रुड़की (हरिद्वार), 21 मार्च 2026: धर्मनगरी के पड़ोसी शहर रुड़की में आज ईद-उल-फितर का त्यौहार पूरे अकीदत और उत्साह के साथ मनाया गया। शहर की मुख्य ईदगाह और मस्जिदों में हजारों की संख्या में रोजेदारों ने नमाज अदा की और एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी। इस दौरान रुड़की की सड़कों पर आपसी भाईचारे की वह खूबसूरत तस्वीर दिखी, जिसे देश की असली ताकत 'गंगा-जमुनी तहजीब' कहा जाता है।
हजारों हाथों ने उठकर मांगी अमन की दुआ
सुबह होते ही रुड़की नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से सफेद लिबास में सजे हजारों लोग ईदगाह पहुंचे। नमाज के दौरान एक साथ झुकते हजारों सिरों का दृश्य बेहद भावुक और गरिमामयी था। नमाजियों ने खुदा से अपने परिवार के साथ-साथ देश की खुशहाली, तरक्की और शांति के लिए विशेष दुआ मांगी।
फूलों से स्वागत और मिठाइयों की मिठास
नमाज के बाद जब लोग ईदगाह से बाहर निकले, तो हिंदू-मुस्लिम एकता का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला:
- पुष्प वर्षा: वरिष्ठ कांग्रेस नेता एडवोकेट महिपाल सिंह और उनके साथियों ने नमाजियों पर फूलों की बारिश कर उनका भव्य स्वागत किया।
- मिठाइयों का वितरण: राहगीरों और नमाजियों को मिठाइयां खिलाकर ईद की खुशियां बांटी गईं।
- नेताओं का संदेश: एडवोकेट महिपाल सिंह ने कहा कि ईद का त्यौहार हमें प्रेम और एकता सिखाता है। सभी धर्मों का सम्मान ही हमारे लोकतंत्र की नींव है।
प्रशासनिक सतर्कता: चप्पे-चप्पे पर पहरा
त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए रुड़की पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा:
- ड्रोन से निगरानी: संवेदनशील इलाकों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर ड्रोन कैमरों के जरिए पैनी नजर रखी गई।
- सुरक्षा घेरा: मुख्य ईदगाह और चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिससे यातायात व्यवस्था भी सुचारु बनी रही।
बच्चों में ईदी का उत्साह
बाजारों में भी रौनक देखते ही बन रही थी। नए कपड़े पहनकर बच्चे अपने बुजुर्गों से 'ईदी' लेते और खिलौनों की दुकानों पर खुशियां मनाते नजर आए। सेंवई की खुशबू और मेलों की रौनक ने रुड़की के माहौल को पूरी तरह खुशनुमा बना दिया।
प्रमुख बाइट्स:
- एडवोकेट महिपाल सिंह (वरिष्ठ कांग्रेस नेता): "ईद का यह पर्व दिलों की दूरियां मिटाने का दिन है। रुड़की ने आज फिर साबित किया कि हम सब पहले भारतीय हैं।"
- आशीष सैनी (वरिष्ठ कांग्रेस नेता): "एकता और भाईचारा ही हमारी संस्कृति है, जिसे हमें आने वाली पीढ़ियों तक लेकर जाना है।"
रुड़की की यह ईद केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला एक सेतु साबित हुई। फूलों की पंखुड़ियों ने आज नफरतों को मिटाकर मोहब्बत का पैगाम घर-घर पहुंचाया।
