देहरादून, 21 मार्च 2026: राजधानी देहरादून में अनाथ और वंचित बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जिलाधिकारी सविन बंसल की अनूठी पहल 'परियोजना नंदा-सुनंदा' मील का पत्थर साबित हो रही है। शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने योजना के 14वें संस्करण के तहत 10 और जरूरतमंद बच्चों को वित्तीय सहायता राशि के चेक प्रदान किए।
आज की बड़ी उपलब्धि: 2 लाख से अधिक की सहायता
जिला प्रशासन द्वारा आज 10 लाभार्थी बच्चों को कुल 2,02,800 रुपये की धनराशि के चेक वितरित किए गए। यह राशि उन बालिकाओं को प्रदान की गई है जो विपरीत परिस्थितियों के कारण अपनी शिक्षा जारी रखने में असमर्थ थीं।
परियोजना नंदा-सुनंदा: एक नजर में
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| योजना का नाम | परियोजना नंदा-सुनंदा |
| प्रयासकर्ता | सविन बंसल (जिलाधिकारी, देहरादून) |
| लक्ष्य समूह | अनाथ, निराश्रित और वंचित वर्ग की लड़कियां |
| मुख्य लाभ | वित्तीय सहायता और मुफ्त उच्च शिक्षा सुनिश्चित करना |
| अब तक का लाभ | कुल 136 बच्चों को मिल चुकी है मदद |
"शिक्षा से वंचित नहीं रहेगी कोई बेटी": जिलाधिकारी
इस अवसर पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि उत्तराखंड सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के अंतर्गत इस योजना को देहरादून में प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। उन्होंने कहा:
"आज इस योजना का 14वां चरण संपन्न हुआ है। हमारा लक्ष्य उन बच्चों तक पहुंचना है जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ गया है या जो आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ रहे हैं। अब तक 136 बच्चों को इस योजना से जोड़ा जा चुका है और यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।"
मुफ्त उच्च शिक्षा का संकल्प
'नंदा-सुनंदा' योजना केवल तत्काल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। जिलाधिकारी की इस पहल के माध्यम से चिन्हित बालिकाओं के लिए मुफ्त उच्च शिक्षा (Free Higher Education) के रास्ते भी खोले जा रहे हैं, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपना स्थान बना सकें।
प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल
देहरादून जिला प्रशासन की यह कार्रवाई दर्शाती है कि यदि नेतृत्व संवेदनशील हो, तो सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच सकता है। 'नंदा-सुनंदा' परियोजना आज देहरादून की उन सैकड़ों बेटियों के लिए उम्मीद की किरण बन गई है, जो अपनी आंखों में बेहतर भविष्य के सपने संजोए हुए हैं।
