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देहरादून, 03 अगस्त, 2026: उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में अंतिम छोर पर खड़े नागरिक तक सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सोमवार, 03 अगस्त, 2026 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के प्रबंध निदेशक (MD) तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट/सचिवालय ग्रिड के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की।
बैठक के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित विभिन्न फ्लैगशिप स्वास्थ्य योजनाओं की वर्तमान प्रगति, जमीनी क्रियान्वयन (Ground Implementation) तथा जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों का विस्तृत विधिक और प्रशासनिक आकलन किया गया। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार 'हेल्थ फॉर ऑल' के संकल्प के तहत स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता को बर्दाश्त नहीं करेगी।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के कड़े निर्देश: पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध सेवा वितरण
समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने अधिकारियों को स्पष्ट नीतिगत दिशा-निर्देश दिए:
- अंतिम व्यक्ति तक पहुंच (Last-Mile Connectivity): मंत्री ने निर्देशित किया कि एनएचएम के तहत संचालित सभी केंद्रीय और राज्य स्तरीय योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ पर्वतीय, सीमांत और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अंतिम नागरिक तक प्रभावी रूप से पहुंचना चाहिए।
- पारदर्शिता और गुणवत्ता: योजनाओं के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता, कार्य की उच्च गुणवत्ता और समयबद्धता (Timeliness) सुनिश्चित करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
- पर्वतीय क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता: उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए दुर्गम स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती और आपातकालीन एम्बुलेंस सेवाओं को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) समीक्षा बैठक 2026: मुख्य प्रशासनिक व स्वास्थ्य घटक मैट्रिक्स
3 अगस्त, 2026 को स्वास्थ्य मंत्री द्वारा की गई समीक्षा के मुख्य प्राथमिकताओं और प्रशासनिक घटकों का प्रामाणिक संकलन इस तालिका में प्रस्तुत है:
| स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक क्षेत्र | मुख्य प्राथमिकताएं एवं नीतिगत एजेंडा | नोडल अधिकारी/विभाग दायित्व | जन-स्वास्थ्य पर क्रेडिबल प्रशासनिक प्रभाव |
| मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) | प्रसव पूर्व जांच (ANC), संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) व टीकाकरण। | एनएचएम निदेशक एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMOs) | मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में क्रेडिबल कमी लाना। |
| प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (PHC) | हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का सुदृढ़ीकरण तथा आवश्यक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति। | स्वास्थ्य महानिदेशालय एवं आयुष विंग | प्राथमिक स्तर पर ही रोगों की पहचान और स्थानीय उपचार की क्रेडिबल सुविधा। |
| मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) | दूरस्थ/पर्वतीय अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और लैब तकनीशियनों का बेहतर प्रबंधन। | प्रबंध निदेशक, एनएचएम एवं चिकित्सा शिक्षा विंग | विषम भौगोलिक क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को दूर करना और क्रेडिबल तैनाती। |
| डिजिटल एवं टेली-मेडिसिन | ई-संजीवनी पोर्टल्स के जरिए विशेषज्ञों से परामर्श की विधिक व तकनीकी सुविधा। | आईटी एवं एनएचएम तकनीकी सेल | घर बैठे या स्थानीय पीएचसी से उच्च स्तरीय विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श। |
मातृ-शिशु सुरक्षा और प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे पर विशेष फोकस
बैठक के दौरान राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया:
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य का सुदृढ़ीकरण: गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK) और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया गया।
- स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यक्षमता: उप-जिला अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) की कार्यप्रणाली में सुधार लाकर वहां डायग्नोस्टिक और आपातकालीन सुविधाओं का विस्तार करना।
- जनोन्मुखी दृष्टिकोण: स्वास्थ्य सेवाओं को केवल औपचारिक न रखकर पूरी तरह से जन-संवेदनशील (Patient-Centric) और सुलभ बनाने के विधिक निर्देश दिए गए।
स्वास्थ्य सुशासन एवं NHM क्रियान्वयन के 4 मुख्य नीतिगत स्तंभ
समीक्षा बैठक के आलोक में उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग द्वारा निम्नलिखित चार क्रेडिबल सुशासन उपाय तत्काल प्रभाव से संचालित किए जाएंगे:
- नियमित समीक्षा एवं डैशबोर्ड मॉनिटरिंग: जिलेवार एनएचएम योजनाओं की प्रगति की हर माह राज्य स्तर पर समीक्षा की जाएगी, जिससे बजटीय आवंटन का शत-प्रतिशत सदुपयोग हो सके।
- दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्रों का सुदृढ़ीकरण: चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जैसे सीमांत जिलों के स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं, एम्बुलेंस (108 सेवा) और जीवन रक्षक उपकरणों की निरंतर उपलब्धता।
- सामुदायिक सहभागिता (Community Engagement): आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं और एएनएम (ANM) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाना।
- मानव संसाधन की रीयल-टाइम ट्रैकिंग: बायोमीट्रिक उपस्थिति और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए दुर्गम क्षेत्रों में तैनात चिकित्सा कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना।
स्वस्थ और समृद्ध उत्तराखंड का संकल्प
03 अगस्त, 2026 को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री सुबोध उनियाल द्वारा एनएचएम प्रबंध निदेशक के साथ ली गई यह समीक्षा बैठक उत्तराखंड में लोक-स्वास्थ्य सुशासन (Public Health Governance) को एक नई क्रेडिबल दिशा देने वाली है। पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के स्वास्थ्य ढांचे पर विशेष बल देना यह सिद्ध करता है कि राज्य सरकार भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद अंतिम नागरिक तक उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य, मानव संसाधन के बेहतर प्रबंधन और योजनाओं में पारदर्शिता लाने के ये विधिक निर्देश न केवल प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को सशक्त करेंगे, बल्कि आम नागरिकों में सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली के प्रति एक नया क्रेडिबल विश्वास भी पैदा करेंगे।
