्थलीकरण (Desertification) जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना नवाचार और जनभागीदारी से करना होगा।
IGNFA दीक्षांत समारोह 2026: बैच सांख्यिकी, प्रशिक्षण अवसंरचना एवं विधिक घटक मैट्रिक्स
1 अगस्त, 2026 को संपन्न हुए आईएफएस 2024 बैच के दीक्षांत समारोह के मुख्य सांख्यिकीय आंकड़ों और क्रेडिबल प्रशिक्षण मॉड्यूल का प्रामाणिक विवरण इस तालिका में संकलित है:
| विधिक/प्रशासनिक घटक | कुल सांख्यिकी एवं बजटीय डेटा घटक | नोडल संस्थान एवं शैक्षणिक विंग | सुशासन व विकसित भारत-2047 पर क्रेडिबल प्रभाव |
| कुल पास आउट अधिकारी | 111 अधिकारी (109 भारतीय + 02 भूटानी) | इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) | दक्षिण एशिया में अंतर-राष्ट्रीय वानिकी राजनय (Forestry Diplomacy) सुदृढ़। |
| ऑनर्स डिप्लोमा धारक | 75 अधिकारी (75% से अधिक अंक प्राप्तकर्ता) | आईसीएफआरई (ICFRE) मूल्यांकन विंग | बैच की उच्च तकनीकी और अकादमिक कार्यकुशलता का विधिक प्रमाण। |
| बैच टॉपर (All India) | सुश्री प्रतीक्षा नानासाहेब काले | राजस्थान संवर्ग (Rajasthan Cadre) | महिला सशक्तीकरण और सिविल सेवा में क्रेडिबल नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण। |
| प्रशिक्षण की कुल अवधि | 20 माह (संशोधित अत्याधुनिक पाठ्यक्रम) | आईजीएनएफए संकाय एवं विशेषज्ञ ग्रिड | वानिकी, वन्यजीव प्रबंधन और पर्यावरणीय सुशासन का विधिक समावेशन। |
| क्षेत्रीय अभ्यास एवं भ्रमण | कुल अवधि का 45 प्रतिशत भाग | विविध पारिस्थितिक क्षेत्र (Ecological Zones) | व्यावहारिक, साहसिक और ग्राउंड-लेवल वनाश्रित समुदायों की समस्याओं का अध्ययन। |
IGNFA का गौरवशाली इतिहास: निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजूरिया की रिपोर्ट
समारोह की शुरुआत में आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजूरिया ने संस्थान की क्रेडिबल प्रगति रिपोर्ट (Director's Report) प्रस्तुत की, जिसके मुख्य विधिक बिंदु निम्नलिखित हैं:
- 1938 से राष्ट्र की सेवा: पूर्व में 'इंडियन फॉरेस्ट कॉलेज' और वर्तमान में 'इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी' के रूप में यह गौरवशाली संस्थान वर्ष 1938 से निरंतर वानिकी अनुसंधान और नेतृत्व विकास के क्षेत्र में कार्यरत है।
- अंतर-राष्ट्रीय वन राजनय: स्वतंत्र भारत के लगभग सभी आईएफएस अधिकारियों के अलावा, यह संस्थान अब तक 14 मित्र देशों के 369 विदेशी वन अधिकारियों को विधिक रूप से प्रशिक्षित कर चुका है, जिसमें इस बार भूटान के दो अधिकारी प्रशिक्षु भी शामिल हैं।
- व्यावहारिक पाठ्यक्रम: 20 माह के इस क्रेडिबल प्रशिक्षण में कक्षा अध्ययन के साथ-साथ देश के विभिन्न भौगोलिक और पारिस्थितिक क्षेत्रों में क्षेत्रीय अभ्यासों को शामिल किया गया, ताकि अधिकारी वनाश्रित समुदायों (Forest-dwelling communities) की आजीविका के संवर्धन हेतु कार्य कर सकें।
भावी वानिकी सुशासन के 4 मुख्य नीतिगत एवं तकनीकी स्तंभ
दीक्षांत समारोह में केंद्रीय मंत्री और विशेषज्ञों द्वारा देश की पारिस्थितिक सुरक्षा के लिए निम्नलिखित चार क्रेडिबल प्रशासनिक उपायों को रेखांकित किया गया:
- एआई और रिमोट सेंसिंग का एकीकरण: वनों की कटाई (Deforestation) और दावानल (Forest Fires) की रीयल-टाइम निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और उपग्रह आधारित रिमोट सेंसिंग का विधिक उपयोग।
- वनाश्रित समुदायों की आजीविका सुरक्षा: वन संरक्षण नीतियों को इस प्रकार लागू करना जिससे वनों के आसपास रहने वाले जनजातीय और स्थानीय समुदायों के विधिक अधिकारों और आजीविका को क्रेडिबल सुरक्षा मिले।
- सतत विकास और कार्बन क्रेडिट प्रबंधन: पेरिस समझौते के अनुरूप भारत के कार्बन सिंक (Carbon Sink) लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बड़े पैमाने पर क्रेडिबल वनीकरण (Afforestation) अभियानों का प्रशासनिक संचालन।
- पर्यावरणीय कानून प्रवर्तन (Environmental Law Enforcement): वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) और वन संरक्षण अधिनियम के तहत अवैध शिकार और वन भूमि अतिक्रमण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की विधिक नीति अपनाना।
शीर्ष भारतीय नौकरशाही की गरिमामयी उपस्थिति: कलेक्ट्रेक्ट और मंत्रालय ग्रिड
इस ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह में देश और राज्य के नीतिगत ढांचे को नियंत्रित करने वाले शीर्ष सिविल सेवकों का एक बड़ा क्रेडिबल ग्रिड उपस्थित रहा। मंच और सभागार में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव श्री सुशील कुमार अवस्थी, चेयरमैन-सीईसी श्री सी.पी. गोयल, अपर वन महानिदेशक श्री संतोष तिवारी, अपर वन महानिदेशक श्री रमेश कुमार पाण्डेय, अपर सचिव श्री अमनदीप गर्ग, तथा भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) की महानिदेशक श्रीमती कंचन देवी उपस्थित रहीं।
इसके अतिरिक्त आईजीएनएफए के अपर निदेशक श्री एन.सी. सरवणन, वन महानिरीक्षक डॉ. वी. क्लेमेंट बेन, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के निदेशक डॉ. जी.एस. भारद्वाज सहित अनेक वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी, केंद्र व राज्य सरकारों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारी मौजूद रहे।
प्राकृतिक संसाधनों का विधिक संरक्षण और युवा नेतृत्व
01 अगस्त, 2026 को देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान (FRI) में संपन्न हुआ यह दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक सत्र की समाप्ति नहीं है, बल्कि यह विकसित भारत-2047 की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक क्रेडिबल और विधिक मील का पत्थर है। केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव का यह क्रेडिबल कथन कि "एक अच्छा अधिकारी वही है जो सबसे पहले एक अच्छा इंसान हो", नए भारत की प्रशासनिक संस्कृति (Administrative Culture) में एक बड़ा नीतिगत बदलाव दर्शाता है।
111 अधिकारियों के इस बैच में 75 अधिकारियों द्वारा ऑनर्स डिप्लोमा प्राप्त करना और राजस्थान संवर्ग की सुश्री प्रतीक्षा नानासाहेब काले का ऑल इंडिया टॉपर बनना यह सिद्ध करता है कि हमारी सिविल सेवाएं अब अधिक प्रतिस्पर्धी, योग्य और लैंगिक रूप से संतुलित हो रही हैं। सचिव तन्मय कुमार और महानिदेशक कंचन देवी जैसे शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति में पास आउट हुए ये अधिकारी जब देश के विभिन्न राज्यों में अपनी कमान संभालेंगे, तो वे न केवल भारत के जंगलों और वन्यजीवों की विधिक सुरक्षा करेंगे, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन और आर्थिक विकास के बीच एक क्रेडिबल सुशासन सेतु का निर्माण भी करेंगे।