गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन: देहरादून विधानसभा के सामने समिति पदाधिकारियों का सामूहिक मुंडन; 15 अगस्त से शुरू होगी पदयात्रा


Aapki Media AI


देहरादून, 13 अगस्त, 2026: उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने के पड़ाव के बीच प्रदेश की स्थाई राजधानी का विषय एक बार फिर राज्य के सबसे बड़े जनआंदोलन के रूप में सामने आया है। गुरुवार, 13 अगस्त, 2026 को प्राप्त जानकारी के अनुसार, गैरसैंण में लगातार 100 से अधिक दिनों तक चले क्रमिक अनशन के बावजूद शासन स्तर से कोई ठोस विधिक निर्णय न लिए जाने के विरोध में 'स्थाई राजधानी गैरसैंण समिति' ने राजधानी देहरादून में विरोध का अनूठा और कड़ा तरीका अपनाया।

देहरादून विधानसभा के सामने समिति पदाधिकारियों का सामूहिक मुंडन
देहरादून विधानसभा के सामने समिति पदाधिकारियों का सामूहिक मुंडन


समिति के पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने देहरादून स्थित विधानसभा भवन के ठीक सामने एकत्र होकर सामूहिक मुंडन करवाया और राज्य सरकार के रुख पर कड़ा विरोध व्यक्त किया। समिति का स्पष्ट रुख है कि राज्य गठन के ढाई दशक बीत जाने के बाद भी पर्वतीय जनआकांक्षाओं के केंद्र गैरसैंण को पूर्ण स्थाई राजधानी का दर्जा न मिलना चिंताजनक है।


समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस विनोद कुमार रतूड़ी का आधिकारिक वक्तव्य


विरोध प्रदर्शन के दौरान जनसमूह को संबोधित करते हुए स्थाई राजधानी गैरसैंण समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी श्री विनोद कुमार रतूड़ी ने कहा:

  1. राज्य गठन का मूल उद्देश्य: उत्तराखण्ड राज्य की स्थापना जिन अवधारणाओं और जनआकांक्षाओं के आधार पर हुई थी, उनमें पर्वतीय क्षेत्र गैरसैंण को राज्य की स्थाई राजधानी बनाना प्रमुख स्तंभ था, जो 25 वर्षों बाद भी केवल एक अधूरा सपना बना हुआ है।
  2. सामूहिक मुंडन का सांकेतिक विरोध: उन्होंने कहा कि सनातन और हिंदू संस्कारों में मुंडन संस्कार या तो बालक के जन्मोत्सव/मुंडन पर होता है अथवा परिवार में किसी वरिष्ठ के निधन के पश्चात शोक स्वरूप किया जाता है। समिति ने यह कदम यह संदेश देने के लिए उठाया है कि सरकार गैरसैंण को स्थाई राजधानी का दर्जा देने की जनआकांक्षा के प्रति पूरी तरह उदासीन हो चुकी है।
  3. 15 अगस्त से गैरसैंण पदयात्रा की घोषणा: समिति ने ऐलान किया कि आगामी 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) को देहरादून विधानसभा भवन के समक्ष से एक विशाल राज्यव्यापी पदयात्रा का शुभारंभ किया जाएगा।

 

स्थाई राजधानी गैरसैंण आंदोलन 2026: प्रशासनिक व आंदोलन रूपरेखा तालिका



13 अगस्त, 2026 तक के घटनाक्रम और प्रस्तावित आंदोलन के प्रशासनिक पड़ावों का प्रामाणिक विवरण इस तालिका में संकलित है:


आंदोलन चरण / मुख्य घटनाक्रमवर्तमान स्थिति एवं प्रस्तावित तिथियांनोडल आयोजक / नेतृत्वकर्ताआंदोलन का प्रशासनिक व सुशासनिक उद्देश्य
क्रमिक अनशन (प्रथम चरण)गैरसैंण (ग्रीष्मकालीन राजधानी) में 100+ दिन पूर्णस्थाई राजधानी गैरसैंण समितिगैरसैंण को राज्य की स्थाई राजधानी घोषित करने की मांग।
सामूहिक मुंडन प्रदर्शनदेहरादून विधानसभा भवन के सामने (13 अगस्त)पूर्व आईएएस विनोद कुमार रतूड़ी (अध्यक्ष)शासन व प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करने हेतु सांकेतिक विरोध।
राज्यव्यापी पदयात्रा का शुभारंभ15 अगस्त, 2026 (विधानसभा, देहरादून से)नागरिक समाज एवं समिति प्रतिनिधिजन-जागरण करते हुए विभिन्न पड़ावों से होकर गैरसैंण तक कूच।
अनिश्चितकालीन आंदोलन (द्वितीय चरण)पदयात्रा के गैरसैंण पहुंचने के पश्चातसंयुक्त आंदोलन समितिमांग पूरी होने तक गैरसैंण में क्रमिक अनशन की निरंतरता।

15 अगस्त की पदयात्रा और भावी आंदोलन की रूपरेखा


समिति द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 15 अगस्त को देहरादून से प्रारंभ होने वाली यह पदयात्रा उत्तराखण्ड के विभिन्न जनपदों, कस्बों और पर्वतीय पड़ावों से गुजरते हुए सीधे गैरसैंण (चमोली जनपद) पहुंचेगी।


मार्ग में विभिन्न स्थानों पर जनसभाओं के माध्यम से नागरिकों को राज्य गठन की मूल भावनाओं और गैरसैंण के विधिक व ऐतिहासिक महत्व से जोड़ा जाएगा। गैरसैंण पहुंचने के उपरांत वहां पुनः क्रमिक अनशन की शुरुआत की जाएगी, जो स्थाई राजधानी के संबंध में औपचारिक शासनादेश जारी होने तक निरंतर जारी रहेगा।


 

राजधानी सुशासन और गैरसैंण नीति के 4 मुख्य बिंदु 


राज्य में प्रशासनिक सुशासन और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने हेतु मुख्य विचारणीय पहलू:


  • पर्वतीय विकास का केंद्र बिन्दु: गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने से राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन पर अंकुश लगाने में सहायता।
  • प्रशासनिक अवसंरचना (ग्रीष्मकालीन राजधानी): पूर्व में गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर वहां विधानसभा भवन व सचिवालय इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा चुका है।
  • समान क्षेत्रीय संतुलन: गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों के मध्य स्थित होने के कारण गैरसैंण भौगोलिक दृष्टि से राज्य का प्राकृतिक केंद्र है।
  • जनसहभागिता व शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन: समिति ने अपने पूरे आंदोलन को पूर्णतः अनुशासित, अहिंसक और संवैधानिक दायरे में संचालित करने का संकल्प दोहराया है।

 

जनआकांक्षाओं और प्रशासनिक निर्णयों का समन्वय 


13 अगस्त, 2026 को देहरादून में स्थाई राजधानी गैरसैंण समिति द्वारा किया गया यह विरोध प्रदर्शन राज्य के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद गैरसैंण का विषय एक बार फिर केंद्र में आया है। 15 अगस्त से शुरू होने वाली पदयात्रा और नागरिक संवाद के माध्यम से यह विषय प्रदेश के प्रशासनिक व राजनैतिक विमर्श को नई दिशा देगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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