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देहरादून, 07 अक्टूबर, 2026: उत्तराखण्ड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और व्यावहारिक प्रयोग को गति देने के लिए राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। बुधवार, 07 अक्टूबर, 2026 को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित संस्कृत शिक्षा विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर और प्रभावी प्रयास किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि राज्य के चिन्हित 'आदर्श संस्कृत ग्रामों' में संस्कृत आधारित गतिविधियां केवल विशेष आयोजनों तक सीमित न रहें, बल्कि वहां वर्षभर नियमित रूप से संस्कृत संभाषण (Sanskrit Speaking) और सांस्कृतिक कार्यक्रम संचालित किए जाएं।
धार्मिक स्थलों पर श्लोक-प्रदर्शन और आगामी हरिद्वार कुंभ मेले हेतु विशेष कार्ययोजना
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रमुख धार्मिक व आध्यात्मिक केंद्रों में संस्कृत के प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया:
- प्रमुख तीर्थ स्थलों पर संस्कृत संदेश: चारधामों (केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) के अतिरिक्त हर की पैड़ी, जागेश्वर धाम, आदि कैलाश, पूर्णागिरि, सुरकंडा देवी, धारी देवी, गर्जिया देवी और वीरभद्र ऋषिकेश जैसे प्रमुख स्थलों पर संस्कृत के प्रेरक वाक्य, श्लोक और उनके सरल अर्थ प्रदर्शित किए जाएंगे।
- कुंभ मेला हरिद्वार हेतु अभिनव पहल: आगामी हरिद्वार कुंभ मेले के दृष्टिगत देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के समक्ष भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए एक व्यापक व ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
- वेद, उपनिषद व पुराणों का ज्ञान: बच्चों को संस्कृत अध्ययन के साथ-साथ वेद, उपनिषद और पुराणों का ज्ञान देने के लिए उनकी आयु व रुचि के अनुरूप सरल व प्रभावी माध्यम (Learning Modules) विकसित किए जाएंगे।
- वित्तीय प्रतिबद्धता: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तराखण्ड की द्वितीय राजभाषा के संरक्षण और विकास कार्यों के लिए बजट की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा एवं छात्रवृत्ति योजनाएं 2026: मुख्य विवरण
07 अक्टूबर, 2026 को सचिव संस्कृत शिक्षा श्री दीपक कुमार द्वारा प्रस्तुत मुख्य योजनाओं का विवरण:
| योजना / पहल | पात्र वर्ग / लक्ष्य | मुख्य उद्देश्य व विशेषताएं | प्रशासनिक स्थिति |
| आदर्श संस्कृत ग्राम | 13 जनपदों में 1-1 गाँव | दैनिक बोलचाल और व्यवहार में संस्कृत को शामिल करना | 13 ग्रामों में शुभारंभ पूर्ण |
| गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति | छात्राएं (संस्कृत अध्ययनरत) | बालिकाओं में संस्कृत शिक्षा को प्रोत्साहन | नियमित संचालित |
| डॉ. अंबेडकर SC/ST छात्रवृत्ति | अनुसूचित जाति व जनजाति छात्र | वंचित वर्गों को संस्कृत अध्ययन हेतु वित्तीय सहायता | नियमित संचालित |
| संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान | मेधावी छात्र-छात्राएं | उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार | राज्य स्तरीय पहल |
| संस्कृत आयोग गठन | प्रदेश भर के संस्थान व शोधार्थी | शोध, पांडुलिपि डिजिटलीकरण व वैदिक अध्ययन | गठन की प्रक्रिया प्रगति पर |
संस्कृत आयोग के गठन और पांडुलिपि डिजिटलीकरण की प्रगति
समीक्षा बैठक में सचिव संस्कृत शिक्षा श्री दीपक कुमार ने बताया कि राज्य के सभी 13 जिलों में एक-एक आदर्श संस्कृत ग्राम का शुभारंभ किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त:
- संस्कृत आयोग (Sanskrit Commission): राज्य में संस्कृत शिक्षा, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण (Digitization), वैदिक-शास्त्रीय अध्ययन और आधुनिक तकनीक (AI/IT) में संस्कृत के अनुप्रयोग को बढ़ावा देने के लिए संस्कृत आयोग के गठन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
- बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी: समीक्षा बैठक में सचिव श्री रणवीर सिंह चौहान, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय, अपर सचिव श्री मनुज गोयल, श्री कवीन्द्र सिंह, संयुक्त सचिव श्री राजेंद्र सिंह पतियाल सहित विभाग के अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
उत्तराखण्ड संस्कृत नीति 2026 के 4 मुख्य स्तंभ
राज्य में संस्कृत संवर्धन हेतु तय की गई मुख्य प्राथमिकताएं:
- वर्षभर नियमित गतिविधियां: 13 आदर्श संस्कृत ग्रामों में संस्कृत संभाषण और दैनिक व्यवहार का नियमित अभ्यास।
- डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण: प्राचीन ग्रंथों और वैदिक साहित्य को आधुनिक तकनीक के माध्यम से सहेजना।
- कुंभ व पर्यटन स्थलों पर प्रदर्शन: धार्मिक पर्यटकों और श्रद्धालुओं हेतु सरल अर्थों के साथ श्लोक व प्रेरक वाक्यों का प्रदर्शन।
- समावेशी प्रोत्साहन: गार्गी छात्रवृत्ति और डॉ. अंबेडकर छात्रवृत्ति के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक संस्कृत का विस्तार।
भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों का पुनर्जागरण
7 अक्टूबर, 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दी गई ये हिदायतें राज्य में संस्कृत भाषा को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि जन-जीवन और संस्कारों के अभिन्न अंग के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। कुंभ मेले हेतु बनने वाली विशेष कार्ययोजना से वैश्विक स्तर पर उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी।
