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देहरादून, 12 अगस्त, 2026: उत्तराखण्ड में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR - Special Intensive Revision) प्रक्रिया की निष्पक्षता और ऑनलाइन आपत्तियों के सत्यापन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बुधवार, 12 अगस्त, 2026 को उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर उन्हें एक औपचारिक ज्ञापन प्रेषित किया।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि राज्य में 29 मई 2026 से जारी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान ऑनलाइन माध्यम से मतदाता नामावली से नाम हटाने हेतु प्रयुक्त फॉर्म-7 (Form-7) का असाधारण और यांत्रिक रूप से सामूहिक दाखिला (Mass Filings) किया जा रहा है। ज्ञापन के अनुसार, फॉर्म-10 के आंकड़ों के प्रथमदृष्टया विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि कतिपय व्यक्तियों द्वारा विभिन्न बूथों और विधानसभा क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति 150 से अधिक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।
ज्ञापनों और बयानों पर आधारित मुख्य विधिक व राजनीतिक बिंदु
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पार्टी का पक्ष रखते हुए निम्नलिखित बिंदु रेखांकित किए:
- पूर्व शिकायतों का संदर्भ: कांग्रेस द्वारा इससे पूर्व 30 जुलाई, 06 अगस्त और 10 अगस्त 2026 को भी लिखित शिकायतों के माध्यम से ऑनलाइन फॉर्म-7 के लगातार सामूहिक दाखिले का मुद्दा चुनाव आयोग के संज्ञान में लाया गया था।
- BLA-2 द्वारा स्थलीय दावे: पार्टी के बूथ लेवल एजेंटों (BLA-2) की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया कि जिन मतदाताओं के विरुद्ध आपत्तियां दर्ज की गई हैं, उनमें से कई सत्यापन के दौरान अपने घोषित पते पर ही निवास करते पाए गए हैं।
- विधिक धाराओं का उल्लेख: ज्ञापन में ध्यान दिलाया गया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 निर्वाचक नामावली में झूठी घोषणा करने को संज्ञेय अपराध मानती है। इसके अतिरिक्त, निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत आपत्तियों का विशिष्ट और सत्यापन योग्य होना अनिवार्य है।
उत्तराखंड एसआईआर पुनरीक्षण प्रक्रिया एवं ज्ञापन विवरण: प्रशासनिक संरचना
12 अगस्त, 2026 को प्रस्तुत ज्ञापन के मुख्य प्रशासनिक व नियमावली संबंधी आंकड़ों का विवरण इस तालिका में प्रस्तुत है:
मुख्य निर्वाचन अधिकारी से की गई प्रमुख प्रशासनिक मांगें
कांग्रेस द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में चुनाव आयोग से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया गया है:
- आपत्तिकर्ताओं का पहचान सत्यापन: जिन मामलों में एक ही व्यक्ति द्वारा कई फॉर्म-7 दाखिल किए गए हैं, उनके नाम, संपर्क विवरण और आपत्तियों की प्रामाणिकता की तत्काल विस्तृत जांच कराई जाए।
- अनपेक्षित आपत्तियों का निरस्तीकरण: यदि आपत्तिकर्ता की वास्तविकता अथवा सामूहिक आपत्तियों का सत्यापन योग्य आधार स्थापित नहीं होता है, तो उन्हें प्रारंभिक स्तर पर निरस्त (Prima Facie Rejection) किया जाए।
- 100% बीएलओ (BLO) फील्ड वेरिफिकेशन: किसी भी पात्र मतदाता का नाम केवल ऑनलाइन प्राप्त फॉर्म-7 के आधार पर न हटाया जाए; नाम हटाने से पूर्व संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा स्थलीय सत्यापन अनिवार्य हो।
- जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) से दैनिक समीक्षा: सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि वे असामान्य संख्या में प्राप्त फॉर्म-7 के मामलों की दैनिक रिपोर्ट राज्य निर्वाचन कार्यालय को भेजें।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख पदाधिकारी
ज्ञापन सौंपने वाले कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल के अतिरिक्त प्रदेश महामंत्री श्री राजेन्द्र शाह, एसआईआर समिति सदस्य व प्रदेश सचिव श्री अमेन्द्र सिंह बिष्ट, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह, एडवोकेट संदीप चमोली, श्री राकेश नेगी, श्री विनोद कुमार, श्रीमती सुरभि शाह, श्रीमती डिंपल तथा श्री नितिन बिष्ट उपस्थित रहे।
निर्वाचन सुशासन और डेटा प्रामाणिकता के 4 मुख्य स्तंभ
चुनावी नामावली की शुद्धता और कानूनी सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक मानक:
- ई-केवाईसी और डिजिटल सत्यापन: ऑनलाइन आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया में आधार/ओटीपी सत्यापन का समावेश।
- पारदर्शी बीएलओ रिपोर्टिंग: फील्ड वेरिफिकेशन के बाद बीएलओ द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का सार्वजनिक व निष्पक्ष ऑनलाइन रिकॉर्ड।
- जागरूकता व मतदाता अधिकार: वास्तविक मतदाताओं को उनकी सूची स्थिति में बदलाव संबंधी पूर्व सूचना (SMS/Notice) देना।
- सख्त कानूनी प्रवर्तन: जानबूझकर गलत जानकारी देकर मतदाता सूची को प्रभावित करने के प्रयासों पर कानूनी कार्रवाई।
लोकतांत्रिक सुशासन में पारदर्शिता का महत्व
12 अगस्त, 2026 को उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत यह ज्ञापन निर्वाचक नामावली की शुद्धता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जन-विश्वास बनाए रखने के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग द्वारा प्राप्त शिकायतों पर विधिक नियमावली के तहत त्वरित जांच, बीएलओ द्वारा शत-प्रतिशत स्थलीय सत्यापन और निष्पक्ष समीक्षा से ही राज्य में एक पारदर्शी और त्रुटिरहित मतदाता सूची का निर्माण सुनिश्चित होगा।
