Advertisement

Advertisement...

उत्तराखण्ड के 39,815 परिवारों का पूरा हुआ पक्की छत का सपना: 'प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण' ने पकड़ी रफ्तार; ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और रुद्रप्रयाग अव्वल


Aapki Media AI


देहरादून, 08 अक्टूबर, 2026: उत्तराखण्ड के ग्रामीण इलाकों में बेघर, कच्चे और जीर्ण-शीर्ण मकानों में गुजर-बसर कर रहे जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के अभियान में राज्य सरकार को बड़ी सफलता मिली है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत वर्ष 2022 से लेकर अब तक प्रदेश के 39,815 परिवारों को पक्के मकानों का आवंटन कर लाभान्वित किया जा चुका है।

 

उत्तराखण्ड के 39,815 परिवारों का पूरा हुआ पक्की छत का सपना: 'प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण' ने पकड़ी रफ्तार



मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की केंद्र सरकार के साथ प्रभावी पैरवी और लगातार मॉनिटरिंग का ही नतीजा है कि जहां पीएम आवास योजना (शहरी) 2.0 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है, वहीं पीएम आवास योजना (ग्रामीण) में भी राज्य लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।


जनपदवार स्थिति: ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और रुद्रप्रयाग में सर्वाधिक आवास निर्मित



आंकड़ों के अनुसार, राज्य के मैदानी और पर्वतीय—दोनों क्षेत्रों में पीएम आवास योजना (ग्रामीण) का क्रियान्वयन तेजी से हुआ है:

  • शीर्ष प्रदर्शन वाले जिले: प्रदेश में सर्वाधिक 4,882 आवास ऊधमसिंह नगर जनपद में बनाए गए हैं। इसके बाद हरिद्वार जनपद में 4,493 और पर्वतीय जिले रुद्रप्रयाग में 4,032 परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है।
  • पर्वतीय जिलों में निर्माण: चमोली में 3,900, पिथौरागढ़ में 3,386, पौड़ी में 3,195, उत्तरकाशी में 3,057, देहरादून में 2,839, चंपावत में 2,789, बागेश्वर में 2,279 और टिहरी में 2,134 आवास बनकर तैयार हुए हैं।
  • अन्य जनपद: नैनीताल में 1,480 तथा अल्मोड़ा जिले में 1,349 परिवारों को पक्की छत मिली है।

 

उत्तराखण्ड PMAY-G जनपदवार आवास निर्माण ब्योरा



वर्ष 2022 से 2026 तक निर्मित एवं आवंटित ग्रामीण आवासों का सांख्यिकी विवरण:

क्रमजनपद का नामलाभान्वित परिवारों / आवासों की संख्याभौगोलिक क्षेत्र
1ऊधमसिंह नगर4,882मैदानी
2हरिद्वार4,493मैदानी
3रुद्रप्रयाग4,032पर्वतीय
4चमोली3,900पर्वतीय/सीमांत
5पिथौरागढ़3,386पर्वतीय/सीमांत
6पौड़ी गढ़वाल3,195पर्वतीय
7उत्तरकाशी3,057पर्वतीय/सीमांत
8देहरादून2,839मैदानी/पर्वतीय
9चंपावत2,789पर्वतीय
10बागेश्वर2,279पर्वतीय
11टिहरी गढ़वाल2,134पर्वतीय
12नैनीताल1,480मैदानी/पर्वतीय
13अल्मोड़ा1,349पर्वतीय
कुलउत्तराखण्ड राज्य (समग्र)39,815—

लाभार्थियों को मिलने वाली वित्तीय सहायता एवं अतिरिक्त सुविधाएं


वर्ष 2016 से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का मूल उद्देश्य हर पात्र नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन देना है। योजना के तहत वित्तीय और भौतिक मदद का विवरण इस प्रकार है:


  1. मूल अनुदान राशि (DBT): प्रत्येक पात्र लाभार्थी को मकान निर्माण हेतु ₹1,30,000 की सहायता राशि सीधे बैंक खाते में (Direct Benefit Transfer) भेजी जाती है।
  2. शौचालय निर्माण हेतु प्रोत्साहन: स्वच्छ भारत मिशन (मनरेगा/स्वजल) के माध्यम से शौचालय निर्माण हेतु ₹12,000 की अतिरिक्त राशि दी जाती है।
  3. रोजगार व मजदूरी सहायता: लाभार्थी को स्वयं का घर बनाने के लिए वीबी रामजी योजना के तहत 95 दिन की मजदूरी का भुगतान किया जाता है।
  4. किचन बर्तन सहायता में बढ़ोतरी: मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत वर्ष 2022-23 से रसोई के बर्तन व सामग्री खरीदने हेतु दी जाने वाली राशि ₹5,000 से बढ़ाकर ₹6,000 कर दी गई है।
  5. अन्य बुनियादी कनेक्शन: प्रत्येक आवास को पेयजल संयोजन, उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी गैस कनेक्शन और बिजली कनेक्शन से जोड़ा जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का वक्तव्य

 

ग्रामीण आवास योजना की सफलता पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा:


"आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार प्रदेश के हर जरूरतमंद और बेघर परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। 'प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)' का लाभ पारदर्शी तरीके से हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। इस योजना ने राज्य के हजारों ग्रामीणों के जीवन में स्थायित्व लाया है और उनके पक्की छत के सपने को साकार किया है।"


पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के 4 मुख्य सुशासन स्तंभ 

राज्य में लागू की गई नीतिगत विशेषताएं:

  • डीबीटी द्वारा पारदर्शी भुगतान: बिचौलियों को खत्म कर अनुदान राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित।
  • मल्टी-स्कीम कन्वर्जेंस: आवास के साथ शौचालय (₹12,000), पेयजल, बिजली, गैस कनेक्शन और मजदूरी (95 दिन) का एकीकृत लाभ।
  • रसोई सहायता में राज्य का योगदान: बर्तन/किचन सामग्री हेतु अतिरिक्त सहायता ₹6,000 की गई।
  • पर्वतीय व सीमांत क्षेत्रों पर विशेष बल: दुर्गम जिलों जैसे चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी में हजारों परिवारों का पुनर्वास और सशक्तीकरण।

 

समावेशी विकास और अंत्योदय का जीवंत उदाहरण


8 अक्टूबर, 2026 तक के ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि उत्तराखण्ड में 'प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण' केवल एक निर्माण योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जीवन स्तर को ऊपर उठाने वाली क्रांति साबित हुई है। अंत्योदय के भाव से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पक्की छत पहुँचाने की यह पहल राज्य के समावेशी विकास को गति दे रही है।




📢 खबरों को सबसे पहले पाने के लिए आपकी मीडिया को फॉलो करें
👉 WhatsApp Channel Join करें 👉 WhatsApp Group Join करें
Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
Previous Post Next Post

Advertisement