डीएम डॉ. आशीष चौहान ने गठित की विशेष टास्कफोर्स; ड्रोन सर्वे कर 7 दिन में मांगा 15 किमी का विस्तृत एक्शन प्लान


Aapki Media AI


देहरादून, 27 जून, 2026: उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून की लाइफलाइन और ऐतिहासिक पर्यावरणीय धरोहर रिस्पना (ऋषिपर्णा) नदी के विधिक संरक्षण, पुनर्जीवन और सौंदर्यीकरण के लिए जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा 'मिशन-मोड' अभियान शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी (DM) डॉ. आशीष चौहान ने आज शनिवार (27 जून) को कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में विभिन्न अंतर्विभागीय अधिकारियों के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन केवल कोई पारंपरिक या फाइलों तक सीमित सरकारी अभियान नहीं है, बल्कि यह जनसहभागिता (Public Participation) से जुड़ा एक व्यापक, संवेदनशील और अनिवार्य पर्यावरणीय मिशन है। नदी के अस्तित्व को बचाने और दून घाटी के गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए प्रशासन अब पूरी तरह से आधुनिक तकनीक और कड़े प्रशासनिक दंड विधान का सहारा लेने जा रहा है।

 

डीएम डॉ. आशीष चौहान ने गठित की विशेष टास्कफोर्स; ड्रोन सर्वे कर 7 दिन में मांगा 15 किमी का विस्तृत एक्शन प्लान


तकनीकी नवाचार और कड़ा विधिक एक्शन: 15 किमी का ड्रोन सर्वे और 7 दिन की डेडलाइन


नदी के जलग्रहण और शहरी प्रवाह क्षेत्रों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जिलाधिकारी ने नगर निगम और सिंचाई विभाग को आधुनिकतम विधिक व तकनीकी प्रणाली अपनाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं:


  1. ड्रोन और स्ट्रेचवार सर्वे (Drone & Stretch-wise Survey): नगर निगम को निर्देशित किया गया है कि मसूरी की पहाड़ियों से लेकर देहरादून शहर तक रिस्पना नदी के लगभग 15 किलोमीटर के संपूर्ण प्रवाहित क्षेत्र का तत्काल ड्रोन सर्वे कराया जाए। इस सर्वे के जरिए नदी में गिरने वाले सभी अवैध नालों और कचरा फेंकने वाले डंपिंग प्वाइंट्स (Garbage Points) का सटीक डिजिटल विधिक चिन्हीकरण किया जाएगा।
  2. टास्कफोर्स का गठन (Special Task Force): डीएम ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को निर्देशित किया कि विभिन्न विभागों के मध्य विधिक समन्वय स्थापित करने के लिए तत्काल एक प्रभावी 'रिस्पना पुनर्जीवन टास्कफोर्स' का गठन किया जाए, जो साप्ताहिक प्रगति आख्या प्रस्तुत करेगी।

 

रिस्पना नदी (ऋषिपर्णा) पुनरुद्धार मिशन 2026: विभागीय जिम्मेदारी एवं सुशासन मैट्रिक्स


नदी के कायाकल्प के लिए विभिन्न तकनीकी विभागों को सौंपे गए विधिक दायित्वों, भौतिक लक्ष्यों और प्रशासनिक समय-सीमा का संपूर्ण प्रामाणिक डेटा इस नीतिगत तालिका में संकलित है:

संबंधित सरकारी विभाग एवं नोडल अधिकारीआवंटित विशिष्ट विधिक व तकनीकी कार्यजिलाधिकारी द्वारा निर्धारित कड़े प्रशासनिक निर्देश एवं डेडलाइन
मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाहअंतर-विभागीय समन्वय हेतु विशेष टास्कफोर्स का गठन।सभी विभागों की संयुक्त कार्ययोजना की रीयल-टाइम विधिक निगरानी।
नगर निगम देहरादून15 किलोमीटर क्षेत्र का ड्रोन सर्वे व नालों का चिन्हीकरण।प्रत्येक हॉटस्पॉट पर कूड़े की मात्रा और सफाई का 07 दिन में विस्तृत प्रस्ताव।
सिंचाई विभाग (Irrigation Dept)नदी तटों पर आधुनिक घाट निर्माण एवं सौंदर्यीकरण।नदी के किनारों को विकसित करने और कटाव रोकने का स्थायी तकनीकी प्लान।
लोक निर्माण विभाग (PWD)प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के पिलर्स का तकनीकी ढांचा।नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पारिस्थितिकी (Ecology) को बिना नुकसान पहुँचाए निर्माण।
प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) नीरज शर्माव्यापक वृक्षारोपण एवं हरित पट्टी (Green Belt) विकास।नदी के उद्गम और तटों पर मृदा संरक्षण हेतु औषधीय व छायादार पौधों का रोपण।
नगर पालिका मसूरीमसूरी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कैचमेंट की नियमित सफाई।उद्गम स्थल से ही नदी में किसी भी प्रकार के ठोस या तरल अपशिष्ट के जाने पर पूर्ण रोक।

दो-चरणीय रणनीति: शॉर्ट टर्म स्वच्छता और लॉन्ग टर्म स्थायी विधिक आधारभूत अवसंरचना


जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कलेक्ट्रेट की बैठक में रिस्पना नदी के कायाकल्प के लिए एक सुस्पष्ट दो-चरणीय विधिक नीति (Two-Tier Strategy) के तहत चरणबद्ध रूप से कार्य करने के निर्देश दिए हैं:


शॉर्ट टर्म एवं लॉन्ग टर्म विजन पर जिलाधिकारी का आधिकारिक विधिक वक्तव्य:


 

रिस्पना नदी को पुनर्जीवित करने के 4 मुख्य रणनीतिक व पर्यावरणीय स्तंभ


नदी के प्राकृतिक स्वरूप को वापस लौटाने और दून के नागरिकों को इस मिशन का हिस्सा बनाने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित चार विधिक स्तंभों को क्रियान्वित करने का निर्णय लिया है:


  • डिजिटल मैपिंग और नालों की टैपिंग (Nallah Tapping): ड्रोन सर्वे से चिन्हित होने वाले सभी घरेलू और औद्योगिक गंदे नालों को सीधे नदी में मिलने से रोकने के लिए कड़े विधिक नियमों के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जोड़ा जाएगा।
  • व्यवहार परिवर्तन हेतु जनजागरूकता (Behavioral Change Campaign): नदी किनारे बसी बस्तियों और कॉलोनियों के स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) और शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय सहभागिता से डोर-टू-डोर विधिक कचरा प्रबंधन अभियान चलाना।
  • मसूरी कैचमेंट का सख्त पर्यावरण ऑडिट: नगर पालिका मसूरी और वन विभाग संयुक्त रूप से ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे ताकि पर्यटकों द्वारा फैलाया जाने वाला कचरा बरसात के पानी के साथ बहकर रिस्पना के निचले बेसिन में न आ सके।
  • हरित गलियारा (Eco-Green Corridor) का विकास: वन विभाग द्वारा नदी के समानांतर एक सघन हरित पट्टी का विकास किया जाएगा, जो न केवल नदी के पानी को शुद्ध करने में मदद करेगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और शहर की सुंदरता को भी बढ़ाएगी।
 

उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक की उपस्थिति: सामूहिक उत्तरदायित्व का धरातल

ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें मुख्य विकास अधिकारी श्री अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) श्री नीरज शर्मा, नगर मजिस्ट्रेट (City Magistrate) श्री आशीष तिवारी सहित नगर निगम, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग तथा नगर पालिका मसूरी के अधिशासी अधिकारी व विधिक अभियंता मुख्य रूप से मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को आपसी मतभेद और विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर एक संयुक्त टीम के रूप में काम करने और आगामी एक सप्ताह के भीतर अपनी प्रारंभिक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए।

 

दून की आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐतिहासिक विधिक और पर्यावरणीय पहल


27 जून 2026 को देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान द्वारा रिस्पना नदी के पुनरुद्धार के लिए उठाए गए ये प्रशासनिक कदम इस अकाट्य सत्य को प्रमाणित करते हैं कि शहरीकरण के दबाव में दम तोड़ती नदियों को केवल तभी बचाया जा सकता है जब दृढ़ विधिक इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक का संगम हो।


15 किलोमीटर के नदी क्षेत्र का ड्रोन सर्वे कराने, 7 दिनों के भीतर एक्शन प्लान मांगने और विशेष कूटनीतिक टास्कफोर्स का गठन करने जैसे निर्णय यह दर्शाते हैं कि देहरादून प्रशासन इस बार रिस्पना के कायाकल्प को लेकर अत्यधिक गंभीर है। यदि सभी संबंधित विभाग और देहरादून के जागरूक नागरिक इस मिशन मोड अभियान में अपनी विधिक और नैतिक जिम्मेदारी निभाते हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब 'ऋषिपर्णा' अपने प्राचीन, अविरल और निर्मल स्वरूप में लौट आएगी, जो देवभूमि की सतत पर्यावरणीय प्रगति का सबसे बड़ा उदाहरण बनेगी।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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